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Bundi News : स्नेलन चार्ट ने खोली पोल, जिले सरकारी स्कूलों में 958 बच्चों की नजर कमजोर

प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पहली बार विद्यार्थियों की स्नेलन चार्ट के माध्यम से की गई जांच में जिले के करीब 958 बच्चों की आंखें जांच में कमजोर पाई गई है, जिससे अभिभावकों में ङ्क्षचता बढ़ गई है। शिक्षा विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए डॉक्टरों से सलाह लेकर इलाज कराने की तैयारी शुरू कर दी है। हिडोंली ब्लॉक के स्कूलों में सबसे ज्यादा 342 बच्चों की आंखे कमजोर पाई गई।
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Sep 25, 2026
958 children in government schools have weak eyesight
बूंदी. स्नेलन चार्ट के माध्यम से बच्चों की आंखों की जांच परखते हुए शिक्षक।

बूंदी. प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पहली बार विद्यार्थियों की स्नेलन चार्ट के माध्यम से की गई जांच में जिले के करीब 958 बच्चों की आंखें जांच में कमजोर पाई गई है, जिससे अभिभावकों में ङ्क्षचता बढ़ गई है। शिक्षा विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए डॉक्टरों से सलाह लेकर इलाज कराने की तैयारी शुरू कर दी है। हिडोंली ब्लॉक के स्कूलों में सबसे ज्यादा 342 बच्चों की आंखे कमजोर पाई गई। राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद ने प्रदेशभर के सरकारी स्कूलों में अध्ययनरत बच्चों के आंखों की स्क्रीङ्क्षनग स्नेलन चेट के माध्यम से कराई है। जांच पूरी कर 10 अगस्त को रिपोर्ट मुख्यालय भेेज दी है। अब परिषद के निर्देश पर चिन्हित बच्चों को राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम एवं राष्ट्रीय अंधता निवारण कार्यक्रम के तहत 5 किमी की परिधि में स्थापित स्वास्थ्य, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर लगे ऑप्थैल्मिक असिस्टेंट से समन्वय कर कक्षाध्यापक द्वारा आंखों का परीक्षण कराया जाकर चश्मे का नंबर मिलेंगे।

यह आई परेशानी

बालक-बालिकाओं द्धारा लगातार आंखों को मसलना. आंखों का लाल होना, आंखों में खुजली की शिकायत होना, दूर ²ष्टि दोष एवं निकट ²ष्टि दोष से पीडि़त होना,किताबों को आसानी से पढऩे में समस्या होना, कक्षा के ब्लैक बोर्ड पर लिखी हुई लाइनों को स्पष्ट रूप से नहीं पढ़ पाना आदि की समस्या से ग्रसित पाए गए है।

इस तरह स्नेलन चार्ट से की जांच

विद्यालय स्तर पर आंखों की प्रारंभिक जांच के लिए एक मार्गदर्शिका जारी की गई है। इसके अनुसार, कक्षा में पढ़ाई के दौरान शिक्षक उन विद्यार्थियों को पहचान की गई जिनमें कमजोर नजर या आंखों से जुड़ी समस्या के लक्षण दिख रहे हैं। शिक्षक कुछ सामान्य संकेतों पर ध्यान देंगे, जैसे ब्लैकबोर्ड देखने के लिए आंखें सिकोडऩा, सिर एक तरफ झुकाना, बार-बार पलकें झपकना, लगातार सिरदर्द या किताबों को बहुत पास रखकर पढऩा। इन लक्षणों के आधार पर बच्चों की पहचान कर आगे की जांच की जा सकेगी।

’ई’ अक्षर की दिशा बताई

विद्यार्थियों की आंखों की जांच के लिए एक मानकीकृत तरीका भी निर्धारित किया गया है। इस विधि के तहत, स्नेलन चार्ट की एक प्रति दीवार पर लगाकर विद्यार्थी 6 मीटर की दूरी से ’ई’ अक्षर की दिशा बताई। यदि कोई विद्यार्थी 6/12 वाली लाइन के अक्षरों की सही दिशा बताने में असमर्थ रहता है, तो उसे ²ष्टि दोष से ग्रस्त मानकर आगे की विस्तृत जांच के लिए डॉक्टर के पास भेजा जाएगा।

मोबाइल और डिजिटल स्क्रीन का बढ़ा उपयोग

बूंदी में अब तक की जांच में जो आंकड़ा सामने आया है, उसने सभी को चौंका दिया है। चिकित्सकों ने मोबाइल और डिजिटल स्क्रीन के अधिक उपयोग को भी इसका बड़ा कारण माना जा रहा है। जिला समावेशी शिक्षा समन्वयक समग्र शिक्षा डॉ. महेश कुमार गोस्वामी ने बताया कि आजकल शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के कम उम्र मे बालक बालिकाओं द्वारा लगातार मोबाइल का प्रयोग करने तथा भोजन में जंक फूड का प्रयोग करने से नेत्र ²ष्टि दोष होने का एक कारण रहा है। प्रतिवर्ष राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद जयपुर द्वारा ²ष्टिबाधित बालक बालिकाओं के लिए लार्ज फोंट बुक एवं ब्रेलबुक उपलब्ध करवाई जा रही है।

राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद के निर्देशानुसार जिले के सभी राजकीय विद्यालयों में अध्यनरत बालक-बालिकाओं की आंखों की जांच करवाई जा रही है जिन छात्र-छात्राओं के जांच में आंखों के चश्मे के लिए नंबर प्राप्त होंगे उन्हें नि:शुल्क चश्मे उपलब्ध कराए जाने की कार्यवाही की जाएगी।
मुकेश गुर्जर,जिला नोडल प्रभारी एवं कार्यक्रम अधिकारी समग्र शिक्षा,बूंदी

Updated on:
25 Sept 2026 12:03 pm
Published on:
25 Sept 2026 12:02 pm