Mardaani 3 Movie Review: रानी मुखर्जी की फिल्म मर्दानी 3 थिएटर्स में रिलीज हो गई है। कैसा है रानी का बॉलीवुड में कमबैक, चलिए आपको बताते हैं।
Mardaani 3 Movie Review: कहानी के विलेन से खूब लड़ी मर्दानी वो तो बॉलीवुड की 'रानी' थी...ये लाइन अभिनेत्री रानी मुखर्जी के ऊपर बिल्कुल फिट बैठती है। शिवानी शिवाजी रॉय के किरदार में रानी की क्या धमाकेदार तरीके से वापसी हुई है। 'मर्दानी 3' आज सिनेमाघरों में रिलीज हुई है। पहली दो फिल्मों की ही तरह एक बहुत बड़े गोरखधंधे को एक्सपोज करने की चुनौती लेकर शिवानी पूरी फिल्म में चलती है। चलिए बताते हैं कैसी है फिल्म और इसे देखना चाहिए या फिर नहीं। शुरुआत करते हैं फिल्म की कहानी से।
शुरुआत में ये कहानी दो बच्चियों की किडनैपिंग से शुरु होती है। यूपी के बुलंदशहर में हुई वारदात को कुछ गुंडे अंजाम देते हैं। देखने से लगता है कि कोई आम अपहरण का मामला है। फिर पता चलता है कि किडनैप हुई दो बच्चियों में से एक बच्ची तुर्की के इंडियन एंबेसडर की बेटी है, जिसके बाद मामला हाई-प्रोफाइल हो जाता है। अब सारा दारोमदार सोंपा जाता है एसएसपी शिवानी शिवाजी रॉय को, जो पहले ही मानव तस्करी के एक गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दिखाई जाती हैं। किडनैपर्स को जैसे ही पता चलता है कि रुहानी नाम की ये बच्ची एंबेसडर की बेटी है उनके हाथ पैर फूल जाते हैं। फिर कहानी में एंट्री होती है अम्मा की। अम्मा पूरे देश में अपना नेटवर्क चला रही है। अब शिवानी कैसे अम्मा तक पहुंचेगी और कैसे उसके गिरोह का पर्दाफाश करेगी इसे जानने के लिए आपको फिल्म को देखना होगा।
दमदार एक्शन करते हुए जब पर्दे पर रानी मुखर्जी पुलिस की वर्दी में दस्तक देती हैं तो अपने-आप सीटियां और तालियां बजाने के लिए मजबूर कर देती हैं। रानी की एक्टिंग इस फिल्म की जान है। कहीं पर भी वो अपने किरदार से बाहर नहीं आतीं। उनसे ज्यादा अभिनय उनकी आंखें करते हुए नजर आती हैं। इसमें कोई दो-राय नहीं है कि फिल्म की जान है शिवानी लेकिन यहां पर दूसरे कलाकारों ने भी रानी को खूब टक्कर दी है। अम्मा के किरदार में मल्लिका प्रसाद खुद से नफरत कराने में एकदम कामयाब रहती हैं। उनकी एक्टिंग भी जानदार है। फिल्म में किसी भी कलाकार ने अपने अभिनय को छोड़ा नहीं है और यही खासियत दर्शकों को फिल्म से बांधे रखती है। इसके अलावा 'वश 2' फेम एक्ट्रेस जानकी बोदीवाला ने भी अपनी ओर से भरपूर प्रयास किया है।
निर्देशन में मैं कहूंंगा कि फिल्म ने थोड़ा बहुत निराश कर दिया है। अभिराज मीनावाला ने फिल्म को डायरेक्ट किया है। स्टोरी लाइन को हालांकि अभिराज ने अच्छे से हैंडल किया है लेकिन फिल्म कुछ जगह पर थोड़ी प्रिडेक्टेबल लगती है। कई जगह पर एहसास पहले से ही हो जाता है कि अब क्या होने वाला है। वहां पर थोड़ी सी चूक रह हई। इसके अलावा कहानी बहुत तेजी से आगे बढ़ती रहती है। वहां भी कहीं ना कहीं उसे स्लो डाउन करने की जरूरत थी। एक के बाद एक होने वाले खुलासे दिलचस्प तो होते हैं लेकिन कनेक्ट कहीं खो सा जाता है। फिर भी एक शानदार कहानी को गढ़ा गया है। किरदारों ने पूरी जान झोंकी है। डायरेक्टर ने भी अपनी तरफ से भरपूर कोशिश की है।
फिल्म में कोई गाना नहीं है लेकिन किरदार को दिखाने के लिए देवी मां की स्तुति 'आई गिरी नंदिनी विश्व विनोदिनी' का इस्तेमाल जरूर किया गया है। गानों की कमी कहीं महसूस भी नहीं होती और ना तो कहानी में कही पर भी गाने फिट बैठते हैं। हालांकि अगर एक-दो गाने फिल्म के रनटाइम को बढ़ाने के लिए ऐड किए जाते हैं तो शायद थोड़ी कहानी स्लो डाउन हो जाती।
अगर आप सस्पेंस और थ्रिल से भरी फिल्मों को देखना पसंद करते हैं तो ये फिल्म आप ही के लिए ही बनी है। इसमें भरपूर मोड़ नजर आते हैं जो चौंका देते हैं। हैरानी में डाल देते हैं। पूरा दिमाग और लॉजिक भी लगाने की कोशिश की गई है। इसलिए अगर आप दिमाग को दौड़ाने वाली कोई फिल्म मजे से एन्जॉय करना चाहते हैं तो आपको ये फिल्म जरूर देखनी चाहिए।
पत्रिका की तरफ से रानी की मर्दानी 3 को मिलते हैं 3 स्टार्स