
बूंदी. शहर में पर्याप्त जलापूर्ति के भले ही जलदाय विभाग दावे कर रहा हो, लेकिन हकीकत कुछ ओर ही बयां कर रही है। पहाड़ी क्षेत्र तो दूर निचले इलाकों में भी लोगों को पीने का पानी मुहैया नहीं हो रहा। बच्चों और महिलाओं को दूर जाकर पानी भरना पड़ रहा है।
कई जगहों पर लगे हैंडपम्प के सहारे मजबूर तो कई महंगे दामों में पानी के टैंकर मंगवाने को मजबूर हैं। शहरी क्षेत्र में जलापूर्ति या तो कई दिनों के अंतराल में हो रही है या फिर मटमैला पानी मिल रहा है।शहर में रविवार को भी कई इलाकों में जलापूर्ति नहीं हो सकी। जिसके चलते लोग परेशान नजर आए। नलों के इंतजार में महिलाएं घंटों बैठी रही।
पानी के लिए भाग-दौड़
रोजमर्रा के कार्यांे के लिए लिए पानी की जुगत में महिलाओं को भाग-दौड़ करनी पड़ी। गृहणियों को घर में खाना बनाने व पीने के पानी के लिए दूर हैंडपंप और नलकूप के चक्कर काटने पड़े।इसके चलते कई जगहों पर लोगों की कतारें लगी रही।
मटमैला आ रहा पानी
शहर के मधुबन कॉलोनी सहित आस-पास के क्षेत्र में मटमैला पानी आने का सिलसिला थमा नहीं।यहां के बाशिंदों ने जिम्मेदार महकमों को अवगत भी करा दिया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। मधुबन कॉलोनी निवासी सीमा नुवाल ने बताया कि एक माह होने को आया, जलापूर्ति में सुधार नहीं किया जा रहा।
१५ दिन से नहीं टपके नल
शहर की महावीर कॉलोनी के कई हिस्सों में घरों तक पानी पहुंचे पन्द्रह दिन हो गए।जलापूर्ति करने के दौरान प्रेशर कम रहने से पानी नलों तक नहीं पहुंच रहा।हाल यह हो गए कि यहां बनी एक मात्र टंकी पर दिनभर भीड़ रहने लगी हैं।
फूट रही लाइनें
शहर में कई जगहों पर फूटी हुई पाइप लाइनों को दुरुस्त नहीं किया जा रहा। नैनवां रोड अधीक्षण अभियंता कार्यालय के बाहर की लाइन को टूटे कई दिन हो गए, लेकिन अभी तक ठीक नहीं की गई। शाम के समय वॉल खोलते ही पानी सडक़ों पर व्यर्थ बहने लगता है। लोगों ने बताया कि यहां गड्ढा खुदे एक माह हो गया।