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नाना पाटेकर के निधन पर हुआ मेडिको-लीगल केस दर्ज, कराया जाएगा पोस्टमॉर्टम, जानें क्यों?

Nana Patekar Passed Away: दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन से बॉलीवुड में शोक की लहर दौड़ गई है। गोवा अस्पताल में डॉक्टरों द्वारा 45 मिनट सीपीआर देने के बाद भी उन्हें नहीं बचाया जा सका, जिसके बाद MLC दर्ज कर पोस्टमॉर्टम होगा।
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Nana Patekar Death at 75 medico legal case has been registered then post-mortem

नाना पाटेकर का हुआ निधन (Photo Source- Instgaram/ANI)

Nana Patekar Death in Goa: बॉलीवुड में उस समय हंगामा मच गया जब खबर आई कि अभिनेता नाना पाटेकर (Nana Patekar) का निधन हो गया है। गुरुवार सुबह गोवा स्थित अपने घर पर उन्हें गंभीर दिल का दौरा (Heart Attack) पड़ा था। डॉक्टर शेखर सालकर के अनुसार, अस्पताल में 45 मिनट तक लगातार सीपीआर (CPR) देने के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका और सुबह 5:20 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। अस्पताल प्रशासन ने नियम के मुताबिक मेडिको-लीगल केस (MLC) दर्ज कर लिया है और कानूनी प्रक्रिया के तहत पोस्टमॉर्टम कराया जाएगा। आइये जानते हैं पूरा मामला...

क्या होता है मेडिको-लीगल केस (MLC)?

चिकित्सा और कानूनी जगत में 'मेडिको-लीगल केस' उस स्थिति को कहा जाता है, जहां किसी मरीज के इलाज या मृत्यु के मामले में चिकित्सा (Medical) के साथ-साथ कानूनी (Legal) जांच की आवश्यकता होती है। जब भी किसी व्यक्ति को अस्पताल लाया जाता है और डॉक्टर को यह अंदेशा होता है कि मौत का कारण संदेहास्पद हो सकता है, अचानक हुआ हो, या फिर व्यक्ति को 'ब्रॉट डेड' (अस्पताल लाने से पहले ही मृत) स्थिति में लाया गया हो, तो कानूनन डॉक्टर के लिए पुलिस को सूचित करना बेहद जरूरी होता है।

नाना पाटेकर के मामले में भी उन्हें घर पर अचानक दिल का दौरा पड़ा और अस्पताल पहुंचने पर वह अपने होश में नहीं थे। ऐसे में किसी भी कानूनी अड़चन या भविष्य की आशंकाओं को खारिज करने के लिए अस्पताल ने मानक प्रोटोकॉल के तहत MLC दर्ज किया है।

पोस्टमॉर्टम की क्यों पड़ती है जरूरत?

ANI के अनुसार, एमएलसी दर्ज होने के बाद पुलिस शव को अपने कब्जे में लेकर पंचनामा करेगी है और इसके बाद शव को पोस्टमॉर्टम (ऑटोप्सी) के लिए भेजा जाएगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि नाना पाटेकर के मामले में प्राथमिक जांच कार्डियक अरेस्ट की ओर इशारा करती है, लेकिन फॉरेंसिक रिपोर्ट के जरिए मौत के सटीक समय और शरीर की अंदरूनी स्थिति की आधिकारिक पुष्टि होगी। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही शव को परिजनों को सौंपा जाएगा, ताकि वे उनका अंतिम संस्कार कर सकें।