
Milching Padhati
बूंदी . हरे.भरे खेतों के बीच दूर से चमकती पॉलीथीन देखकर किसी को भी हैरानी हो सकती है। बूंदी जिले के दर्जनों गाँवों में किसान मल्चिग विधि से मुनाफे की फसल काट रहे हैं। बड़ानयागांव. कृषि विभाग के प्रयास से अब किसानों में आधुनिक खेती के प्रति जागरूकता आने लगी है। इसका नजारा बड़ानयागांव में देखने को मिल रहा है। कृषि विभाग की राजस्थान कृषि प्रतिस्पद्र्धा योजना के तहत बड़ानयागांव, मांगलीखुर्द, खातीखेड़ा, गलीकला, बोरखेड़ा, जड़ का नयागांव, सथूर व बड़ोदिया में किसान मल्चिंग पद्धति से र्ची, टमाटर गोभी सहित अन्य सब्जियों की पैदावार कर रहे हैं। इस पद्धति से कम लागत में सब्जियों की अधिक पैदावार मिल रही है। लागत कम, कमाई ज्यादा के चलते किसान भी खुश है।
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ऐसे होती है खेती
मल्चिंग पद्धति से सब्जियों की पैदावार करने के लिए किसानों को पहले खेत तैयार करना पड़ता है। फि र मल्चिंग खेतों में लगाई जाती है। मल्चिंग के ब्लॉक में सब्जी की पौध लगाई जाती है। वहीं सोलर पंप से पाइपलाइन डाल कर ड्रिप से बूंद-बूंद सिंचाई की जाती है। मल्चिंग से खेत में खरपतवार नहीं होती है तथा पौधे में नमी बनी रहती है। जमीन में मल्चिंग से पोषक तत्वों का विकास होता है, जिससे सब्जियों के पौधे में अधिक पैदावार होती है। मल्चिंग पद्धति से खेती में उधान विभाग की ओर से किसानों को अनुदान दिया जाता है।
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मिल रहा फायदा
बड़ानयागांव के किसान तेजमल कुमावत, रामदेव सैनी, दुर्गालाल मीणा ने बताया कि मल्चिंग पद्धति से मिर्ची व टमाटर की फ सल कर रहे हैं। पानी की बचत के साथ सब्जियों की पैदावार भी पहले से ज्यादा हो रही है। कृषि अधिकारी राजेश शर्मा ने बताया कि बड़ानया गांव क्षेत्र में किसान मल्चिंग पद्धति से सब्जियों की खेती कर रहे है। इस पद्धति से किसानों को सब्जियों की कम लागत में अधिक पैदावार मिल रही है।
Published on:
11 Dec 2017 08:47 pm
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