Actress Sandeepa Virk On Tihar Jail: एक्ट्रेस संदीपा विर्क अब तिहाड़ जेल से 4 महीने बाद बेल पर बाहर आ गई है। ऐसे में उन्होंने अपने साथ हुई जेल में आपबीती को दरिंदगी बताया है। उनका कहना है कि जेल में महिलाओं के साथ बेहद खराब व्यवहार किया जाता है। उनका जब प्रेग्नेंसी टेस्ट हुआ तो वह भी जूनियर डॉक्टर्स के सामने हुआ। हर कोई उन्हें बुरी नजरों से देख रहा था।
Actress Sandeepa Virk: बॉलीवुड एक्ट्रेस और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर संदीपा विर्क इन दिनों अपनी प्रोफेशनल लाइफ से ज्यादा अपनी आपबीती को लेकर सुर्खियों में हैं। करीब 6 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले (PMLA) में नाम आने के बाद संदीपा को दिल्ली की तिहाड़ जेल में 4 महीने बिताने पड़े। हाल ही में जमानत पर बाहर आने के बाद उन्होंने जेल के उन अंधेरे कमरों और व्यवस्था की सच्चाई को बयां किया है, जिसे सुनकर किसी की भी रूह कांप जाए।
संदीपा विर्क ने ज्योत्सना बेदी संग बातचीत की। इस दौरान उन्होंने बताया कि जेल के अंदर जाने की प्रक्रिया ही इतनी डरावनी और अपमानजनक है कि इंसान खुद की नजरों में गिर जाता है। संदीपा ने कहा, "हमारे समाज और सिस्टम की सबसे बड़ी कमी यह है कि वह आपको दोषी साबित होने से पहले ही मुजरिम मान लेता है। जेल में एंट्री के समय जो 'चेकिंग' होती है, वह किसी भी महिला के आत्मसम्मान को तार-तार करने के लिए काफी है। ब्रेस्ट को उठाकर हर जगह से चेकिंग की जाती है।"
एक्ट्रेस ने जेल के अंदर की कड़वी हकीकत शेयर करते हुए बताया कि वहां ड्यूटी पर तैनात महिला सुरक्षाकर्मी बहुत ही बदतमीजी से पेश आती हैं। उन्होंने बताया, "जेल के अंदर जब महिलाओं की चेकिंग होती है, तो वह बहुत शर्मनाक होती है। जिन महिलाओं के ब्रेस्ट साइज बड़े होते हैं, उन्हें उठाकर चेक किया जाता है कि कहीं नीचे कुछ छिपाया तो नहीं गया है। यह सब कुछ बहुत रूड और असंवेदनशील तरीके से किया जाता है।" संदीपा ने आगे कहा कि कई लोगों ने उन्हें इन सब बातों को सार्वजनिक न करने की सलाह दी, लेकिन अब वह किसी से नहीं डरतीं। उनके मुताबिक, उन्होंने जो झेल लिया है, उससे बुरा अब उनकी जिंदगी में और कुछ नहीं हो सकता।
जेल जाने से पहले की रात को याद करते हुए संदीपा भावुक हो गईं। उन्होंने बताया कि गिरफ्तारी के बाद उन्हें दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल ले जाया गया था। वहां आधी रात के समय कम उम्र के इंटर्न डॉक्टरों के सामने उनका प्रेग्नेंसी टेस्ट कराया गया। संदीपा ने कहा, "वहां आपको बहुत गंदी नजरों से देखा जाता है। वह एहसास ऐसा था जैसे आपने अपनी सारी सेल्फ-रिस्पेक्ट खो दी हो।"
संदीपा विर्क की बातें जेल सुधारों और कैदियों (खासकर महिलाओं) के साथ होने वाले व्यवहार पर बड़े सवाल खड़े करती हैं। उनका सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब तक किसी व्यक्ति पर आरोप साबित न हो जाए, तब तक उसके साथ एक खतरनाक मुजरिम जैसा सुलूक क्यों किया जाता है? फिलहाल संदीपा जमानत पर बाहर हैं और अपनी सामान्य जिंदगी में लौटने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन तिहाड़ के वो 4 महीने उनके जहन में एक गहरे जख्म की तरह छप गए हैं।