
Nana Patekar Death: बॉलीवुड में कई कलाकार अपने किरदार को पर्दे पर निभाते हैं। लेकिन कुछ कलाकार किरदार में उतरने के लिए खुद को पूरी तरह बदल देते हैं। नाना पाटेकर भी ऐसे ही कलाकार थे। आज 75 साल की उम्र में कार्डियक अरेस्ट के कारण उनका निधन हो गया। उन्हें बचाने के लिए करीब 45 मिनट सीपीआर दिया गया। इसके बाद डॉक्टर्स ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
आज भले ही बॉलीवुड के वर्सेटाइल एक्टर नाना हमारे बीच नहीं रहे। लेकिन उनके किरदार हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेगा। ऐसा ही एक किरदार फिल्म ‘प्रहार: द फाइनल अटैक’ में देखने को मिला। फिल्म ‘प्रहार: द फाइनल अटैक’ के लिए उन्होंने सिर्फ एक्टिंग पर भरोसा नहीं किया। उन्होंने सेना के जवानों के बीच रहकर उनके जीवन को समझने की कोशिश की। कमांडो ट्रेनिंग ली। आर्मी कैंप में समय बिताया। यही वजह है कि फिल्म में उनका सैन्य किरदार बेहद वास्तविक (रियल) नजर आया।
बता दें ‘प्रहार: द फाइनल अटैक’ साल 1991 में रिलीज हुई थी। यह नाना पाटेकर के निर्देशन में बनी पहली फिल्म थी। फिल्म में उन्होंने मेजर चौहान का किरदार निभाया था। यह किरदार एक सख्त और अनुशासित सैन्य अधिकारी का था। किरदार को असली बनाने के लिए नाना ने सेना के माहौल को करीब से समझा। कई रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने कर्नाटक के बेलगाम में मराठा लाइट इन्फैंट्री के जवानों के साथ ट्रेनिंग ली थी।
उन्होंने जवानों की दिनचर्या देखी। उनके अनुशासन को समझा। कमांडो ट्रेनिंग के तौर-तरीकों को करीब से जाना। बताया जाता है कि उन्होंने आर्मी कैंप में कई रातें भी बिताईं। इस अनुभव का असर फिल्म में साफ नजर आया। ट्रेनिंग से जुड़े दृश्य बनावटी नहीं लगे। नाना के हावभाव और बोलने का अंदाज भी सैन्य अधिकारी जैसा दिखाई दिया।
बता दें फिल्म की कहानी मेजर चौहान के आसपास घूमती है। वह युवाओं को कमांडो बनने की ट्रेनिंग देता है। ट्रेनिंग के दौरान अनुशासन सबसे अहम होता है। लेकिन फिल्म सिर्फ सेना की ट्रेनिंग तक सीमित नहीं रहती। इसमें देशभक्ति के साथ व्यवस्था की कमियों को भी दिखाया गया है। कहानी में भावनाएं हैं। संघर्ष है। और जिम्मेदारी का एहसास भी है।
फिल्म में माधुरी दीक्षित ने सिस्टर शर्ली का किरदार निभाया था। रिलीज के समय फिल्म को बहुत बड़ी व्यावसायिक सफलता नहीं मिली। हालांकि, धीरे-धीरे इसकी लोकप्रियता बढ़ती गई। आज ‘प्रहार’ को नाना पाटेकर की यादगार फिल्मों में गिना जाता है। फिल्म को समय के साथ एक कल्ट क्लासिक जैसी पहचान मिली।
‘प्रहार’ के बाद भी नाना पाटेकर का सेना से जुड़ाव चर्चा में रहा। उनके सैन्य प्रेम और जवानों के प्रति सम्मान की अक्सर बात होती रही। रिपोर्ट के मुताबिक, वह कारगिल युद्ध में शामिल हुए थे। लड़ाई लड़ी थी। यही कारण है कि साल 2013 में उन्हें टेरिटोरियल आर्मी में मानद कैप्टन का दर्जा दिया गया। यह सम्मान उनके सेना के प्रति लगाव को एक अलग पहचान देता है।
नाना के लिए ‘प्रहार’ सिर्फ एक फिल्म नहीं थी। यह एक ऐसा अनुभव था, जिसमें उन्होंने सैनिकों की जिंदगी को करीब से समझा। शायद यही वजह है कि फिल्म में उनका मेजर चौहान आज भी दर्शकों को वास्तविक और प्रभावशाली लगता है।