
बूंदी. अपराध और कानून-व्यवस्था की ड्यूटी में दिन-रात जुटे पुलिसकर्मियों को साप्ताहिक अवकाश देने की योजना चार साल बाद भी धरातल पर नहीं लौट सकी है। जवानों को तनाव से राहत और परिवार के लिए समय देने के उद्देश्य से तत्कालीन डीजीपी ने 2022 में अजमेर के गेगल थाने से पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया था। सफल परिणाम के बाद इसे अन्य जिलों में लागू किया गया। बाद पायलट प्रोजेक्ट धीरे-धीरे फाइलों में सिमट गया। बूंदी में भी जनवरी 2023 में सदर थाने से इसकी शुरुआत हुई थी, लेकिन विधानसभा चुनाव की आचार संहिता के बाद व्यवस्था बंद हो गई। इसके बाद दोबारा इसे नियमित रूप से लागू नहीं किया जा सका।
विभागीय सूत्रों के अनुसार सितंबर 2023 तक कई थानों में यह व्यवस्था चली, लेकिन बाद में बंद हो गई। पुलिसकर्मियों की स्वीकृत संख्या के मुकाबले कम नफरी साप्ताहिक अवकाश की राह में सबसे बड़ी बाधा बनी। कई थानों में सीमित स्टाफ पर कई गांवों की जिम्मेदारी है। इसके अलावा रात की गश्त, अपराध अनुसंधान, धरने-प्रदर्शन, वीआईपी ड्यूटी, हादसे और कोर्ट संबंधी काम के कारण रोस्टर बनाना चुनौती बना हुआ है।
योजना के तहत रोस्टर तैयार कर हर जवान को सप्ताह में एक दिन सुबह 8 बजे से अगले दिन सुबह 8 बजे तक अवकाश देने का प्रावधान था। प्रतिदिन पांच पुलिसकर्मियों को छुट्टी देने की व्यवस्था थी। थानाधिकारी जरूरत के अनुसार जवान और अवकाश का दिन तय कर सकता था। कानून-व्यवस्था, आपात स्थिति या विशेष सरकारी ड्यूटी होने पर अवकाश निरस्त करने का प्रावधान भी था।
लगातार ड्यूटी के बीच जवानों को पर्याप्त आराम नहीं मिलने से काम का दबाव बढ़ता है। रात की गश्त के बाद दिन में अपराध संबंधी कार्रवाई और कानून-व्यवस्था की ड्यूटी करनी पड़ती है।
पलिसकर्मियों के लिए निर्धारित छुट्टियों में से वास्तव में कितनी छुट्टियां मिल पा रही हैं?
अवकाश कितनी बार और किन परिस्थितियों में निरस्त किए गए?
एएसआई, हेड कांस्टेबल और कांस्टेबल को निर्धारित छुट्टियों में से कितनी मिलीं?
कांस्टेबल से इंस्पेक्टर तक पदोन्नति में डीपीसी लागू करने की योजना कब तक है?
समय-समय पर जवानों को अवकाश दिया जा रहा है। वीआईपी मूवमेंट, त्योहारों सहित अन्य विशेष परिस्थितियों में ही अवकाश निरस्त किए जाते हैं। आवश्यकता होने पर जवान स्वयं भी अवकाश लेते हैं।
संजय सिंह चम्पावत, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, बूंदी