
Anupam Kher On Narendra Modi disrespectful: नीट (NEET) परीक्षा में गड़बड़ी और पेपर लीक के खिलाफ छात्रों का विरोध प्रदर्शन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए आश्वासन के बाद आंदोलन समाप्त हो चुका है, लेकिन इस पर सियासत और बहस अभी भी जारी है। जहां एक ओर देश भर में छात्रों के साहस की तारीफ हो रही है, Gen Z को लोग सपोर्ट कर रहे हैं और अपने भविष्य को मजबूत बता रहे हैं वहीं दूसरी ओर दिग्गज अभिनेता अनुपम खेर ने नरेंद्र मोदी को सपोर्ट करते हुए कुछ ऐसा कहा जो तेजी से वायरल हो रहा है।
अनुपम खेर ने अपने इंस्टाग्राम और X (पूर्व में ट्विटर) पर एक वीडियो शेयर किया है। उन्होंने कहा कि जब छात्र पूरी ईमानदारी से अपनी आवाज उठाते हैं, तो लोकतंत्र उनकी बात जरूर सुनता है। उन्होंने इस बात पर खुशी जताई कि बातचीत से अंततः समाधान निकला। लेकिन अभिनेता ने सार्वजनिक मंचों पर देश के प्रधानमंत्री के लिए इस्तेमाल की गई अभद्र और अशोभनीय भाषा पर भी अपनी सख्त नाराजगी जताई है। अनुपम खेर ने वीडियो में कहा, आंदोलन समाप्त हो गया। बहुत सी बातें स्पष्ट हो गई। यह भी साबित हो गया कि जब छात्र अपनी बात पूरी ईमानदारी और दृढ़ता से रखते हैं तो लोकतंत्र उन्हें सुनता है। शायद ये संवाद पहले हो सकता था। शायद तब परिस्थितियां यहां तक नहीं पहुंचती। लेकिन अंततः समाधान निकला। यही लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति है। अब समय है कि हम आगे बढ़े। देश किसी एक आंदोलन पर नहीं रुक सकता।"
अनुपम खेर ने आगे कहा, "देश को भविष्य की ओर बढ़ना ही होता है। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में एक बात ने हम सबको भीतर तक दुखी किया है। कैमरे के सामने सार्वजनिक मंचों पर जिस तरह से भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के लिए अपमानजनक और अशोभनीय भाषा का इस्तेमाल किया गया। उसे देखकर मन दुखी हुआ। ये केवल किसी एक व्यक्ति का प्रश्न नहीं है। ये उस संस्कृति का प्रश्न है जिसे हम आने वाली पीढ़ियों के लिए छोड़कर जाना चाहते हैं।
लोकतंत्र हमें असहमति का अधिकार देता है। लेकिन अपमान का नहीं। हम किसी भी नेता से असहमत हो सकते हैं। उनकी नीतियों की कठोर से कठोर आलोचना कर सकते हैं। तुमसे सवाल पूछ सकते हैं। यही तो लोकतंत्र की आत्मा है। लेकिन जब तर्क समाप्त हो जाते हैं और गालियां शुरू हो जाती हैं। तब बहस नहीं रहती। सिर्फ शोर बजता है। श्री नरेंद्र मोदी जी पिछले 30 वर्षों से सार्वजनिक जीवन में है। देश की जनता ने उन्हें बार-बार अपना विश्वास दिया है। उन्होंने अपना पूरा जीवन सार्वजनिक सेवा में लगाया है और विश्व मंच पर भारत की आवाज को एक नई पहचान दी है। हम उनके हर निर्णय से सहमत हो यह आवश्यक नहीं है। लेकिन किसी भी निर्वाचित प्रधानमंत्री के पद की गरिमा का सम्मान करना मेरे ख्याल से हम सब का दायित्व है।
अनुपम खेर ने आगे दुख जताते हुए कहा, "दुख इस बात का नहीं कि उनका विरोध हुआ। लोकतंत्र में विरोध स्वाभाविक है। दुख इस बात का है कि विरोध की भाषा इतनी छोटी हो गई। और ये केवल युवाओं तक सीमित नहीं था। हर आयु वर्ग के लोग इस गिरती हुई भाषा का हिस्सा बने। जब हम बड़े ही मर्यादा भूल जाए तो फिर आने वाली पीढ़ियों से संस्कारों की अपेक्षा कैसे कर सकते हैं? हम अक्सर कहते हैं कि हमें भारत को विश्व गुरु बनाना है। लेकिन विश्व गुरु केवल अर्थव्यवस्था, विज्ञान या तकनीक से नहीं बनता। विश्व गुरु बनने के लिए विचारों में ऊंचाई और भाषा में मर्यादा भी चाहिए।"
वीडियो के अंत में अनुपम खेर ने देश की आने वाली पीढ़ियों और भारतीय संस्कृति का हवाला देते हुए कहा कि भारत केवल आर्थिक या तकनीकी रूप से ही विश्वगुरु नहीं बन सकता, बल्कि इसके लिए विचार और भाषा में भी शालीनता जरूरी है। उन्होंने अपील की कि मतभेद हो सकते हैं, लेकिन मर्यादा (डिग्निटी) कभी खत्म नहीं होनी चाहिए, क्योंकि गरिमा ही एक सभ्य देश की सबसे बड़ी ताकत है।