Chand Mera Dil Movie Review: अनन्या पांडे और लक्ष्य की फिल्म चांद मेरा दिल आज सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। इस फिल्म को देखने से पहले जरूर पढ़ लें इसका रिव्यू।
Chand Mera Dil Review: कहते हैं कि मोहब्बत में बहुत ताकत होती है, इश्क अगर सच्चा हो तो हर मुश्किल भी आसान लगने लगती है। हर टूटे हुए दिल पर प्यार दर्द पर मरहम की तरह काम करता है। हालांकि अनन्या पांडे और लक्ष्य स्टारर फिल्म 'चांद मेरा दिल' ये बताकर जाती है कि प्यार कभी-कभी जाने अनजाने में आपको दर्द भी देकर चला जाता है। कभी-कभी खुद प्यार ही आपके दिल को तोड़कर रख देता है और आपको एक ऐसा जख्म दे जाता है जिसके गम से आपको उबरने में काफी समय लग जाए। हालांकि मोहब्बत के अंजाम से ज्यादा जरूरी उसका सफर होता है और ये फिल्म आपको एक प्यार के सफर पर जरूर ले जाती है। चलिए पढ़ते हैं इस फिल्म का रिव्यू। शुरुआत करते हैं कहानी से।
कहानी बेहद ही सिंपल सी है, हर प्रेम कहानी की ही तरह इस कहानी में भी इम्हितान है। सब्र का इम्तिहान। ये ना सिर्फ फिल्म के कलाकारों का इम्तिहान लेती है लेकिन दर्शकों का भी पेशेंस चेक होता है। फिल्म की शुरुआत कॉलेज से होती है जहां चांदनी (अनन्या) को देखते ही आरव(लक्ष्य) अपना दिल हार बैठते हैं। इसके बाद शुरु होती है दोनों की लवस्टोरी। इस प्रेमकहानी में बाकियों की ही तरह वो सबकुछ है। बैकग्राउंड में बजते फिल्मी गाने, इश्क में डूबे दो प्रेमी, जो अपने करियर और पढ़ाई को भी भूल बैठे हैं। इसके बाद कहानी में बड़ा ट्विस्ट आता है जहां चांदनी अब आरव के बच्चे की मां बनने वाली है। बस इसी के बाद शुरु होती है फिल्म की असली कहानी। अब कॉलेज में पढ़ते हुए दो छात्र कैसे इस स्थिति का सामना करते हैं, फिल्म अगले डेढ़ घंटे में यही कुछ बयां करती है।
फिल्म के निर्देशन की कमान संभाली है विवेक सोनी ने, जिन्होंने साधारण सी कहानी को अपने अंदाज में रोमांटिक बनाने की पूरी कोशिश की है लेकिन दर्शक ज्यादा समय तक कहानी के साथ जुड़े रहने में थोड़ा संकोच जरूर करेंगे। इसका सीधा सा कारण ये है कि फिल्म में ना तो कोई ट्विस्ट है और ना ही कोई ज्यादा रोमांचक मोड़। ऐसा लगता है कि जैसे स्टोरी काफी ज्यादा प्रेडेक्टिबेल हो गई है। हर कोई गेस कर सकता है कि आगे कहानी में क्या होने वाला है। इसलिए निर्देशन के छोर पर थोड़ी बहुत चूक जरूर हो गई है।
इस फिल्म में कोई लंबी-चोड़ी स्टारकास्ट देखने को नहीं मिलती है। क्योंकि ये पूरी कहानी सिर्फ दो ही किरदारों के ईर्द-गिर्द रहती है इसलिए अनन्या पांडे और लक्ष्य के अलावा बाकी किसी और के पास ज्यादा कुछ करने के लिए है नहीं। अनन्या पांडे ने पिछली कुछ फिल्मों से बताया है कि वो लगातार अपनी एक्टिंग में अच्छा कर रही हैं। वो लगातार आगे बढ़ रही है। एक अभिनेत्री के तौर पर वो तरक्की पर हैं। वहीं लक्ष्य भी पूरी फिल्म में काफी कन्विंसिंग लगते हैं। लक्ष्य ने भी इस फिल्म में अपने रोमाटिंक लवर वाली इमेज को बरकरार रखा है और बाखूबी अपने किरदार को निभाया है।
फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी है कि कहानी बहुत ही साधारण है। फिल्म बहुत जगह पर प्रेडेक्टिबल लगती है। आसानी से ये अनुमान लगाया जा सकता है कि आगे क्या होने वाला है। फिल्म की एंडिंग भी काफी हद तक पहले से ही पता चल जाती है। इसके अलावा फिल्म का कोई ऐसा गाना भी नहीं है जो एकदम जुबान पर चढ़ जाए।
अगर आप अपने पार्टनर के साथ जाकर इस फिल्म को देखेंगे तो आपको जाहिर सी बात है काफी अच्छा लगेगा। फिल्म में लवस्टोरी को खूबसूरती से दिखाया गया है। इसके अलावा फिल्म आपको कितना बांधकर रख पाएगी इसकी गारंटी नहीं ली जा सकती। अगर आप मार-धाड़ और एक्शन-ड्रामा वाली फिल्में पसंद करते हैं तो ये फिल्म आपको निराश ही करेगी।