
बूंदी. जिले में नशे के खिलाफ पुलिस की लगातार कार्रवाई के बावजूद मादक पदार्थों की सप्लाई पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग पाया है। बीते तीन साल में पुलिस ने करीब तीन करोड़ रुपए से अधिक मूल्य का अवैध मादक पदार्थ जब्त किया है। इस दौरान एनडीपीएस एक्ट के तहत 113 प्रकरण दर्ज कर 117 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इसके बावजूद नशे का नेटवर्क लगातार सक्रिय है और इसकी पहुंच गांवों की ढाणियों से लेकर शहर की गलियों तक बनी हुई है। गांजा, डोडा चूरा, स्मैक, चरस और अफीम जैसे मादक पदार्थों की तस्करी के मामले सामने आए हैं। तस्कर पुलिस से बचने के लिए सुनसान रास्तों और वाहनों में बनाए गए गुप्त बॉक्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। कई मामलों में लग्जरी वाहनों से नशीले पदार्थों की खेप ले जाते आरोपी पकड़े गए हैं। कुछ मामलों में पुलिस टीमों पर फायङ्क्षरग की घटनाएं भी सामने आई हैं।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार तीन साल में 100 किलो से अधिक गांजा, 2069 किलो डोडा चूरा और करीब 50 किलो स्मैक जब्त की गई। इसके अलावा अफीम सहित अन्य मादक पदार्थ भी पुलिस कार्रवाई में पकड़े गए। जब्त मादक पदार्थों की बाजार कीमत करीब तीन करोड़ रुपए से अधिक आंकी गई है। इतनी बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ जब्त होने और 117 आरोपियों की गिरफ्तारी के बावजूद जिले में नशे की सप्लाई जारी रहना पुलिस के सामने बड़ी चुनौती है। कार्रवाई में अक्सर नशीला पदार्थ और स्थानीय स्तर पर उसे खपाने वाले लोग पकड़े जाते हैं, लेकिन सप्लाई की पूरी चेन तक पहुंचना चुनौती बना हुआ है।
पुलिस के अनुसार मध्यप्रदेश के अलावा झालावाड़, बारां, बेगूं, चित्तौडग़ढ़ और भीलवाड़ा की तरफ से भी मादक पदार्थ आने के मामले सामने आए हैं। तस्कर सुनसान और वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करते हैं। कई बार आगे चलने वाले वाहन रास्ते की रेकी करते हैं और पीछे लग्जरी वाहनों में मादक पदार्थ छिपाकर ले जाया जाता है।
नशे की पहुंच का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कम मात्रा में गांजा और स्मैक युवाओं तक आसानी से पहुंच रही है। छोटी पुडिय़ा 100 से 200 रुपए में मिलने की बात सामने आती है। हाल ही में कोतवाली पुलिस ने 1.96 ग्राम स्मैक के साथ दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। उनके पास से नशा करने के उपकरण भी बरामद किए गए। लाखेरी में 192 ग्राम गांजा और ङ्क्षहडोली के अकलोड गांव में एक आरोपी से करीब 1 ङ्क्षक्वटल 97 किलो डोडा चूरा जब्त किया गया। पुलिस की कार्रवाई में नाबालिग भी पकड़े गए हैं।
तस्कर पुलिस की नजर से बचने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं। पिकअप की ट्रॉली में गुप्त बॉक्स बनाकर डोडा चूरा ले जाने का मामला भी सामने आया। जंगल और सुनसान इलाकों में वाहनों को खड़ा कर मादक पदार्थ छिपाने के मामले भी पुलिस कार्रवाई में सामने आए हैं। इस तरह की तस्करी में स्थानीय नेटवर्क की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है। इसलिए केवल नशीला पदार्थ जब्त करने के बजाय सप्लाई करने वाले और खरीदार तक पहुंचना पुलिस के लिए जरूरी चुनौती है।
हर महीने कार्रवाई के बावजूद नशे की नई खेप जिले में कैसे पहुंच रही है? सप्लाई की जड़ कहां है? पकड़े गए आरोपियों के पीछे सक्रिय नेटवर्क तक पुलिस कितनी पहुंच पाई है? नशे की गिरफ्त में आए युवाओं और नाबालिगों के पुनर्वास व काउंसङ्क्षलग की क्या व्यवस्था है? चिकित्सकों के अनुसार लगातार नशे के सेवन से अवसाद, चिड़चिड़ापन, अनिद्रा, याददाश्त कमजोर होने और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।
जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत अवैध मादक पदार्थ के विरुद्ध पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है। पुलिस अलर्ट मोड पर है।
अवनीश कुमार शर्मा, पुलिस अधीक्षक, बूंदी