
नैनवां. नैनवां में सरकारी कॉलेज नहीं होने से कई बेटियों का कॉलेज में एडमिशन लेकर उच्च शिक्षा प्राप्त करने का सपना पूरा नहीं हो रहा। इस मामले में शिक्षिकाओं ने कहा कि बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का सरकार का नारा भी यहां साकार नहीं हो रहा।
अभिभावक अपनी बेटियों को उच्च शिक्षा तो दिलाना चाहते हैं लेकिन स्ववित्तपोषी महाविद्यालय में अधिक शुल्क लिए जाने से गरीब तबके की छात्राएं उच्च शिक्षा प्राप्त नहीं कर पा रही। ऐसे में वे या तो स्वयंपाठी बनकर पढ़ाई कर रही हैं या फिर पढ़ाई ही छोड़ देती हैं।स्नातक तक स्वयंपाठी के रूप में परीक्षा देकर शिक्षक बनी बेटियों व नैनवां की अन्य शिक्षिकाओं ने कहा कि कॉलेज सरकारी होना चाहिए। इस मांग को मनवाने के लिए नैनवां एकजुट होकर संघर्ष करेगा।
कॉलेज सरकारी नहीं होने से हर वर्ष कस्बे व गांवों की कई छात्राएं उच्च शिक्षा से वंचित रह जाती है। ग्रामीण अभिभावक अपनी बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए बाहर नहीं भेजते।जिससे उन बेटियों को 12 वीं कक्षा पास करने के बाद ही पढ़ाई छोडऩी पड़ रही है।
विभा गौतम, व्याख्याता, सीनियर सैकण्डरी स्कूल, नैनवां
कई बालिकाएं 12वीं कक्षा अच्छे नम्बरों से पास करती हैं, लेकिन सरकारी कॉलेज के अभाव व स्ववित्तपोषी महाविद्यालय में फीस अधिक होने से उनके सामने आगे की पढ़ाई करने के रास्ते बंद हो जाते हंै। इस विद्यालय में अच्छे नम्बरों से पास होने वाली बालिकाएं कही मिलती तो कहती है कॉलेज सरकारी नहीं होने से अभिभावकों ने आगे पढ़ाने के लिए मना कर दिया। वे फीस नहीं भर पाएंगे।
वर्षा शाह, शिक्षिका, सीनियर सैकण्डरी स्कूल, नैनवां
नैनवां कॉलेज सरकारी होना अत्यंत आवश्यक है। अधिक शुल्क के कारण नैनवां की निर्धन तबके की होनहार बालिकाओं के लिए कॉलेज में शिक्षा प्राप्त करना मात्र सपना बनकर रह गया। उन्हें सरकार की कई योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा।
रुचिका वर्मा, शिक्षिका, उच्च प्राथमिक विद्यालय, दियाली
सरकारी कॉलेज के अभाव में नैनवां व क्षेत्र की गांवों की बेटियों का सरकार को नि:शुल्क उच्च शिक्षा योजना सपना बनकर रह गई। नैनवां स्ववित्तपोषी महाविद्यालय में पढ़ाने के लिए सरकारी कॉलेज से अधिक फीस देनी पड़ रही है।
लता जोशी, शिक्षिका, उच्च प्राथमिक विद्यालय, बड़ीपड़ाप
नैनवां का कॉलेज अपने आप में सम्पूर्ण व्यवस्थाओं से परिपूर्ण है, लेकिन कॉलेज स्ववित्तपोषी होने से तथा सरकारी कॉलेज से कई गुना अधिक फीस लगने से निर्धन तबके की सैकड़ों बालिकाएं उच्च शिक्षा संस्थान में प्रवेश नहीं ले पा रही।आसपास के गांवों की बेटियों को या तो उच्च शिक्षा से वंचित रहना पड़ता है या फिर घर में ही पढाई कर स्नातक या स्नातकोत्तर की पढ़ाई करनी पड़ रही है।
शबाना अख्तर, उच्च प्राथमिक विद्यालय, भीमगंज
हर क्षेत्र में बेटियां आगे बढ़ रही है लेकिन यह नैनवां का दुर्भाग्य है कि सरकारी कॉलेज के अभाव में क्षेत्र की सैकड़ों बेटियों को उच्च शिक्षा से वंचित रहना पड़ रहा है। सरकार एक तरफ तो बेटी बचाओ-बेटी पढाओ का नारा देती है तो दूसरी तरफ नैनवां की बेटियों का 12वीं कक्षा पास करने के बाद उच्च शिक्षा का रास्ता बंद हो रहा है।
दुर्गा योगी, विद्यार्थी मित्र शिक्षिका
Published on:
14 May 2018 12:27 pm
