Asha Bhosle Last Song Dhurandhar: बॉलीवुड की दिग्गज गायिका आशा भोसले ने 92 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया है। आशा ताई की आखिरी बार आवाज धुरंधर फिल्म में सुनने को मिली थी।
Asha Bhosle Last Song Dhurandhar: भारतीय फिल्म संगीत के इतिहास में कुछ गीत ऐसे हैं जो समय के साथ पुराने नहीं पड़ते, बल्कि हर नई पीढ़ी के साथ और भी लोकप्रिय होते जाते हैं। ऐसा ही एक गीत है 'पिया तू अब तो आजा', जिसे आशा भोसले की आवाज ने अमर बना दिया। दशकों बाद भी इस गीत का आकर्षण बरकरार है और हाल ही में फिल्म 'धुरंधर' में इसके नए रूप ने दर्शकों को एक बार फिर झूमने पर मजबूर कर दिया है।
साल 1971 में रिलीज हुई फिल्म 'कारवा' का यह गीत उस दौर में अपने अलग अंदाज और साहसिक प्रस्तुति के कारण चर्चा में रहा था। संगीतकार आरडी बरमन ने इस गीत को बेहद अलग अंदाज में तैयार किया था, जबकि इसके बोल मशहूर शायर मजरू सुल्तानपुरी ने लिखे थे।
बताया जाता है कि जब इस गीत की रिकॉर्डिंग चल रही थी, तब इसके बोलों को लेकर खुद गीतकार भी थोड़ा असहज महसूस करने लगे थे। उस दौर के हिसाब से गीत का अंदाज काफी बोल्ड माना जाता था। यहां तक कि रिकॉर्डिंग के दौरान वे स्टूडियो से बाहर चले गए थे। हालांकि संगीतकार आरडी बर्मन को पूरा भरोसा था कि यह गीत दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाएगा—और उनका अनुमान बिल्कुल सही साबित हुआ।
शुरुआत में आशा भोसले को भी इस तरह के प्रयोगात्मक गीतों को लेकर कुछ संकोच था, लेकिन उनकी आवाज़ और आरडी बर्मन के संगीत के मेल ने इस गीत को सुपरहिट बना दिया। गीत की “मोनिका ओ माय डार्लिंग” जैसी पंक्तियां आज भी श्रोताओं की जुबान पर हैं और इसे हिंदी फिल्म संगीत के सबसे यादगार गीतों में गिना जाता है।
दिलचस्प बात यह है कि वर्षों बाद इसी गीत को फिल्म ‘धुरंधर’ में नए अंदाज में इस्तेमाल किया गया है। फिल्म के एक रोमांचक चेज़ सीक्वेंस में रणवीर सिंह और सारा अर्जुन पर फिल्माया गया ये सीन दर्शकों के बीच खासा पसंद किया जा रहा है। इस रीमिक्स वर्जन ने पुराने गीत को नई ऊर्जा के साथ फिर से चर्चा में ला दिया है।
आशा भोसले ने अपने लंबे करियर में 12 हजार से अधिक गीत गाए और 20 से ज्यादा भाषाओं में अपनी आवाज़ का जादू बिखेरा। उनकी गायकी की खासियत यह रही कि उन्होंने हर शैली—चाहे वह रोमांटिक गीत हों, ग़ज़लें हों या फिर कैबरे स्टाइल के गाने—हर रूप में अपनी अलग पहचान बनाई।
'दम मारो दम' जैसे गीतों के साथ भी उन्होंने उस दौर में प्रयोगात्मक संगीत को लोकप्रिय बनाने में अहम भूमिका निभाई। आज ‘धुरंधर’ में ‘पिया तू अब तो आजा’ की वापसी यह साबित करती है कि अच्छा संगीत कभी पुराना नहीं होता। नई पीढ़ी भी इस गीत को उतने ही उत्साह से सुन रही है, जितना पहले सुना जाता था।