Atal Pension Yojana अब देश की सबसे भरोसेमंद सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में गिनी जा रही है। साल 2015 में शुरू हुई इस योजना से अब तक 8.96 करोड़ लोग जुड़ चुके हैं।
Atal Pension Yojana: बुढ़ापे की सबसे बड़ी चिंता क्या होती है? हर महीने खर्च चलाने के लिए नियमित आमदनी। यही वजह है कि अटल पेंशन योजना अब करोड़ों लोगों के लिए भरोसे का दूसरा नाम बनती जा रही है। छोटी-छोटी बचत से शुरू हुई यह योजना आज देश की सबसे बड़ी गारंटीड पेंशन योजनाओं में शामिल हो चुकी है। अटल पेंशन योजना को आज 9 साल पूरे हो गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 9 मई 2015 को यह योजना लॉन्च की गई थी।
सरकार के मुताबिक, 31 मार्च 2026 तक अटल पेंशन योजना से 8.96 करोड़ लोग जुड़ चुके हैं। सिर्फ वित्त वर्ष 2025-26 में ही 1.35 करोड़ नए लोगों ने इसमें नामांकन कराया। यह अब तक का सबसे बड़ा सालाना आंकड़ा है। इससे साफ है कि लोगों का भरोसा इस योजना पर लगातार बढ़ रहा है।
असल में यह योजना खास तौर पर उन लोगों के लिए लाई गई थी, जिनके पास नौकरी के बाद पेंशन की कोई गारंटी नहीं होती। दिहाड़ी मजदूर, घरेलू कामगार, रेहड़ी-पटरी वाले, छोटे दुकानदार, गिग वर्कर और असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले करोड़ों लोग पहले किसी पेंशन सुरक्षा दायरे में नहीं आते थे। ऐसे लोगों के लिए यह योजना किसी सहारे से कम नहीं मानी जा रही।
18 से 40 साल तक का कोई भी भारतीय, जिसके पास बैंक या पोस्ट ऑफिस खाता है, इसमें शामिल हो सकता है। 60 साल की उम्र के बाद हर महीने 1000 रुपये से लेकर 5000 रुपये तक की गारंटीड पेंशन मिलती है। अगर खाताधारक की मौत हो जाए तो वही पेंशन उसके जीवनसाथी को मिलती रहती है। दोनों के निधन के बाद जमा रकम नॉमिनी को दे दी जाती है।
महिलाओं की भागीदारी ने इस योजना को नई ताकत दी है। वित्त वर्ष 2025-26 में कुल नए नामांकन में महिलाओं की हिस्सेदारी 55 फीसदी से ज्यादा रही। पहली बार महिलाओं की संख्या पुरुषों से आगे निकल गई। इससे यह भी संकेत मिलता है कि अब घरों में महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। सरकार और PFRDA ने योजना को गांव-गांव पहुंचाने के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाए। बैंकों, ग्रामीण बैंकों, पोस्ट ऑफिस, स्वयं सहायता समूहों और किसान संगठनों के जरिए लोगों को जोड़ा गया। रेडियो, टीवी, सोशल मीडिया और क्षेत्रीय भाषाओं में प्रचार से भी इसको फायदा मिला।
डिजिटल सुविधाओं ने भी लोगों का काम आसान किया है। अब e-APY, मोबाइल ऐप, SMS अलर्ट और कॉल सेंटर जैसी सुविधाओं से लोग आसानी से अपनी जानकारी देख सकते हैं। योगदान मासिक, तिमाही या छमाही तरीके से जमा किया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर पेंशन स्लैब भी बदला जा सकता है। योजना में सबसे ज्यादा लोग 1000 रुपये वाली पेंशन श्रेणी चुन रहे हैं। हालांकि 5000 रुपये वाली श्रेणी में भी धीरे-धीरे रुचि बढ़ रही है। इसका मतलब साफ है कि लोग अब भविष्य की आर्थिक सुरक्षा को लेकर पहले से ज्यादा गंभीर हो रहे हैं।
अटल पेंशन योजना का दायरा जितना बढ़ा है, उतना ही इसका फंड भी मजबूत हुआ है। 31 मार्च 2026 तक इस योजना के तहत प्रबंधन वाली कुल संपत्ति 51,416 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है। चार साल में यह रकम दोगुने से ज्यादा हो गई। भारत में बुजुर्गों की आबादी तेजी से बढ़ रही है। आने वाले वर्षों में यह चुनौती और बड़ी होने वाली है। ऐसे समय में अटल पेंशन योजना सिर्फ एक सरकारी स्कीम नहीं, बल्कि करोड़ों परिवारों के लिए भविष्य की सुरक्षा का कवच बनती दिख रही है।