Panchayat Actor Vinod Suryavanshi On Casteism: पंचायत फेम एक्टर ने हाल ही में जातिवाद के मुद्दे पर अपने संघर्षों को बयां किया है। क्या कुछ कहा है विनोद सूर्यवंशी ने, चलिए जानते हैं।
Panchayat Actor Vinod Suryavanshi On Casteism: लोकप्रिय वेब सीरीज 'पंचायत' से पहचान बनाने वाले अभिनेता विनोद सूर्यवंशी ने हाल ही में अपने बचपन के संघर्ष और जातिगत भेदभाव से जुड़े अनुभव शेयर कर सभी को इमोशनल कर दिया। हाल ही में एक्टर ने खुलासा किया है कि कैसे उन्हें जातिवाद का अक्सर सामना करना पड़ा है। एक बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि सफलता तक पहुंचने का उनका सफर बेहद कठिन रहा और इसमें गरीबी के साथ-साथ सामाजिक भेदभाव की कड़वी सच्चाइयों का भी सामना करना पड़ा।
विनोद सूर्यवंशी ने 'सिद्धार्थ कनन' के साथ इंटरव्यू में बताया कि उनका पैतृक गांव कर्नाटक में है, जहां आज भी जाति के आधार पर लोगों के रहने के इलाके अलग-अलग हैं। उन्होंने कहा कि बचपन में ही उन्हें इस विभाजन का एहसास हो गया था। एक घटना को याद करते हुए उन्होंने बताया कि जब वो लगभग 12 साल के थे और अपने पिता के साथ गांव गए थे, तब एक होटल में खाना खाने के बाद उन्हें खुद अपने बर्तन धोने पड़े थे। इतना ही नहीं, इसके बावजूद उनसे पैसे भी लिए गए थे।
उन्होंने यह भी बताया कि उनके गांव में एक ऐसा मंदिर आज भी मौजूद है, जहां उनके समुदाय के लोगों को प्रवेश की अनुमति नहीं है। इस तरह की घटनाओं ने बचपन में ही उन्हें समाज की असमानता का एहसास करा दिया था।
जहां ज्यादातर लोगों के लिए त्योहार खुशियों का मैसेज लेकर आते हैं, वहीं विनोद के परिवार के लिए ये दिन कई बार दुख का कारण बन जाते थे। उन्होंने बताया कि आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि त्योहार मनाने के लिए भी संसाधन नहीं होते थे। कई बार उनके माता-पिता की आंखों में आंसू आ जाते थे क्योंकि वे अपने बच्चों को बाकी लोगों की तरह खुशियां नहीं दे पाते थे।
उन्होंने कहा कि अगर किसी रिश्तेदार या परिचित की तरफ से कुछ मदद मिल जाती थी, तभी घर में त्योहार जैसा माहौल बन पाता था। यही वजह थी कि बचपन में त्योहारों के आने पर भी उनके मन में उत्साह की जगह चिंता और उदासी रहती थी।
अभिनेता बनने का सपना पूरा करना उनके लिए आसान नहीं था। मुंबई में अपने शुरुआती संघर्ष के दिनों में उन्होंने कई छोटे-मोटे काम किए। इनमें चौकीदारी का काम भी शामिल था। उन्होंने बताया कि लंबे समय तक खड़े रहने की वजह से उनके पैरों में छाले पड़ जाते थे, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
विनोद का कहना है कि समाज में अक्सर इंसान को उसके काम के आधार पर सम्मान मिलता है। उनका मानना है कि जैसे-जैसे व्यक्ति का काम बड़ा होता जाता है, वैसे-वैसे समाज में उसकी पहचान और सम्मान भी बढ़ता जाता है।
विनोद सूर्यवंशी ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत छोटे किरदारों से की थी। धीरे-धीरे उन्होंने फिल्मों और वेब सीरीज़ में काम करना शुरू किया। साल 2024 में 'पंचायत' के नए सचिव के किरदार ने उन्हें दर्शकों के बीच अलग पहचान दिलाई। इसके बाद उन्होंने 'ये काली काली आंखे' में पुलिस अधिकारी की भूमिका निभाई और फिर 'जॉली एलएलबी 3' और फिल्म 'थामा' जैसे प्रोजेक्ट्स में नजर आए।