12 अक्टूबर 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

Bundi News : शहरों जैसी लाइब्रेरी का सपना, बेटे की सोच ने बदली गांव की तस्वीर

पढ़ाई के लिए शहरों का रुख करने वाले युवाओं को अक्सर बेहतर संसाधनों की जरूरत महसूस होती है, लेकिन बूंदी के एक युवा ने इस समस्या का समाधान अपने गांव में ही तलाश लिया। खुद प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए लाइब्रेरी में बैठते हुए उसके मन में विचार आया कि जब शहरों में विद्यार्थियों को पढऩे के लिए बेहतर सुविधाएं मिल सकती हैं, तो गांव के युवाओं को इनसे वंचित क्यों रहना चाहिए? इसी सोच ने नेहड़ी की झोपडिय़ा गांव की तस्वीर बदलने की नींव रखी।
2 min read
Google source verification
a dream of city-style libraries

बूंदी. नेहड़ी की झोपडिय़ा में बनी लाइब्रेरी।

बूंदी. पढ़ाई के लिए शहरों का रुख करने वाले युवाओं को अक्सर बेहतर संसाधनों की जरूरत महसूस होती है, लेकिन बूंदी के एक युवा ने इस समस्या का समाधान अपने गांव में ही तलाश लिया। खुद प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए लाइब्रेरी में बैठते हुए उसके मन में विचार आया कि जब शहरों में विद्यार्थियों को पढऩे के लिए बेहतर सुविधाएं मिल सकती हैं, तो गांव के युवाओं को इनसे वंचित क्यों रहना चाहिए? इसी सोच ने नेहड़ी की झोपडिय़ा गांव की तस्वीर बदलने की नींव रखी। युवा भैरूलाल गुर्जर की पहल और ग्रामीणों व भामाशाहों के सामूहिक सहयोग से गांव में करीब 8 लाख रुपए की लागत से कर्नल किरोड़ी सिंह बैसला के नाम पर आधुनिक लाइब्रेरी तैयार हो गई। अब यहां सर्व समाज के विद्यार्थी बैठकर अपने सपनों को उड़ान देने में जुटे हैं। खास बात यह है कि इस बदलाव की शुरुआत किसी बड़े संस्थान या सरकारी योजना से नहीं, बल्कि एक युवा की सोच से हुई।

शहर जैसी सुविधा गांव में देने का सपना देखा

हिण्डोली में रहकर कृषि पर्यवेक्षक की तैयारी कर रहे युवक भैरूलाल गुर्जर ने गांव में पुस्तकालय बनाने का सपना देखा। मोहनलाल सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय से बीएससी-बीएड करने के बाद उन्हें शहरों में अध्ययन की बेहतर सुविधाएं देखकर गांव की कमी खली। इसी विचार के साथ उन्होंने अपने गांव में एक पुस्तकालय बनाने का संकल्प किया। भैरूलाल ने इस विचार को अकेले पूरा करने के बजाय ग्रामीणों के सामने रखा। उन्होंने गांव के युवाओं को बेहतर अध्ययन वातावरण देने की आवश्यकता समझाई और कर्नल किरोड़ी सिंह बैसला के 2007 के शिक्षा संदेश को आगे बढ़ाने की बात कही। ग्रामीणों और भामाशाहों ने इस पहल पर पूरा साथ दिया। सामूहिक प्रयासों से करीब 8 लाख रुपए की लागत से यह पुस्तकालय बनकर तैयार हो गया, जो अब गांव के युवाओं को पढ़ाई के लिए बेहतर मंच देगा।

अब गांव में बनेगी डिजिटल लाइब्रेरी

भैरूलाल गुर्जर की पहल यहीं तक सीमित नहीं है। गांव के युवाओं को आधुनिक तकनीक से जोडऩे के उद्देश्य से अब कर्नल बैसला के नाम पर डिजिटल लाइब्रेरी बनाने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए जगह का आवंटन भी कराया जा चुका है और जल्द ही निर्माण शुरू करने की योजना है। डिजिटल लाइब्रेरी बनने से युवाओं को अध्ययन के लिए तकनीक आधारित संसाधन उपलब्ध कराने की दिशा में एक और कदम आगे बढ़ेगा।

गांव का नाम रोशन करने का सपना

भैरूलाल का उद्देश्य है कि गांव के युवा इस लाइब्रेरी में नियमित अध्ययन करें और अपनी मेहनत के दम पर विभिन्न सरकारी एवं गैर-सरकारी विभागों में सेवाएं देकर गांव का नाम रोशन करें। उनका मानना है कि युवाओं को आगे बढऩे के लिए सही दिशा और पढ़ाई का बेहतर माहौल मिलना जरूरी है।

एसी, वाई-फाई और सीसीटीवी

गांव में तैयार की गई इस लाइब्रेरी में विद्यार्थियों की जरूरतों का ध्यान रखते हुए आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। यहां व्यवस्थित और आरामदायक सीटिंग व्यवस्था के साथ अनलिमिटेड वाई-फाई, एसी और सीसीटीवी कैमरों की सुविधा है। सुरक्षा और निगरानी के लिए गार्ड की व्यवस्था भी की गई है। इसके अलावा शौचालय और स्नानघर की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। इन सुविधाओं के बीच सर्व समाज के विद्यार्थी एक साथ बैठकर अध्ययन कर रहे हैं। गांव में ही पढ़ाई के लिए बेहतर माहौल मिलने से विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध हो रहा है।