गांधी जयंती के मौके पर सोनू निगम ने स्वच्छता को लेकर कहा कि जो करना चाहिए, लोग वो नहीं करते। फालतू चीजों को इशू बना देते हैं।
इस मंगलबार गांधी जयंती के मौके पर सोनू निगम ने लोगों को स्वच्छता का सही मतलब समझाया। उन्होंने स्वचछता अभियान पर कई अनोखे सवाल खड़े कर लोगों को सोचने के लिए मजबूर कर दिया। उन्होंने कहा कि स्वच्छता को लेकर जो करना चाहिए, लोग वो नहीं करते। फालतू चीजों को इशू बना देते हैं।
दरअसल, इंडिया टुडे के सफाईगीरी समिट के दौरान सोनू निगम ने स्वचछता पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने ने कहा, 'मैं एक बात कहना चाहता हूं। बहुत पहले मम्मी से मुझे दिक्कते होती थीं। मैं आज इस जगह पर साफ करना चाहता हूं। मैं पहले से ही क्रांतिकारी दिमाग का लड़का था। मेरी मम्मी का ये मानना था की बहन को पीरियड्स हैं, मंदिर नहीं जा सकती।' सोनू निगम ने कहा, 'ये नहीं कर सकते, वो नहीं कर सकते। क्यों भाई? जिस भगवान ने दिए हैं पीरियड्स, वो देने वाले को अस्वच्छ कर देगा। उसको क्यों? उसका कारण था पहले। भगवान ने दिए हैं न। उसमें औरत की क्या गलती है। मेरी बहन की क्या गलती है। या मेरी बहनों की क्या गलती है।'
सोनू ने आगे कहा कि ' मैं जा रहा हूं, मैं पूजा कर रहा हूं, मेरी बहन बाहर बैठी है। हाय मेरे साथ में ऐसा हो गया... मैं पांच दिन तक कोप भवन में बैठूंगी.... मैं नहीं जा सकती। ये क्या है बदतमीजी? जहां मानना है स्वच्छता वहां नहीं मानेंगे। दिमाग की स्वच्छता। फालतू कामों में मानेंगे। उनके लिए ये स्वच्छता है।'
इसके बाद सोनू निगम ने स्वच्छता पर सवाल खड़े करते हुए कहा, 'टॉयलेट गंदे हैं वो चलेगा। पोट्टी पड़ी हुई है वो चलेगा। दिवार पर पेशाब कर रहे हैं लोग, वो चलेगा। ये स्वच्छता है। हम बहुत स्वच्छ लोग हैं। मंदिर में नहीं ले जाएंगे अपनी बेटी को। ये हमारी स्वच्छता है। मैं बहुत पहले से बोलता आया हूं ये बात। मेरी मम्मी बुरा मानती थी। हमारे हिंदू धर्मं में ऐसा होता है। खैर... मैं ये मानता हूं कि जहां स्वच्छता होनी चाहिए, वहां नहीं होती। और जहां नहीं होनी चाहिए, वहां होती है। जिस बात को बड़ा मुद्दा नहीं मानना चाहिए उसे बड़ा बना दिया जाता है।'