
बूंदी। इंद्रगढ़ स्थित प्रसिद्ध श्री बिजासन माता मंदिर में रविवार को आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा कि पहाड़ी पर मंदिर तक पहुंचने वाली सीढ़ियां श्रद्धालुओं से भर गईं। सिर पर आस्था, जुबां पर माता के जयकारे और कदमों में दर्शन की ललक लिए भक्त कड़ी धूप में भी पहाड़ी चढ़ते रहे। करीब 750 सीढ़ियां चढ़कर श्रद्धालुओं ने माता के दरबार में धोक लगाई। सुबह से शुरू हुआ दर्शन का सिलसिला देर शाम तक जारी रहा। श्री बिजासन माता कल्याण विकास समिति के पदाधिकारियों के अनुसार, रविवार को करीब 4.50 लाख श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन किए।
रविवार को मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के चलते पहाड़ी पर चढ़ने वाली सीढ़ियों पर जगह मिलना भी मुश्किल हो गया। दूर-दराज के क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालुओं में माता के दर्शन को लेकर खास उत्साह नजर आया। तेज धूप भी भक्तों की आस्था को डिगा नहीं सकी। माता के जयकारों से मंदिर परिसर और पहाड़ी का वातावरण भक्तिमय बना रहा। भीड़ को नियंत्रित करने और दर्शन व्यवस्था सुचारू रखने के लिए पुलिस व प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ी।
श्री बिजासन माता कल्याण विकास समिति के अध्यक्ष हरीश योगी और मेला समिति अध्यक्ष अक्षय योगी सहित पदाधिकारियों के अनुसार, श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए मंदिर क्षेत्र में 62 सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है। मेले की व्यवस्थाओं को संभालने के लिए 50 पुलिसकर्मी और 80 होमगार्ड जवान तैनात किए गए हैं। भारी भीड़ के बीच सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए प्रमुख चुनौती रहा।
बूंदी शहर में नवरात्र के अवसर पर गरबा-डांडिया का उल्लास भी जारी है। किड्ज-जी ग्लोबल पब्लिक स्कूल में डांडिया रास एवं गरबा कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां दुर्गा की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन और वंदना के साथ हुआ। छात्राओं ने पारंपरिक रंग-बिरंगे परिधानों में गरबा और डांडिया की प्रस्तुतियां दीं। सर्वश्रेष्ठ वेशभूषा और सर्वश्रेष्ठ डांडिया नृत्य के लिए छात्राओं को पुरस्कृत किया गया। विद्यालय की ओर से शहर की नौ प्रख्यात महिलाओं को नारी इंस्पायर अवार्ड से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में सभापति भरत शर्मा, उपसभापति संजय भूटानी और समाजसेविका शालिनी विजय अतिथि रहे।
जजावर कस्बे के प्रसिद्ध झेटाल माता मंदिर में आयोजित वार्षिक मेले में भी भक्तों की भीड़ उमड़ी। आसपास के गांवों से श्रद्धालु पैदल और वाहनों से दर्शन करने पहुंचे। मंदिर में माता का विशेष श्रृंगार किया गया और सामूहिक आरती हुई। परिसर के बाहर लगी दुकानों पर खिलौने, पारंपरिक आभूषण, चाट-पकौड़ी और घरेलू सामान खरीदने के लिए महिलाओं व बच्चों की भीड़ रही।