13 दिसम्बर को सरकार के चार साल पूरे होने जा रहें है। सरकार इन चार सालों में किए कार्येा को भुनाने में लगी है।
बूंदी- चार साल तक जो अफसर दफ्तर में दिखाई तक नहीं पड़ते थे वो अब चुनावी साल आते ही इस कदर पंचुअल हो गए हैं कि जब जाओ दफ्तर में बैठे दिखाई पड़ते हैं। चुनावी योजनाओं को अमली जामा पहनाने का इस कदर दवाब है कि ज्यादातर सरकारी दफ्तरों में ओवरटाइम का दौर शुरू हो गया है।
13 दिसम्बर को सरकार के चार साल पूरे होने जा रहें है। सरकार इन चार सालों में किए कार्येा को भुनाने में लगी है। इन्ही सरकारी योजनाओं का खाका तैयार करने के लिए सरकारी महकमे के अधिकारी दिन रात लगे है। फाइलों में गुम अधिकारियों पर इस कदर प्रेशर है कि ब्रेकफास्ट और लंच तक को भूल कार्ययोजना तैयार करने में जुटे है। कार्यालय समय की देरी से पहुंचने और जल्दी जाने वाले ये अधिकारी अब राइट टाइम नजर आते है।
सरकार का पूरा फोकस समाजकल्याण विभाग पर है जिसमें सरकारी योजनाए सबसे ज्यादा संचालित है। विभाग में कई योजनाएं नई शामिल की गई है। जरूरतमंद निराश्रित एवं विधवा व बुजूर्ग वर्ग के साथ अन्य वर्गो के लिए कई ऐसी महत्वपूर्ण योजनाए शामिल की गई जिसे भूनाने के लिए सरकार चार वर्ष पूरे होने पर लोगो तक पहुंचाएगी। लेकिन इन्ही योजनाओं में कई ऐसी योजनाए है जो सरकारी सिस्टम में ही दम तोड़ती नजर आ रही है। सरकार के हाइटेक कदम की ओर इन योजनाओं को अमली जामा नही पहुंचाया जा रहा है। ऑनलाइन होने वाली इन योजनाओं से लेागो को फायदा नहीं मिल पा रहा है यही वजह है कि इस विभाग में सबसे ज्यादा दबाव अधिकारियों पर है, जो दिन रात सरकारी योजनाओं के सफल क्रियान्वयन को लेकर जुटे हुए है। सरकार अपनी वाही वाही लूटने के प्रयास में कर्मचारियों को दौड़ लगवा रही है।