Revathy as judge in Assi: फिल्म अस्सी के विवादित सीन को लेकर अनुभव सिन्हा ने हाल ही में अपना बयान दिया है, जिसमें उन्होंने इसे एक घिनौना और मुश्किल शूट बताया।
Revathy as judge in Assi: फिल्ममेकर अनुभव सिन्हा और एक्ट्रेस Taapsee Pannu की नई फिल्म 'अस्सी' को उनकी पिछली फिल्मों से ज्यादा परिपक्व और साहसी बताया जा रहा है। ये फिल्म जेंडर और पितृसत्ता जैसे मुद्दों पर बहस छेड़ी है। बता दें, एक खास बातचीत में अनुभव सिन्हा ने फिल्म की कहानी, चुनौतीपूर्ण सीन और अपनी सोच के बारे में खुलकर अपनी राय रखी है।
अनुभव सिन्हा ने बताया कि फिल्म की शुरुआती हिस्सा उन्होंने सिर्फ 2 घंटे में लिख दिया था, लेकिन उसे लिखने के बाद उन्हें खुद से घिन महसूस हुई। इसके बाद उन्हें लगा कि शायद उनके को-राइटर गौरव सोलंकी इसे खारिज कर देंगे, लेकिन उल्टा उन्होंने इसकी तारीफ की। अनुभव सिन्हा के अनुसार, उस सीन तक पहुंचने के लिए उन्हें अपने भीतर के अंधेरे से गुजरना पड़ा और खासतौर पर वो शॉट, जिसमें कैमरा कार के नीचे रखा गया है, उनके लिए बेहद असहज और घिनौना था, लेकिन कहानी के लिहाज से जरूरी भी थी।
अनुभव सिन्हा ने आगे कहा कि मुख्यधारा सिनेमा में अक्सर हीरो को उभारने के लिए किसी महिला किरदार को पीड़ित बनाना पड़ता है। ये पितृसत्तात्मक सोच का हिस्सा है। बता दें, पुराने दौर में विलेन द्वारा महिलाओं पर किए गए अत्याचारों को भी मजाक की तरह पेश किया जाता था, जिस पर दर्शक हंसते थे, लेकिन सिन्हा मानते हैं कि ये सोच बदलने की जरूरत है। क्योंकि ये गलत है किसी के साथ हुए गलत बर्ताव पर हसना।
इतना ही नहीं, फिल्म बनाते वक्त उन्होंने इस बात का खास ध्यान रखा कि कहीं 'मेल गेज' हावी न हो जाए। इसके लिए उन्होंने महिलाओं द्वारा बनाई गई कई फिल्में देखीं और रेप सर्वाइवर्स की कहानियां भी पढ़ीं। पुरुष होने के नाते महिला के नजरिए से कहानी कहना आसान नहीं होता, लेकिन जागरूक रहकर इसे और बेहतर बनाया जा सकता है। इन सब पर कास्टिंग के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि कास्टिंग डायरेक्टर Mukesh Chhabra का अहम योगदान रहा।
इसके साथ ही उन्होंने बताया कि एक समय ऐसा आया जब जज के रोल के लिए सब कुछ बिखरता नजर आ रहा था, लेकिन आखिरकार सीनियर एक्ट्रेस Revathi फिल्म में शामिल हो गईं और उन्होंने बेहतरीन काम किया। इस फिल्म पर अनुभव सिन्हा का मानना है कि गलतियों को एक्सेप्ट करके आगे बढ़ना ही असली जीत है। उनके मुताबिक, समाज और सिनेमा दोनों में बदलाव तभी आएगा जब हम अपनी कमियों को मानने की हिम्मत दिखाएंगे।