Ajit Khan Struggle Story: हिंदी सिनेमा के 'लॉयन' कहे जाने वाले अजीत खान की स्ट्रगल स्टोरी जानेंगे तो आपके होश उड़ जाएंगे! जी हां वो एक्टर, जिसने अपनी किताबें बेचकर पहले मुंबई पहुंचा फिर सीमेंट की पाइपलाइन में कई रातें बिताई।
Ajit Khan Birth Anniversary: हिंदी सिनेमा में अपनी जोरदार आवाज और खौफनाक अंदाज से ‘लॉयन’ के नाम से मशहूर अजीत खान की असली जिंदगी किसी फिल्म से कम नहीं थी। पर्दे पर विलेन बनकर लोगों के दिल दहला देने वाले अजीत ने असल जिंदगी में इतने संघर्ष झेले कि सुनकर भी यकीन करना मुश्किल है। मुंबई आने के लिए उन्होंने अपनी किताबें तक बेच दीं, यहां पहुंचकर कई रातें सीमेंट की पाइपलाइन में गुजारीं क्योंकि सोने की जगह तक नहीं थी। आज 99% लोग उनके इस दर्दभरे सफर से अनजान हैं। लेकिन यही संघर्ष उन्हें बॉलीवुड का सबसे यादगार विलेन बनाने की वजह बना।
बता दें बहुत कम लोग जानते हैं, अजीत का असली नाम हामिद अली खान था। 27 जनवरी 1922 को हैदराबाद में जन्मे अजीत बचपन से ही फिल्मों की चमक-दमक से खिंचे चले आते थे। पढ़ाई तो चलती रहती थी, लेकिन उनके दिल में सिर्फ एक ही सपना था… एक दिन पर्दे पर चमकना। उस समय फिल्मों में जगह बनाना बेहद मुश्किल था। न कोई पहचान, न कोई मदद… लेकिन अजीत ने ठान लिया था कि उन्हें मुंबई जाकर अपना सपना पूरा करना ही है।
मुंबई जाने का फैसला तो कर लिया, लेकिन जेब में इतने पैसे भी नहीं थे कि टिकट खरीदी जा सके। ऐसे में उन्होंने हिम्मत जुटाकर अपनी पढ़ाई की किताबें बेच दीं। इन्हीं पैसों से वो मायानगरी मुंबई पहुंचें। लेकिन यहां आकर समझ में आया कि असली जंग तो अब शुरू हुई है। शुरुआत में अजीत के पास रहने तक की जगह नहीं थी। कई रिपोर्ट्स बताती हैं कि वो कई रातें सीमेंट की बड़ी पाइपलाइन के अंदर सोकर बिताते थे। न पैसे, न जान-पहचान फिर भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। छोटे-मोटे रोल करते रहे, लोगों से मिलते रहे, और धीरे-धीरे अपनी पहचान बनाते गए। कई मुश्किलों के बाद यही अजीत बने, जिनकी आवाज और अंदाज ने उन्हें बॉलीवुड का ‘लॉयन’ बना दिया।
साल 1946 में अजीत को फिल्म 'शाह-ए-मिस्र' में बतौर हीरो काम करने का मौका मिला। इसके बाद उन्होंने कई फिल्मों में मुख्य अभिनेता के तौर पर काम किया, लेकिन वह पहचान नहीं मिली, जिसकी उन्हें तलाश थी। इसके बाद, अजीत ने विलेन के किरदारों को निभाना शुरू किया और यहीं से उनके करियर ने नया मोड़ ले लिया।
विलेन के रूप में अजीत ने हिंदी सिनेमा को एक नया अंदाज दिया। वह पर्दे पर शांत, स्टाइलिश और खतरनाक विलेन के रूप में सामने आए। उनके डायलॉग्स, बोलने का तरीका और आंखों की भाषा दर्शकों के दिलों को छू जाती थी। 'सारा शहर मुझे लॉयन के नाम से जानता है', 'मोना डार्लिंग' और 'लिली, डोंट बी सिली' जैसे डायलॉग आज भी लोगों की जुबान पर हैं।
अजीत ने करियर में कई यादगार फिल्मों में काम किया और हीरो को कड़ी टक्कर दी। खास बात यह थी कि विलेन होने के बावजूद उनकी फैन फॉलोइंग किसी हीरो से कम नहीं थी। पर्दे पर डर पैदा करने वाले अजीत असल जिंदगी में बेहद शांत और अनुशासित थे।
लंबे फिल्मी करियर के दौरान अजीत को उनके योगदान के लिए सम्मान भी मिला। उन्होंने हिंदी सिनेमा में विलेन की परिभाषा बदल दी और आने वाली पीढ़ियों के कलाकारों के लिए एक मिसाल बन गए। 22 अक्टूबर 1998 को उनका निधन हो गया, लेकिन उनका रौबदार अंदाज और संघर्ष से भरी कहानी आज भी लोगों को प्रेरित करती है।