बूंदी

तीन करोड़ रुपए जमा करवाने के बाद भी मेडिकल कॉलेज के छात्रों के कंठ प्यासे

तालाब गांव के निकट बूंदी मेडिकल कॉलेज भवन में छात्रों व स्टाफ के लिए शुद्ध पेयजल मिलने के लिए आरएसआरडीसी ने करीब 3 करोड रुपए जमा कराने के बाद भी कॉलेज पेयजल संकट से निजात नहीं मिल पा रही है।

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Apr 17, 2025
बूंदी मेडिकल कॉलेज

हिण्डोली. तालाब गांव के निकट बूंदी मेडिकल कॉलेज भवन में छात्रों व स्टाफ के लिए शुद्ध पेयजल मिलने के लिए आरएसआरडीसी ने करीब 3 करोड रुपए जमा कराने के बाद भी कॉलेज पेयजल संकट से निजात नहीं मिल पा रही है। यहां के छात्रों को बोरिंग के पानी पर ही निर्भर रहना पड़ रहा है।

जानकारी के अनुसार वर्ष 2023-24 में बूंदी मेडिकल कॉलेज का संचालन शुरू हुआ था। शुरू में छात्रों को पीने के पानी की गंभीर समस्याएं थी, जिस पर संवेदक द्वारा यहां पर खुदाए गए ट्यूबवेलों से कालेज परिसर में बनाए टैंक तक पीने का पानी पहुंचाया गया। आरएसआरडीसी द्वारा चंबल पेयजल योजना का शुद्ध पानी छात्रों को पिलाने के लिए जन स्वास्थ्य यंत्र के अधिकारियों को लिखा तो उन्होंने आरएसआरडीसी को 3 करोड 50 लाख रुपए का डिमांड नोट जारी किया, जिस पर नवीन चिकित्सा महाविद्यालय, बूंदी में जलापूर्ति के लिए हिण्डोली-नैंनवां पेयजल परियोजना की तालाब गांव टंकी से जलापूर्ति के लिए डिमाण्ड नोट राशि साढ़े तीन करोड़ जारी करने पर आरएसआरडीसी. लिमिटेड द्वारा शेयर कोस्ट की राशि 2 करोड़, 30 लाख 19 हजार रुपए जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग राजस्थान के जयपुर स्थित बैंक खाते में जमा करवाई गई।

इसके अलावा एसएनए. अकाउन्ट से राशि एक करोड़ 21लाख रुपए हस्तान्तरित किए जाने थे, जिसमें से 50 हजार रुपए हस्तान्तरित की जा चुकी हैं। 30 लाख रुपए और जमा किए हैं। उसके बाद भी यहां पर पानी नहीं पहुंच पाया। अभी चंबल परियोजना शुरू होने में काफी समय लगेगा। इतनी राशि में मेडिकल कॉलेज खुद का प्रोजेक्ट तैयार कर सकता था। मेडिकल कॉलेज के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि यहां पर लगे वाटर कूलर कई बार खराब होने से छात्रों को पीने का पानी बाहर से मंगवाना पड़ता है।

काफी समय लगेगा
सूत्रों ने बताया कि यहां पर चंबल पेयजल योजना का पानी आने में काफी समय लगेगा।हालांकि यहां पर पाइपलाइन बिछा दी गई है, टंकी का निर्माण करवा दिया गया,लेकिन आरोली से जाखोली पंप हाउस के बीच वाइल्ड लाइफ की रोक होने से परियोजना अधर में है।

गर्मी के मौसम में बोरिंगों से पानी मिल रहा है। जलस्तर गहरा जाने व पानी की समस्या आने पर यहां पर टैंकरों से जलापूर्ति की जाएगी।आरएसआरटीसी द्वारा राशि जमा कर रखें, लेकिन चंबल परियोजना का पानी कब आएगा। पता नहीं है।
डॉ.एसआर मीणा, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज बूंदी

Updated on:
17 Apr 2025 05:41 pm
Published on:
17 Apr 2025 05:40 pm
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