
नाना पाटेकर का हुआ निधन (Photo Source- Instgaram/ANI)
Nana Patekar Death in Goa: बॉलीवुड में उस समय हंगामा मच गया जब खबर आई कि अभिनेता नाना पाटेकर (Nana Patekar) का निधन हो गया है। गुरुवार सुबह गोवा स्थित अपने घर पर उन्हें गंभीर दिल का दौरा (Heart Attack) पड़ा था। डॉक्टर शेखर सालकर के अनुसार, अस्पताल में 45 मिनट तक लगातार सीपीआर (CPR) देने के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका और सुबह 5:20 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। अस्पताल प्रशासन ने नियम के मुताबिक मेडिको-लीगल केस (MLC) दर्ज कर लिया है और कानूनी प्रक्रिया के तहत पोस्टमॉर्टम कराया जाएगा। आइये जानते हैं पूरा मामला...
चिकित्सा और कानूनी जगत में 'मेडिको-लीगल केस' उस स्थिति को कहा जाता है, जहां किसी मरीज के इलाज या मृत्यु के मामले में चिकित्सा (Medical) के साथ-साथ कानूनी (Legal) जांच की आवश्यकता होती है। जब भी किसी व्यक्ति को अस्पताल लाया जाता है और डॉक्टर को यह अंदेशा होता है कि मौत का कारण संदेहास्पद हो सकता है, अचानक हुआ हो, या फिर व्यक्ति को 'ब्रॉट डेड' (अस्पताल लाने से पहले ही मृत) स्थिति में लाया गया हो, तो कानूनन डॉक्टर के लिए पुलिस को सूचित करना बेहद जरूरी होता है।
नाना पाटेकर के मामले में भी उन्हें घर पर अचानक दिल का दौरा पड़ा और अस्पताल पहुंचने पर वह अपने होश में नहीं थे। ऐसे में किसी भी कानूनी अड़चन या भविष्य की आशंकाओं को खारिज करने के लिए अस्पताल ने मानक प्रोटोकॉल के तहत MLC दर्ज किया है।
ANI के अनुसार, एमएलसी दर्ज होने के बाद पुलिस शव को अपने कब्जे में लेकर पंचनामा करेगी है और इसके बाद शव को पोस्टमॉर्टम (ऑटोप्सी) के लिए भेजा जाएगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि नाना पाटेकर के मामले में प्राथमिक जांच कार्डियक अरेस्ट की ओर इशारा करती है, लेकिन फॉरेंसिक रिपोर्ट के जरिए मौत के सटीक समय और शरीर की अंदरूनी स्थिति की आधिकारिक पुष्टि होगी। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही शव को परिजनों को सौंपा जाएगा, ताकि वे उनका अंतिम संस्कार कर सकें।
Updated on:
08 Oct 2026 08:55 am
Published on:
08 Oct 2026 08:31 am
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