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Israel Iran War: 800 छोटी भारतीय कंपनियों पर बड़ा संकट, 12000 करोड़ रुपये का निवेश खतरे में, रुक गया कामकाज

Israel Iran War: मिडिल ईस्ट में युद्ध का बड़ा असर भारत की पेट्रोकेमिकल सप्लाई चेन पर देखने को मिल रहा है। 800 छोटी कंपनियों का निवेश जोखिम में है।
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Mar 19, 2026
Israel Iran War
ईरान-इजराइल युद्ध से सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। (PC: AI)

Israel Iran War: पश्चिम एशिया संघर्ष के चलते देश की कम से कम 800 छोटी-मझोली कंपनियों के निवेश पर खतरा मंडरा रहा है। इन कंपनियों ने पिछले छह महीनों में यूएई में 12,000 करोड़ रुपये (1.3 अरब डॉलर) का निवेश किया है। अमरीका-ईरान संघर्ष से रिटेल और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित है, क्योंकि इस सेक्टर की 280 भारतीय कंपनियों ने यूएई में 6 माह में करीब 40 करोड़ डॉलर का निवेश किया है।

जानकारों का कहना है कि खाड़ी देशों में तनाव से भारतीय एसएमई कंपनियां अधिक जोखिम में हैं। ईरान संकट के कारण सीमित आपूर्ति, माल ढुलाई की लागत बढ़ने, आवाजाही में रुकावट और भुगतान के साथ नकदी प्रवाह में आई रुकावट ने परेशानी बढ़ा दी है।

उत्पादन पर पड़ी मार

बढ़ते संघर्ष का असर अब भारत की पेट्रोकेमिकल आपूर्ति श्रृंखला पर गंभीर रूप से दिखने लगा है। इससे पॉलिमर (प्लास्टिक कच्चे माल) की कीमतें रेकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई हैं। प्लास्टिक प्रसंस्करण उद्योग ठप होने की स्थिति में आ गया है। रिपोर्ट के अनुसार, देश में 50% इकाइयों ने उत्पादन बंद कर दिया है। पीपी (पॉलिप्रॉपलीन), हाई डेंसिटी पॉलिएथिलीन (एचडीपीई), लिनियर लो - डेंसिटी पॉलिएथिलीन (एलएलडीपीई), पीवीसी व पीईटी रेजिन जैसे पॉलिमर की कीमतों में 78% तक बढ़ोतरी हुई है। कच्चे माल की उपलब्धता भी घटी है। इससे जो इकाइयां 100 टन प्रति माह उत्पादन करती थीं, अब वह घटकर 20 टन तक रह गया है।

मेवों की कीमतें बढ़ीं

पश्चिम एशिया में जारी तनाव से ड्राई फ्रूट बाजार में कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है। व्यापारियों के मुताबिक, आपूर्ति बाधित होने की वजह से कई ड्राई फ्रूट्स के दाम 20 से 50% तक बढ़ गए हैं। दिल्ली के मशहूर खारी बावली बाजार में व्यापारी पुराने स्टॉक के सहारे काम चला रहे हैं। कारोबारियों ने कहा कि बादाम, अंजीर, पाइन नट्स, खजूर और जड़ी-बूटियों की सप्लाई पूरी तरह रुक गई है। इसके अलावा पश्चिम एशिया से आने वाली कई औषधीय जड़ी-बूटियों की सप्लाई भी प्रभावित हुई है। अगर मौजूदा स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है।

दवा बाजार पर संकट

नैफ्था, स्टाइरीन और पॉलीइथिलीन जैसे प्रमुख कच्चे माल का निर्यात बाधित हो गया है। दवा उद्योग पर भी असर साफ दिख रहा है, क्योंकि दवाओं के एक्टिव कंपाउंड पेट्रोकेमिकल्स से बनते हैं। भारत और चीन जैसे बड़े फार्मा हब इस सप्लाई पर निर्भर हैं।

Published on:
19 Mar 2026 11:45 am