Gold-Silver Price Hike : सोने-चांदी की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि का सीधा असर आयुर्वेद चिकित्सा पर पड़ रहा है। स्वर्ण-रजत भस्म युक्त 50 से अधिक प्रमुख दवाएं 30 से 50 प्रतिशत तक महंगी हुईं हैं। यही नहीं दंत चिकित्सक भी परेशान हैं।
Gold-Silver Price Hike : सोने-चांदी की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि से अब चिकित्सक भी परेशान हैं। सोने-चांदी की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर आयुर्वेद चिकित्सा पर पड़ रहा है। जिससे स्वर्ण/रजत भस्म युक्त 50 से अधिक दवाएं 30 से 50 प्रतिशत तक महंगी हो गई हैं।
स्वर्ण भस्म, च्यवनप्राश और अन्य कीमती दवाएं अब आम मध्यमवर्गीय मरीजों की पहुंच से दूर हो रही हैं। इसका असर यह है कि अब लोग इन महंगी दवाओं को खरीदने से कतराने लगे हैं, जिससे इनकी बिक्री में भी गिरावट दर्ज की गई है।
जबकि आयुर्वेद चिकित्सक भी आवश्यकतानुसार इनका परामर्श दे पा रहे है। आयुर्वेद में जटिल एवं दीर्घकालिक रोगों में स्वर्ण भस्म व रजत भस्म युक्त दवाओं को प्रभावी माना जाता है। पूर्व में इन दवाओं की मांग अधिक रहती थी, लेकिन कीमतों में तेजी आने से अब आम मरीजों के लिए इन्हें खरीद पाना कठिन हो गया है।
ऐसे में कई मरीज बिना धातु मिश्रित दवाओं से ही उपचार कराने को मजबूर है। वहीं डॉक्टर अब कष्टसाध्य रोगी को उपचार के लिए इन दवाओं की जगह वैकल्पिक दवाओं को प्राथमिकता दे रहे हैं।
आयुर्वेदिक दवा विक्रेता शुभम ने बताया कि लगातार बढ़ रहे सोने-चांदी के भाव के चलते स्वर्ण, रजत व हीरा भस्म समेत अन्य रसों की दवाओं के दाम 30 से 50 प्रतिशत तक बढ़ गए है। वर्तमान स्थिति में स्वर्ण व रजत भस्म युक्त दवाएं मुख्य रूप से संपन्न वर्ग के लोग ही ले पा रहे है।
शुभम के अनुसार स्वर्ण भस्म पहले 3400 रुपए की आती थी, अब यह बढ़कर 4140 से 4250 रुपए की मिल रही है। जबकि रजत भस्म पहले 660 रुपए की मिलती थी, जो अब बढ़कर 880 रुपए एवं हीरा भस्म 100 एमजी की पहले 1100 रुपए की मिल रही थी,जो अब 1400 रुपए की मिल रही है। इसके अलावा अन्य दवाएं जिनके भी दाम बढ़े है।
ये दवाएं गठिया, मनोरोग, लकवा, फेफड़ों की बीमारी, नजला, डायबिटीज, टाइफाइड, एसीडीटी, पेट संबंधी रोग, हृदय रोग, ब्रैन हेमरेज सहित कई गंभीर बीमारियों में उपयोगी मानी जाती हैं।
आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील कुशवाह बताते है कि जटिल और कष्टसाध्य रोगों में प्रयुक्त अधिकांश औषधियों में सोने और चांदी की भस्म का उपयोग होता है। ये भस्म एंटीऑक्सीडेंट के रूप में कार्य कर रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक होती है।
सोना-चांदी महंगे होने से इनके निर्माण की लागत बढ़ी है, जिसका सीधा असर दवाओं की कीमतों पर पड़ा है। गरीब मरीजों के लिए उपचार मुश्किल हो गया है। स्वर्ण भस्म व रजत भस्म जटिल, जीर्ण व कष्टसाध्य रोगों के उपचार में अतिप्रभावी होने से अपना विशिष्ट स्थान रखती है। यह कई अतिप्रभावी आयुर्वेदिक औषधियों का प्रमुख घटक है।
कुछ समय से लगातार बढ़ रहे चांदी के भाव का असर दंत चिकित्सा में भी देखने को मिल रहा है। दांतों की फीलिंग में काम आने वाली सिल्वर एलॉय के भावों में भी वृद्धि हुई है।
दंत चिकित्सक डॉ. मोहित जैन ने बताया दांतों में भरी जाने वाली चांदी की फीलिंग की कीमत में 20 से 25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। पहले जो फीलिंग 600-700 में की जाती थी अब वो 1000-1200 की होती है। इसी वजह से अब सिल्वर एलॉय की फीलिंग की जगह दूसरी फीलिंग का उपयोग ज्यादा किया जाने लगा है।