बॉलीवुड

फोटो संग सात फेरे… नाम का लगाती थी सिंदूर, फिल्म के लिए लाइन लगाकर खड़े रहते डायरेक्टर

Rajesh Khanna: डायरेक्टर-प्रोड्यूसर फिल्मों की स्क्रिप्ट सुनाने के लिए उनके घर के नीचे लाइन लगाकर खड़े रहते थे, दीवानगी ऐसी थी कि लड़कियां उनके नाम का सिंदूर लगाती थीं, तो कुछ उनकी फोटो के साथ सात फेरे ले लेती थीं।

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Dec 28, 2025
राजेश खन्ना बर्थडे स्पेशल स्टोरी (इमेज सोर्स: IMDb)

Rajesh Khanna Birth Anniversary: बॉलीवुड में एक ऐसा सितारा था जिसकी दीवानगी सिर्फ पर्दे तक सीमित नहीं थी, बल्कि लोगों के दिलों में राज करती थी। जिसके घर के बाहर डायरेक्टर और प्रोड्यूसर स्क्रिप्ट लेकर लाइन में खड़े रहते थे, सिर्फ एक ‘हां’ के इंतजार में कि कैसे भी करके एक्टर हामी भर दें। उस समय हालात ऐसे थे कि लड़कियों उनके नाम का सिंदूर लगाती थीं, तो कुछ उनकी तस्वीर के साथ सात फेरे तक ले लेती थीं। स्टारडम का ऐसा जुनून, ऐसी दीवानगी और ऐसा करिश्मा शायद ही हिंदी सिनेमा में दोबारा देखने को मिले।

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‘ऊपर आका, नीचे काका’

जी हां, हम बात कर रहे हैं- बॉलीवुड सुपरस्टार राजेश खन्ना (Rajesh Khanna) की। अभिनेता के नाम की कहावत भी मशहूर हुई कि ‘ऊपर आका, नीचे काका’। अमृतसर में जन्मे राजेश खन्ना का स्टारडम किसी से नहीं छिपा। उन्होंने सिर्फ तीन साल में 17 सुपरहिट फिल्में दे डालीं। लेकिन दिलचस्प बात ये है कि जहां आम एक्टर्स फ्लॉप फिल्मों से परेशान होते हैं, वहीं काका ऐसे एकमात्र स्टार थे जो अपनी बढ़ती पॉपुलैरिटी और फैंस की दीवानगी से थकने लगे थे। हालत ये हो गई थी कि एक समय पर वे खुद चाहते थे कि उनकी कुछ फिल्में फ्लॉप हो जाएं ताकि उनकी लाइफ और स्टारडम का दबाव थोड़ा कम हो सके।

डिप्रेशन के कारण शराब पीने लगे थे एक्टर; आत्महत्या की कोशिश

क्या आपको पता है? साल 1976–77 में एक्टर का करियर अंधेरे दौर में पहुंच गया था। लगातार फ्लॉप फिल्मों के दबाव, पॉपुलैरिटी के ढलते असर और नए सुपरस्टार्स के उभरने ने ‘काका’ को इतनी गहराई तक तोड़ दिया कि उनके मन में आत्महत्या तक के ख्याल आने लगे।

यासिर उस्मान की किताब ‘द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ इंडियाज फर्स्ट सुपरस्टार’ के मुताबिक काका देर रात अचानक चीख पड़ते थे और डिप्रेशन से जूझते हुए अपने दर्द को मिटाने के लिए शराब का सहारा लेने लगे थे। कहा जाता है कि वे समंदर में डूबकर अपनी जान देना चाहते थे।

1976 में हेमा मालिनी के साथ आई महबूबा सुपर फ्लॉप रही। उसी समय अमिताभ बच्चन का ‘एंग्री यंग मैन’ दौर जोर पकड़ चुका था, जिससे उनकी चमक और भी फीकी पड़ने लगी। 1971 की ‘आनंद’ में राजेश खन्ना के साथ मौजूद अमिताभ बच्चन ने दर्शकों की बड़ी हिस्से की तारीफ बटोर ली थी। इसके बाद 1976 और 1977 में आई उनकी फिल्में जैसे ‘बंडल बाज’, ‘अनुरोध’, ‘त्याग’, ‘कर्म’, ‘छैला बाबू’ और ‘चलता पुर्जा’ लगातार फ्लॉप होती गईं। बैक-टू-बैक पांच नाकाम फिल्मों ने उनकी स्टारडम को जोरदार झटका दिया, और फिल्ममेकर्स भी धीरे-धीरे उनसे दूर होने लगे। समय बदल रहा… जवानी की नई पसंद बन चुके अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र तेजी से आगे बढ़ रहे, जबकि कभी करोड़ों दिलों की धड़कन रहे ‘काका’ अपनी चमक खोते जा रहे थे।

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