
Imtiaz Ali Exclusive Interview: सरहदें बंट गईं… किस्से आज भी जिंदा हैं। कुछ कहानियां पर्दे पर सिर्फ दिखाई नहीं जातीं, बल्कि ऑडियंस के भीतर उतर जाती हैं। फिल्म निर्देशक इम्तियाज अली की निर्देशित फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ भी ऐसी ही कहानी है, जो विभाजन की त्रासदी, बिछड़ते रिश्तों और इंसानी जज्बातों को संवेदनशीलता के साथ सामने लाती है। शनिवार को इम्तियाज अली झालाना स्थित राजस्थान पत्रिका ऑफिस पहुंचे और पत्रिका, एफएम तडक़ा और पत्रिका टीवी डिजिटल से विशेष बातचीत की।
फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ को लेकर पत्रिका ऑफिस पहुंचे इम्तियाज अली से विशेष बातचीत
उन्होंने कहा कि किसी भी फिल्म की स्क्रिप्ट लिखते वक्त पहले दिमाग नहीं, दिल बोलता है। फिल्म हिट होने से ज्यादा महत्वपूर्ण है कि वह लोगों को पसंद आनी चाहिए। उन्होंने सिनेमा का फ्यूचर थिएटर को बताया।
फिल्म 12 जून को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। फिल्म देखने वाली ऑडियंस को धन्यवाद देने और फिल्म का फीडबैक लेने के लिए वे राजधानी के कई सिनेमाघरों में पहुंचे, जहां उन्होंने ऑडियंस के साथ बातचीत की। पत्रिका से बातचीत के अंश…
बचपन से विभाजन की कई कहानियां सुनी और पढ़ी हैं। सोच लिया था कि विभाजन को लेकर फिल्म बनानी है। पंजाब में शूटिंग के दौरान भी लोग खुद को लाहौर या विभाजन से पहले के अपने शहरों से जोडकऱ किस्से सुनाते थे। ‘मैं वापस आऊंगा’ सिर्फ एक कहानी है, जबकि विभाजन पर अभी अनगिनत कहानियां कही जा सकती हैं।
थिएटर में लोगों को भावुक होते देख मैं भी भावुक हो जाता हूं। मैंने सिर्फ फिल्म बनाई है, लेकिन जब दर्शक उसे अपनी जिंदगी से जोड़ लेते हैं, तब लगता है कि मेहनत सफल हुई है। पूणे में एक थिएटर में एक व्यक्ति ने मुझे उसकी प्रेमिका के बारे में बताया, जो गुजर चुकी है, उसे वह हर पल याद करता रहता है।
फिल्म मेकिंग अकेले का काम नहीं होता। यह पूरी टीम की मेहनत और विश्वास का परिणाम है। हर डिपार्टमेंट मिलकर कहानी को जीवंत बनाता है। युवाओं को फिल्म मेकिंग के लिए सलाह देना चाहूंगा कि अगर फिल्म बनानी है तो सबसे ज्यादा ध्यान कहानी पर दें। अच्छी कहानी ही दर्शकों को थिएटर तक खींचकर लाती है।
फिल्म की शूटिंग के दौरान जिन-जिन जगहों पर गया, वहां के लोगों से अपनापन मिला। इसलिए मैंने उनसे कहा कि मैं वापस आऊंगा। करीब 25 ऐसी जगहें हैं, जहां मैं दोबारा जाना चाहता हूं।
आज के समय में लोग बहुत व्यस्त हो गए हैं। मेरी लोगों से अपील है कि अपने परिवार के साथ समय निकालें। बड़े बुजुर्गों की बातों को ध्यान से सुनें। उनके अनुभव जिंदगी में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।
इम्तियाज अली ने कहा कि अगर लाइफ में वापस जाने का मौका मिले, तो मैं वह बास्केटबॉल मैच वापस खेलना चाहूंगा, जिनको मैं और बेहतर तरीके से खेल सकता हूं। उन्होंने कहा कि इस फिल्म को लेकर एक मीम चल रहा है कि इस फिल्म का नाम ‘मैं वापस आऊंगा’ की जगह ‘अभी न जाओ छोडकऱ’ होना चाहिए। उन्होंने ‘मैं वापस आऊंगा’ लाइन को पूरा करते हुए कहा कि ‘फिक्चर अभी बाकी है’।