वैसे तो शर्मिला टैगोर के चाहने वालों की लिस्ट काफी लंबी थी, लेकिन सबसे ऊपर नाम रहा है पटौदी का। शर्मिला टैगोर को पाने के लिए मंसूर अली खान पटौदी ने लगभग हर जतन कर डाले थे और इसका उन्हें फायदा भी मिला। अंत में शर्मिला ने उन्ही का हाथ थामा।
शर्मिला टैगोर जितनी अपनी रील लाइफ के लिए चर्चित रहीं उतनी ही रियल लाइफ के लिए भी उन्होंने सुर्खियां बटोरीं। शर्मिला टैगोर भी अपनी लव लाइफ के लिए काफी लंबे वक्त तक लाइम लाइट में रहीं थी और उनके चर्चे किसी और के साथ नहीं बल्कि भारतीय क्रिकेट टीम के भूतपूर्व कप्तान मंसूर अली खान पटौदी के साथ थे।
दरअसल शर्मिला टैगोर ने फिल्मी जगत में काफी अच्छी खासी पहचान बना ली थी। उन्होंने एक से बढ़कर एक हिट फिल्में दी हैं। हर कोई उनकी अदाकारी का दीवाना था। वहीं दूसरी तरफ खेल जगत में नवाब पटौदी का सिक्का भी चल रहा था। उन्होंने कई मौकों पर भारतीय टीम को जीत दिलाई थी। दोनों में वो पटौदी साहब ही थे जो शर्मिला टैगोर को इंप्रेस करने में लगे रहते थे। वहीं दूसरी ओर शर्मिला टैगोर उन्हें जरा भी भाव नहीं देती थी। उस जमाने में जब लोग बेशकीमती समान देखने के लिए तरसते थे, पटौदी शर्मिला टैगोर को वो सारें समान तोहफों के रूप में दिया करते थे।
एक बार की बात है कि पटौदी ने शर्मिला को इम्प्रेस करने के लिए उनके घर पर 7-7 रेफ्रिजरेटर तक भेज दिए थे। बताया जाता है कि जब कभी शर्मिला क्रिकेट के मैदान में खेल का लुत्फ उठाने के लिए स्टेडियम जाती थीं, तो पटौदी साहब सिक्सर मारकर मारकर उन्हें इंप्रेस करने की कोशिश किया करते थे।
कुछ ऐसा ही हुआ शर्मिला टैगोर के साथ भी। आखिरकार, काफी कश्मकश के बाद एक वक्त ऐसा भी आया, जब शर्मिला टैगोर भी उनके प्यार में आ गईं औऱ लाख मशक्कत और तकलीफों के बाद दोनों ने एक दूसरे से शादी करने का फैसला कर लिया।
शर्मिला ने भारतीय सिनेमा जगत में एक नया पैमाना स्थापित किया था। चूंकि, शर्मिला से पहले उस वक्त फिल्मी दुनिया में किसी भी अभिनेत्री ने बिकिनी पहनकर फोटो शूट नहीं कराया था। इसके बाद से यह कहा जाने लगा था कि अब भला पटौदी साहब का खानदान किसी ऐसी लड़की को अपनी घर की बहू बनाने के लिए कैसे राजी होगा, जो इस तरह खुलेआम अपने जिस्म की नुमाइश करती हो।
उस वक्त लोगों का मुंह हमेशा के लिए बंद हो गया, जब शर्मिला टैगोर और पटौदी 27 दिसंबर 1969 को हमेशा के लिए एक-दूजे के हो गए।