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गीतकार पुनीत शर्मा की भारत में ब्लॉक की गई कविता? सेक्शन 69A के तहत लिया फैसला, जानें पूरा मामला

Lyricist Puneet Sharma: गीतकार पुनीत शर्मा की वायरल कविता 'सड़कें सब याद नहीं रखतीं, हमें रखना होता है' को इंस्टाग्राम ने भारत में ब्लॉक कर दिया है। यह कार्रवाई आईटी एक्ट के सेक्शम 69A के तहत कानून रिक्वेस्ट मिलने के बाद की गई है।
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Oct 13, 2026
Lyricist Puneet Sharma Allegation said his poem remove from instagram amid cec protest
पुनीत शर्मा की कवित हुई इंस्टाग्राम से रिमूव (Photo Source- Instagram/puneetvuneet)

Lyricist Puneet Sharma alleges his poem remove: देश भर में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को रद्द करने की मांग को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच अभिव्यक्ति की आज़ादी का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। पिछले हफ्ते स्क्रीनराइटर और गीतकार पुनीत शर्मा की एक कविता इंस्टाग्राम पर जमकर वायरल हुई थी, जिसका शीर्षक 'सड़कें सब याद नहीं रखतीं, हमें रखना होता है' था, लेकिन गीतकार को उस वक्त बड़ा झटका लगा जब उन्हें पता चला कि उनकी यह कविता सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटा दी गई है।

गीतकार पुनीत शर्मा ने किया पोस्ट

भारत में हटाई गई पुनीत शर्मा की कविता

मिड-डे के साथ शेयर किए गए स्क्रीनशॉट के अनुसार, पुनीत शर्मा ने जब इस पूरे मामले की जांच की, तो उन्हें पता चला कि इंस्टाग्राम ने "कंटेंट पर रोक लगाने के लिए कानूनी रिक्वेस्ट मिलने" के बाद इस पोस्ट को भारत में ब्लॉक कर दिया है। प्लेटफॉर्म ने उन्हें सूचित किया कि यह कानूनी अनुरोध भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (Indian Information Technology Act) के सेक्शन 69A के तहत किया गया है।

इस कानून के तहत केंद्र सरकार को यह अधिकार है कि वह डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को ऑनलाइन उपलब्ध किसी भी जानकारी तक सार्वजनिक पहुंच को बैन करने का आदेश दे सकती है।

गीतकार पुनीत शर्मा ने नागरिकों की आजादी पर उठाए सवाल

इस पूरी घटना से बेहद आहत और परेशान गीतकार पुनीत शर्मा ने नागरिकों के बुनियादी अधिकारों और स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कड़े शब्दों में सवाल करते हुए कहा कि यदि सरकार सिर्फ एक कविता तक जनता की पहुंच को भी रोक सकती है, तो देश में आखिर कौन सी आजादी सुरक्षित बची है?

उन्होंने आगे जोर देते हुए कहा, "यह कविता शांतिपूर्ण विरोध, हमारे पूर्वजों की विरासत और हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान के बारे में बताती है। अगर कोई कलाकार इस बारे में एक कविता भी पोस्ट नहीं कर सकता कि ऐसे विरोधों ने इस देश को क्या दिया है, तो हमारे पास इस्तेमाल करने की कौन सी आज़ादी बची है?"

सोशल मीडिया पर इस तरह से कविताओं और रचनात्मक विचारों को रोके जाने के बाद से लेखकों, कलाकारों और आम नागरिकों के बीच बहस छिड़ गई है कि क्या डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सेंसरशिप का दायरा अब कला और साहित्य तक पहुंच गया है।

Updated on:
13 Oct 2026 09:29 am
Published on:
13 Oct 2026 08:57 am
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