
Pooja Meri Jaan Movie: मृणाल ठाकुर स्टारर फिल्म 'पूजा मेरी जान' रिलीज के बाद अपनी कहानी और संवेदनशील विषय को लेकर चर्चा में है। फिल्म का निर्देशन नवजोत गुलाटी ने किया है। कहानी एक अभिनेत्री पूजा के इर्द-गिर्द घूमती है, जिस पर उसके एक सहकर्मी की आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगता है। फिल्म में विक्रम सिंह चौहान और हुमा कुरैशी भी अहम भूमिकाओं में हैं।
फिल्म के विषय की तुलना 2020 में अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद रिया चक्रवर्ती के खिलाफ चले मीडिया ट्रायल से भी की जा रही है। नवजोत गुलाटी ने एक इंटरव्यू में माना कि वास्तविक घटना ने उनकी फिल्म को प्रभावित किया था। उन्होंने कहा कि जब कोई ऐसी घटना सामने हो रही हो जिसे वह लाइव टेलीविजन पर देख रहे हों, तो उससे प्रभावित होना स्वाभाविक है।
नवजोत ने कहा कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद रिया चक्रवर्ती के साथ जो कुछ हुआ, वह बेहद दुखद था। उन्होंने उम्मीद जताई कि रिया अगर ‘पूजा मेरी जान’ देखें तो उन्हें महसूस हो कि किसी ने उनकी स्थिति को समझने और उनका पक्ष रखने की कोशिश की है।
हालांकि, निर्देशक ने यह भी बताया कि उन्होंने फिल्म लिखते समय रिया से संपर्क नहीं किया। उनके मुताबिक, रिया जिस दौर से गुजर चुकी थीं, उसके बारे में दोबारा सवाल करके उन्हें असहज करने का कोई कारण नहीं था।
नवजोत गुलाटी ने बताया कि फिल्म की कहानी जानबूझकर इस तरह लिखी गई है कि शुरुआत में दर्शकों को लगे कि पूजा की भी आत्महत्या के मामले में भूमिका हो सकती है। इसके बाद कहानी दूसरे पक्ष को सामने लाती है।
उनके मुताबिक, कहानी में सभी नजरियों को जगह देना जरूरी था। फिल्म में हुमा कुरैशी ने पूजा की वकील सना का किरदार निभाया है। सना शुरुआत में पूजा पर पूरी तरह भरोसा नहीं करती, लेकिन धीरे-धीरे उसका नजरिया बदलता है। निर्देशक के मुताबिक, सना का सफर दर्शकों के नजरिए को भी प्रतिबिंबित करता है।
नवजोत ने बताया कि उन्होंने मृणाल ठाकुर से ‘सीता रामम’ के बाद संपर्क किया था। हालांकि, उन्हें मृणाल की फिल्म ‘लव सोनिया’ देखने के बाद यकीन हुआ कि वह पूजा जैसे जटिल किरदार को निभा सकती हैं। निर्देशक का कहना है कि मृणाल इस किरदार की भावनाओं से आसानी से जुड़ पाईं और उन्होंने भूमिका को स्वाभाविक तरीके से निभाया।
निर्देशक ने खुलासा किया कि ‘पूजा मेरी जान’ उनके लिए भी निजी फिल्म है। उन्होंने इसे एक ऐसी महिला के लिए अपनी ‘माफी’ बताया, जिसके प्रति वह कभी बहुत ज्यादा जुनूनी थे। नवजोत ने कहा कि वह फिल्म के किरदार अनिकेत की भावनात्मक स्थिति से खुद को जोड़ पाते हैं।
फिल्म को आकार देने में सह-लेखक कनिष्का सिंह देव, सह-निर्देशक विपाशा अरविंद और एडिटर संयुक्ता काजा की भी अहम भूमिका रही। नवजोत ने कहा कि महिलाओं की कहानी को बेहतर तरीके से समझने के लिए उन्होंने कई महिलाओं की मदद ली।
नवजोत ने नाना पाटेकर और तनुश्री दत्ता से जुड़े पुराने विवाद पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि तनुश्री को नाराज होने का अधिकार है और दूसरी तरफ नाना पाटेकर के समर्थकों को भी अपना पक्ष रखने का अधिकार है। उन्होंने जोर दिया कि वास्तविक घटनाओं में किसी एक पक्ष को बिना पूरी जानकारी के सही मान लेना उचित नहीं है।
नवजोत के मुताबिक, ‘पूजा मेरी जान’ का उद्देश्य किसी एक जेंडर को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि पूरी स्थिति के अलग-अलग पहलुओं को दिखाना है। उनका मानना है कि समाज में बदलाव तुरंत नहीं आएगा, लेकिन लोगों को अपनी सीमाओं और आसपास के माहौल को समझना जरूरी है।
फिल्म के अंत को लेकर हुई आलोचना पर निर्देशक ने कहा कि मौजूदा दौर में समाज में निराशा बहुत है, इसलिए वह दर्शकों को पूरी तरह निराश करने के बजाय उम्मीद की एक किरण देना चाहते थे।