MP Abuse Free Village: सोशल मीडिया पर वायरल है एमपी का ये गांव, गाली-गलौज देते ही लगता है जुर्माना, एक घंटे तक गांव में लगानी पड़ती है झाड़ू
MP Abuse Free Village: मध्य प्रदेश का एक गांव सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है, इस गांव में गाली देने वाले को पूरे गांव में झाड़ू लगानी पड़ती है। मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिला मुख्यालय से 20 किमी दूर है बोरसर गांव। आबादी महज 6 हजार। गाली मुक्त हुआ यह गांव आज लोगों के लिए प्रेरणा बन गया है।
दरअसल, ग्राम पंचायत बोरसर के सरपंच अंतरसिंह, उपसरपंच विनोद शिंदे सहित अभिनेता अश्विन पाटिल ने गांव को गाली मुक्त (MP Abuse Free Village) बनाने की कसम ली थी। उन्होंने प्रतिज्ञा की थी कि सभी मिलकर प्रयास करते हैं, संस्कर से नवाचार की नींव रखते हैं। बस फिर क्या था गालीबंदी अभियान शुरू किया और सबको बताया कि पूरे गांव में कहीं भी गाली-गलौज करते पाए गए, तो अब खैर नहीं होगी। यही नहीं ग्रामीणों को बता दिया गया था कि यह नियम कुछ लोगों के लिए नहीं बल्कि गांव के हर सदस्य के लिए हैं।
गांव में गाली-गलौज करने वालों के खिलाफ सजा का भी प्रावधान किया गया है। गाली-गलौच करने पर 500 रुपए का जुर्माना लगेगा। इसके साथ-साथ एक घंटे तक गांव में झाड़ू लगाने की सजा (MP Abuse Free Village) भी दी जाएगी। ग्रामीण स्तर पर ये पहल युवाओं को सभ्य और जागरूक बनाने के लिए की गई है। साथ ही उनकी पढ़ाई लिखाई के लिए पुस्तकालय खोला गया है। यहां कर्म, धर्म सहित जनरल नॉलेज और स्कूली पाठ्यक्रम की किताबें आसानी से मिल जाती हैं, ताकि बच्चे में पढ़ाई को लेकर जागरुकता और शौक भी बना रहे।
यही नहीं मध्य प्रदेश के इस गांव में इंटरनेट क्रांति भी लाई गई है। गांव में 4 स्थान ऐसे हैं जहां फ्री वाई-फाई स्थापित किया गया है। इसके बाद गांव इंटरनेट कनेक्शन से जुड़ गया है, हर व्यक्ति फ्री इंटरनेट का लाभ उठा रहा है। यहां हर घर हरियाली अभियान के तहत लोगों को पौधे वितरित किए गए हैं, ताकि गांव को सिर्फ इंटरनेट क्रांति ही नहीं, बल्कि हरित क्रांति से भी जोड़ा जाए। ग्रामीणों का मानना है कि इससे बोरसर गांव का विकास तेज होगा।
बता दें कि यहां युवा अश्विन पाटिल फिल्म नगरी मुंबई में 10 वर्ष बिताने के बाद अपने गांव लौट आए हैं। उन्होंने देखा कि अक्सर बड़े विवाद की वजह छोटी-छोटी गाली-गलौच बनती है। ये एक गलत आदत गांव का माहौल खराब कर रही थी। ऐसे में अश्विन ने ग्राम पंचायत के जिम्मेदारों और बुजुर्गों के साथ बैठक की। इस बैठक में सर्व सहमति से गांव को गाली मुक्त बनाने (MP Abuse Free Village) का फैसला लिया गया। बस फिर क्या था 6 हजार आबादी वाले बोरसर गांव में संस्कार क्रांति का बिगुल बज गया। इसकी निगरानी के लिए 20 पंचों की टीम तैयार की गई है, जो हर वार्ड में निगरानी करते हैं कि कोई गाली-गलौच तो नहीं कर रहे।
''छोटी-छोटी गाली-गलौच यहां बड़े विवाद की वजह बनती हैं। कई बार गांव में इससे दुष्परिणाम देखने को मिलते थे, छोटे-छोटे बच्चों में भी गाली-गलौच की आदत पड़ गई थी। मैंने ग्राम पंचायत के सरपंच अंतरसिंह और उपसरपंच विनोद शिंदे से संपर्क किया, उन्होंने एक बैठक बुलाई, यहां सभी को मौजूदगी में फैसला लिया।''
-अश्विन पाटिल, निवासी बोरसर गांव
वहीं, इस फैसले के बाद ग्राम पंचायत ने एक आदेश जारी किया है। अब गांव में जगह-जगह नोटिस चस्पा किए गए हैं। इन नोटिस पर लिखा है- मध्यप्रदेश का पहला गाली मुक्त गांव (MP Abuse Free Village), ग्राम पंचायत विकसित बोरसर, यहां अपशब्द यानी गाली देने पर -500 का दंड या एक घंटा गांव की सफाई कराई जाएगी।
बोरसर के उपसरपंच विनोद शिंदे बताते हैं कि गांव के विकास के लिए समाजसेवी अश्विन पाटिल ने उन्हें ये सुझाव दिए। युवाओं को फ्री इंटरनेट की सुविधा दी गई है। वहीं ग्रामीणों को पौधे वितरित किए जा रहे है, बच्चों के लिए पुस्तकालय स्थापित किया गया है। जहां आकर वह अपना पढ़ने का शौक पूरा कर सकते हैं।