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महिलाओं की आवाज बनीं करीना कपूर, बोलीं- पीरियड्स कोई समस्या नहीं, जागरूकता की कमी है…

Menstrual Hygiene Day 2025: करीना कपूर ने पीरियड्स को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने इंस्टाग्राम पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा…
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Updated: 28 May 2025, 7:35 PM IST
Kareena Kapoor
Kareena Kapoor

Kareena Kapoor: बॉलीवुड अभिनेत्री करीना कपूर खान ने एक बार फिर अपनी बेबाकी से समाज के एक जरूरी मुद्दे पर ध्यान खींचा है। इस बार उन्होंने बात की है महिलाओं के मासिक धर्म यानी पीरियड्स को लेकर। 'मेंस्ट्रुअल हाइजीन डे' पर करीना ने पीरियड्स से जुड़ी भ्रांतियों और समाज में फैली मानसिकता पर उन्होंने खुलकर बात किया है।

पीरियड्स पर बोलीं एक्ट्रेस

इंस्टाग्राम पर तस्वीरें साझा करते हुए अभिनेत्री करीना कपूर खान ने गुजरात के स्कूलों में मासिक धर्म जागरूकता को लेकर किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने लिखा,“गुजरात के स्कूलों में अब 'मासिक धर्म कॉर्नर' बनाए गए हैं, जो एक सुरक्षित और स्वागत योग्य पहल है। यहां छात्र कार्ड गेम, रोल-प्ले एप्रन, इंटरैक्टिव मॉडल और किताबों के जरिए पीरियड्स के बारे में सीखते हैं और समझते हैं।”

करीना ने बताया कि यह पहल यूनिसेफ इंडिया और सरकार के संयुक्त प्रयास से शुरू की गई है, जो स्कूलों में मासिक धर्म को लेकर बातचीत को सामान्य बना रही है और वर्षों से चली आ रही चुप्पी और भ्रांतियों को तोड़ रही है।

उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम के जरिए 1,03,000 से ज्यादा लड़कियों और 88,000 से अधिक लड़कों तक पहुंच बनाई जा चुकी है, जो न सिर्फ जागरूकता बढ़ा रहा है, बल्कि आत्मविश्वास और सम्मान भी पैदा कर रहा है। साथ ही यह लड़कियों को स्कूल में बने रहने और अपने सपनों की ओर बढ़ने में मदद कर रहा है।

अंत में करीना ने अपने संदेश में लिखा,“चलो एक पीरियड-फ्रेंडली वर्ल्ड बनाएं। हर छात्र के लिए खुली बातचीत और एक सुरक्षित माहौल को बढ़ावा देना जरूरी है। मासिक धर्म मायने रखता है।”

करीना ही नहीं पहले भी कई एक्ट्रेस ने खुलकर की है बात

करीना कपूर से पहले अभिनेत्री संदीपा धर ने भी मासिक धर्म पर खुलकर बात करने की जरूरत पर जोर दिया था। उन्होंने कहा था कि हर छोटा कदम महत्वपूर्ण होता है, और पीरियड्स जैसे जरूरी विषय पर खुली बातचीत होना बेहद जरूरी है।

वहीं, इससे पहले अभिनेत्री निमरत कौर ने भी पीरियड्स हाइजीन को लेकर अपना नजरिया साझा किया था। उन्होंने कहा था, "मासिक धर्म किसी भी महिला के स्वास्थ्य का एक स्वाभाविक, जरूरी और अहम हिस्सा है, लेकिन इसके बावजूद यह अब भी चुप्पी और झिझक में लिपटा हुआ विषय बना हुआ है। खासकर ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में लड़कियां इसे लेकर संकोच महसूस करती हैं और लोग खुलकर बात नहीं करते।"