बावडिय़ों के शहर बूंदी में स्थित ऐतिहासिक रानीजी की बावड़ी वर्तमान में उपेक्षा का शिकार होकर बदहाल है। कभी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रही यह प्राचीन धरोहर अब अपनी भव्यता खोती जा रही है। बावड़ी के भीतर और बाहर लगे पत्थर दरकने लगे हैं, जो इसकी मजबूती और सौंदर्य के लिए खतरा हैं। पुरातत्व विभाग के अधीन होने के बावजूद इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
बूंदी. बावडिय़ों के शहर बूंदी में स्थित ऐतिहासिक रानीजी की बावड़ी अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। कभी पर्यटकों को आकर्षित करने वाली यह बावड़ी अब उपेक्षा का शिकार है। बावड़ी में लगे पत्थर दरकने लगे हैं, जिससे इसकी भव्यता कम होती जा रही है। पुरातत्व विभाग के अधीन होने के बावजूद विभाग इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। बावड़ी में बनी टिकट विंडो के पत्थर आए दिन गिर रहे हैं। बावड़ी के ऊपर लगा फाइबर भी जगह-जगह से टूट गया है, वहीं बावड़ी के अंदर भी दरारें दिखने लगी हैं और फर्श के पत्थर उखडऩे लगे हैं।
बावड़ी शहर के निकट बसी हुई है,ऐसे में हर व्यक्ति इसको निहारने से नहीं चूकता है। विभाग केवल टिकट काटने पर ही केंद्रित है और बावड़ी के जीर्णोद्धार की कोई योजना नहीं बना रहा है। वर्ष 2016 में बावड़ी में जीर्णोद्धार के कार्य हुए थे, जिसके बाद से विभाग ने बावड़ी की ओर से ध्यान हटा लिया। प्रत्येक वर्ष 5000 विदेशी पर्यटक और 7000 भारतीय पर्यटक इस बावड़ी का दीदार करते हैं, जिससे प्रति वर्ष 15 लाख रुपए की आय होती है। इतनी आय के बावजूद विभाग का ध्यान बावड़ी के रखरखाव पर नहीं है।
बूंदी की ऐतिहासिक रानीजी की बावड़ी का निर्माण वर्ष 1757 में किया गया था। यह 260 फुट लंबी और 40 फुट चौड़ी है, जो अपने कलात्मक स्थापत्य के लिए जानी जाती है। बावड़ी में अलंकृत द्वार, सुंदर तोरण और आकर्षक भित्ति चित्र हैं। इसके दोनों ओर कच्छपावतार, वराहावतार, नरङ्क्षसह व गजेंद्र मोक्ष जैसी पांच-पांच प्रतिमाएं स्थापित हैं। बावड़ी में सौ से अधिक सीढिय़ां हैं, जिनके दोनों तरफ भैरव की स्थानक प्रतिमाएं हैं। प्रवेश द्वार की छतें मेहराबदार हैं, जहां छतरियां बनी हैं। बीस सीढिय़ां उतरने पर एक खुला मंडप आता है, जिस पर तोरण द्वार निर्मित हैं। बावड़ी के बाहर परिसर में गणेश और सरस्वती की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं। यह बावड़ी राजस्थान की अपूर्व जल संरचनाओं में से एक है।
पर्यटन विभाग ने बूंदी में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बावडिय़ों के जीर्णोद्धार के लिए बजट जारी किया। कार्यकारी एजेंसी पुरातत्व विभाग रहा। विभाग ने अभयनाथ बावड़ी, लाइन पुलिस बावड़ी, मालनमासी बावड़ी, अनारकली बावडी, शुक्ल बावड़ी, बोहरा कुंड, मीरागेट बावडी, नाहर धूस बावडी व नागर सागर कुंड का जीर्णोद्धार कराया। यह कार्य बूंदी की ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। कुछ बावडिय़ों में लोहे की जालियां भी लगाई गईं। हालांकि, इस जीर्णोद्धार परियोजना में रानीजी की बावड़ी को शामिल नहीं किया गया। सर्वाधिक राजस्व देने के बावजूद इस बावड़ी की उपेक्षा की गई, जिससे इसकी रेङ्क्षलग व पत्थर दरकने लगे हैं। बारिश के दिनों में यह बावड़ी पूरी तरह जलमग्न हो जाती है, जिससे इसकी स्थिति और खराब हो रही है।
रानीजी की बावड़ी के जीर्णोद्धार के लिए जयपुर व कोटा के उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। जल्द ही बजट जारी करवाकर बावड़ी का जीर्णोद्धार कराया जाएगा।
जगदीश वर्मा, संग्रहालय सहायक, बूंदी