
Bundi : गुढानाथावतान (बूंदी). प्रदेश में भेड़ियों के संरक्षण और संवर्धन के लिए वन विभाग ने व्यापक परियोजना तैयार करने की कवायद शुरू कर दी है। इसकी शुरुआत हाड़ौती के जंगलों से की गई है। रामगढ़ विषधारी और मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व सहित आस-पास के वन क्षेत्रों में भेड़ियों की मौजूदगी, संख्या और उनके विचरण क्षेत्र का पता लगाने के लिए सर्वे शुरू किया गया है। इसके लिए वन विभाग ने आमजन, वन्यजीव प्रेमियों, शोधकर्ताओं, फोटोग्राफरों और ग्रामीणों से सहयोग मांगा है। विभाग की ओर से गूगल फॉर्म भी जारी किया गया है, जिसके जरिए कोई भी व्यक्ति भेड़ियों की मौजूदगी से जुड़ी जानकारी साझा कर सकता है।
वन विभाग की वन्यजीव शाखा ने कोटा संभाग के फील्ड स्टाफ के साथ शोधकर्ताओं, वन्यजीव प्रेमियों, विद्यार्थियों और संरक्षणविदों से भेड़ियों के संबंध में जानकारी उपलब्ध कराने का आग्रह किया है। सर्वे के माध्यम से उनके आवास वाले क्षेत्रों को चिह्नित कर संख्या, फैलाव और संरक्षण की संभावनाओं का आकलन किया जाएगा। इन क्षेत्रों की मैपिंग के साथ ईको टूरिज्म की संभावनाएं भी तलाशी जा रही है। दोनों टाइगर रिजर्व के कोर और बफर क्षेत्रों में फोटो ट्रैप कैमरों से भी भेड़ियों की निगरानी की जा रही है।
रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के जैव विविधता से समृद्ध भीमलत और बांका-भोपतपुरा के बफर क्षेत्र में दो वर्षों से भेड़िया संरक्षण की योजना पर काम चल रहा है। नवगठित भोपतपुरा रेंज में उपरमाल के पठार पर 800 हेक्टेयर वन क्षेत्र को भेड़ियों और गिद्धों के संरक्षण के लिए चिन्हित किया गया है।
मुकुंदरा टाइगर रिजर्व के अंतर्गत बूंदी जिले के जवाहर सागर अभयारण्य में भी भेड़ियों की मौजूदगी दर्ज की गई है। वन विभाग के अनुसार, यहां भेड़ियों के झुंड भी दिखाई दिए हैं। विभाग अब पूरे हाड़ौती संभाग के जंगलों में भेड़ियों के संरक्षण और उनकी संख्या बढ़ाने की संभावनाएं तलाश रहा है।
गणना वर्ष - भेड़िये
2010 1,289
2020 682
2022 532
2024 771
हाडौती क्षेत्र के जंगलों में भेड़ियों के बालस्थलों, वास्तविक संख्या, उनके प्रे-बेस (शिकार के लिए उपलब्ध वन्यजीव) के लिए आमजन व वन्यजीव प्रेमियों से व्यापक सर्वे शुरू किया है। सर्वे से प्राप्त परिणाम और वन विभाग के आंकड़ों के आधार पर भेड़ियों के संरक्षण और संवर्धन के लिए योजना तैयार की जाएगी।
टी. मोहन राज, फील्ड डायरेक्टर मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व