
Aamir Khan Sonam Wangchuk: दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट (NEET) परीक्षा में धांधली और शिक्षा सुधारों को लेकर लद्दाख के फेमस एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) का अनिश्चितकालीन अनशन जारी है। उनके इस आंदोलन को पूरे देश और बॉलीवुड से भरपूर समर्थन मिल रहा है। लेकिन इसी बीच, सुपरस्टार आमिर खान (Aamir Khan) और सोनम वांगचुक के रिश्तों को लेकर एक बहुत बड़ा और हैरान करने वाला विवाद सामने आ गया है, जिसने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है।
हाल ही में आमिर खान ने यह बयान देकर सबको चौंका दिया था कि फिल्म '3 इडियट्स' (3 Idiots) का मशहूर किरदार 'रैंचो' (फुनसुख वांगडू) सोनम वांगचुक से प्रेरित नहीं था और फिल्म बनाने से पहले वह वांगचुक को जानते तक नहीं थे। लेकिन अब एक वीडियो सामने आया है जिसमें सोनम वांगचुक कहते दिख रहे हैं कि उनकी आमिर से मुलाकात हुई थी। अब इस वीडियो के बाद एक्टर के बयान पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
फिल्म '3 इडियट्स' के रिलीज होने यानी दिसंबर 2009 से एक साल पहले, साल 2008 में आमिर खान और सोनम वांगचुक की न सिर्फ मुलाकात हुई थी, बल्कि दोनों के बीच लंबी बातचीत भी हुई थी। लद्दाख के सरहदी इलाकों में शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी काम करने के लिए CNN-IBN ने सोनम वांगचुक को 'रियल हीरोज अवॉर्ड' से सम्मानित किया था। इसी बड़े समारोह में आमिर खान बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए थे।
समारोह के दौरान सोनम वांगचुक ने आमिर खान को एक बेहद शानदार सुझाव भी दिया था। उन्होंने कहा था कि सियाचिन विवाद पर एक ऐसी फिल्म बनाई जानी चाहिए, जो यह दिखाए कि कैसे सेना पर प्रतिदिन खर्च होने वाले 5 से 7 करोड़ रुपये को बचाकर देश की शिक्षा व्यवस्था को सुधारा जा सकता है।
वांगचुक ने उस मंच से एक बेहद गहरी बात कही थी। उन्होंने कहा, "21वीं सदी में देश के लिए जान देने की नहीं, बल्कि जिंदगी देने की जरूरत है।" उन्होंने तर्क दिया था कि सरहदी इलाकों के स्कूलों की हालत बहुत खराब है, और अगर सुरक्षा पर खर्च होने वाला यह पैसा शिक्षा में जाए, तो शिक्षित युवा ही हमारी सबसे बड़ी सुरक्षा बनेंगे। इस समारोह में मौजूद दिग्गज लेखक जावेद अख्तर ने भी वांगचुक के इस "जिंदगी और जान" वाले विचार की जमकर तारीफ की थी। ऐसे में आमिर का यह कहना कि वह वांगचुक को नहीं जानते थे, फैंस के गले नहीं उतर रहा है।
जब 2009 के अंत में फिल्म 3 इडियट्स रिलीज हुई थी तब वांगचुक फ्रांस में आर्किटेक्चर (Architecture) सीख रहे थे। उन्हें बाद में पता चला कि उन पर आधारित कोई फिल्म बनी है। दरअसल, फिल्म के मेकर्स ने शूटिंग के लिए पहले वांगचुक के लद्दाख स्थित विद्यालय (SECMOL) से संपर्क किया था। लेकिन प्लास्टिक कचरे और पर्यावरण के मुद्दों के कारण उनके स्कूल ने शूटिंग की इजाजत नहीं दी, जिसके बाद मेकर्स ने पास के ही एक दूसरे स्कूल में शूटिंग की थी।
सोनम वांगचुक का मानना है कि भारत में बॉलीवुड और क्रिकेट को जरूरत से ज्यादा महत्व दिया जाता है, जबकि देश को वास्तविक आविष्कारों (Inventions) की जरूरत है। उन्होंने फिल्म के मेकर्स को लेटर लिखने में दो साल की देरी इसलिए की, क्योंकि उस समय लेखक चेतन भगत और मेकर्स के बीच क्रेडिट को लेकर विवाद चल रहा था और वह नहीं चाहते थे कि लोग उन्हें पैसे मांगने वाला समझें। बाद में पत्र लिखने पर भी उन्हें कोई जवाब नहीं मिला, लेकिन वह अपने सामाजिक कार्यों में व्यस्त हैं और किसी जवाब की उम्मीद भी नहीं कर रहे हैं।