बूंदी

Bundi News : अस्पताल खुद बीमार,कैसे होगा मरीजों का इलाज

नैनवां उपजिला चिकित्सालय चिकित्सकों की कमी से चिकित्सा व्यवस्था बिगड़ी हुई है। सौ बेड के चिकित्सालय के लिए 28 चिकित्सकों के पद स्वीकृत है, जबकि चिकित्सालय में मरीजों के उपचार के लिए तीन ही चिकित्सक है। जिस दिन कोई चिकित्सक आकस्मिक अवकाश या कोर्ट एविडेन्स पर चला जाता है, उस दिन दो ही चिकित्सकों को आउटडोर में छह सौ मरीजों को देखना पड़ रहा है।
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Oct 04, 2026
the hospital itself is ailing; how will patients be treated?
नैनवां. उपजिला चिकित्सालय के आउटडोर के बाहर लगी मरीजों की कतार

नैनवां. नैनवां उपजिला चिकित्सालय चिकित्सकों की कमी से चिकित्सा व्यवस्था बिगड़ी हुई है। सौ बेड के चिकित्सालय के लिए 28 चिकित्सकों के पद स्वीकृत है, जबकि चिकित्सालय में मरीजों के उपचार के लिए तीन ही चिकित्सक है। जिस दिन कोई चिकित्सक आकस्मिक अवकाश या कोर्ट एविडेन्स पर चला जाता है, उस दिन दो ही चिकित्सकों को आउटडोर में छह सौ मरीजों को देखना पड़ रहा है। चिकित्सालय का दर्जा बढ़ा लेकिन सुविधाओं का विस्तार नही हो पाया। उपजिला चिकित्सालय में उपचार की सुविधा के लिए चिकित्सा विभाग ने सर्जरी, अस्थि रोग (ऑर्थोपेडिक), नाक-कान-गला व शिशुरोग, स्त्री रोग विशेषज्ञ के अलग-अलग से ओपीडी कक्ष स्थापित हो रहे है।

विशेषज्ञ चिकित्सकों के अभाव में ओपीडी कक्षों के ताले पड़े है। जिससे उपजिला चिकित्सालय बिना विशेषज्ञ चिकित्सकों का चिकित्सालय बना हुआ है। ट्रॉमा सेंटर में तो कोई चिकित्सक ही नियुक्त नहीं है। जिससे उपजिला चिकित्सालय के साथ ट्रॉमा सेंटर में चिकित्सा व्यवस्थाएं बिगड़ रही है। बूंदी जिला मुख्यालय के बाद जिले में सौ बेड वाले सबसे बड़ा चिकित्सालय है। उपजिला चिकित्सालय बन जाने के बाद भी चिकित्सकों की कमी के चलते चिकित्सालय की व्यवस्था प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जैसी ही बनी हुई है।

उपजिला चिकित्सालय बना तो उम्मीद जगी थी कि अब उपचार के लिए नैनवां क्षेत्र के लोगों को विशेषज्ञ चिकित्सकों की सुविधा मिलना शुरू हो जाएगी। लेकिन चिकित्सा सुविधा में विस्तार की उम्मीद सिर्फ सपना ही बनकर रह गई। चिकित्सालय में वरिष्ठ विशेषज्ञ व कनिष्ठ विशेषज्ञ के 11 पद स्वीकृत है। इनमें से दन्त, शिशुरोग व स्त्री रोग विशेषज्ञ ही नियुक्त है। बाकी सभी विशेषज्ञों के पद रिक्त पड़े है। चिकित्सालय में मेडिसन व सर्जरी के वरिष्ठ विशेषज्ञों, नेत्र, ईएनटी, ऑर्थोपेडिक, रेडियोलॉजिस्ट, दन्त मेडिसन व सर्जरी विशेषज्ञ के पद स्वीकृत है।

ट्रॉमा सेंटर भी खाली पड़ा

दो हाइवे एनएच 148 डी व स्टेट हाइवे 34 पर दुर्घटनाग्रस्त होने वालों के उपचार के स्थापित नैनवां में स्थित ट्रॉमा सेंटर में तो एक भी चिकित्सक नियुक्त नहीं है। ट्रॉमा सेंटर पर चिकित्सकों के 6 पद स्वीकृत है। जिनमें कनिष्ठ विशेषज्ञ सर्जरी का एक पद, चिकित्साधिकारी सर्जरी के दो व ऑर्थोपेडिक के तीन पद स्वीकृत है। इनमें से एक भी चिकित्सक नियुक्त नहीं होने से ट्रॉमा सेंटर चिकित्सक विहीन बना हुआ। विशेषज्ञ चिकित्सक नही होने से घायलों को उपचार नही मिलने से रेफर होना पड़ रहा है।

दो घण्टे बाद दिखाने का नम्बर आता

चिकित्सालय के आउटडोर में प्रतिदिन औसतन 6 सौ मरीज उपचार कराने आ रहे है। आउटडोर में दो चिकित्सकों को इतने मरीज देखने पड़ रहे है। शनिवार को भी ऐसी ही स्थिति बनी होने आउटडोर के बाहर मरीजों की कतारें लगी हुई थी। जिनको चिकित्सकों को दिखाने के लिए दो-दो घण्टे का इंतजार करना पड़ रहा था।

पीएमओ का कहना

उपजिला चिकित्सालय के प्रमुख चिकित्साधिकारी डॉ कृष्णकुमार प्रजापत का कहना है कि चिकित्सालय में अभी चार चिकित्सक है। इनमे से एक महिला चिकित्सक शगुफ्ता बिना अवकाश स्वीकृत कराए अनुपस्थित चल रही है। जिससे मरीजों को देखने के लिए तीन चिकित्सक ही बचे हुए है।

Updated on:
04 Oct 2026 12:07 pm
Published on:
04 Oct 2026 12:07 pm