
Ajay Devgn On Father Veeru Devgn: बॉलीवुड अभिनेता अजय देवगन (Ajay Devgn) अपने शांत और गंभीर स्वभाव के लिए जाने जाते हैं। अपनी निजी जिंदगी के बारे में बहुत कम बोलने वाले अजय देवगन ने अपने स्वर्गीय पिता और हिंदी सिनेमा के मशहूर एक्शन डायरेक्टर वीरू देवगन (Veeru Devgan) को लेकर कुछ खुलासे किए हैं। अजय ने पिता-पुत्र के बदलते रिश्तों, अल्जाइमर की बीमारी और उस दौर में स्टंट करने के दौरान आने वाले गंभीर खतरों पर खुलकर अपनी बात रखी। साथ ही उन्होंने कहा कि बच्चों को माता- पिता 20 साल की उम्र तक बेवकूफ ही लगते हैं।
अजय देवगन ने एडवेंचर रियलिटी शो 'इनटू द वाइल्ड विद बेयर ग्रिल्स' (Into The Wild with Bear Grylls) के एक विशेष एपिसोड के दौरान कई खुलासे किए। इस दौरान जब अजय से उनके पिता के निधन के बारे में पूछा, तो अभिनेता ने बेहद संजीदगी और भावुकता से इसका जवाब दिया। उन्होंने बताया कि किस तरह उम्र के पड़ाव के साथ माता-पिता को लेकर बच्चों का नजरिया पूरी तरह बदल जाता है।
अजय देवगन ने रिश्ते का कड़वा सच बयां करते हुए कहा, "माता-पिता को खोना बेहद मुश्किल होता है। सच तो यह है कि 20 साल की उम्र तक आप उनकी परवाह नहीं करते। उस उम्र में आपको लगता है कि वह बेवकूफ हैं और उन्हें कुछ नहीं पता, जबकि आप सब कुछ जानते हैं। लेकिन जब आपके खुद के बच्चे होते हैं, तब आपको असली मायने में समझ आता है कि माता-पिता क्या होते हैं और वह हमेशा आपका भला ही चाहते थे। लेकिन, इस बात को समझने में बहुत समय लग जाता है।"
बेयर ग्रिल्स ने जब अजय देवगन से पूछा कि उनके पिता को क्या हुआ था, तो 'गोलमाल' स्टार ने बताया कि उनके पिता जिंदगी के अंतिम सालों में अल्जाइमर (Alzheimer's) जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित थे। इसके साथ ही, एक्शन डायरेक्टर के रूप में काम करते हुए उन्हें कई बार गंभीर शारीरिक चोटों का सामना करना पड़ा था।
पुराने दिनों के खतरनाक शूटिंग माहौल को याद करते हुए अजय ने बताया कि एक बार शूटिंग के दौरान कार के सामने से गुजरते वक्त उनके पिता के सिर पर गंभीर चोट लग गई थी। अजय ने कहा कि उस दौर में स्टंट सीक्वेंस के लिए असली शीशों का इस्तेमाल किया जाता था, जिससे गंभीर चोटें आई थीं। आज के समय में भले ही टफ ग्लास (Toughened Glass) का इस्तेमाल होता है जिससे दर्द होता है, लेकिन पुराने दौर के असली कांच से लगने वाली चोटें बहुत ज्यादा दर्दनाक और खतरनाक होती थीं।
अजय देवगन के इस बेबाक और संवेदनशील बयान ने न केवल एक्शन सिनेमा के शुरुआती दौर के कठिन संघर्ष को उजागर किया, बल्कि हर उस व्यक्ति को सोचने पर मजबूर कर दिया जो अपने माता-पिता के त्याग और प्यार की अहमियत देर से समझता है।