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Explainer: IndiGo और Air India को मिल सकती है नई चुनौती, क्या एयरलाइन बिजनेस में सफल हो पाएंगे Gautam Adani?

Adani Airline: अडानी ग्रुप की संभावित एयरलाइन एंट्री भारतीय एविएशन सेक्टर में नई प्रतिस्पर्धा ला सकती है। हालांकि, समूह के पास पूंजी और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर है, लेकिन विमानों की कमी, कड़े नियम और इंडिगो-एयर इंडिया की मजबूत पकड़ जैसी चुनौतियां उसकी राह आसान नहीं बनने देंगी।
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Jul 23, 2026
Adani Airline
अडानी ग्रुप एयरलाइन बिजनेस शुरू कर सकता है। (PC: AI)

Adani Group Airlines: इंडियन एविएशन मार्केट एक तरफ दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते एयरलाइन बाजारों में गिना जाता है, तो दूसरी तरफ यही बाजार कई एयरलाइंस की कब्रगाह भी बन चुका है। किंगफिशर, जेट एयरवेज, गो फर्स्ट, एयर डेक्कन, एयर कोस्टा और पैरामाउंट एयरवेज जैसी कंपनियां या तो बंद हो गईं या इतिहास बनकर रह गईं। अब इसी मुश्किल कारोबार में अडानी ग्रुप की संभावित एंट्री की चर्चा तेज है। सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि अडानी ग्रुप एयरलाइन शुरू कर पाएगा या नहीं, असली सवाल यह है कि क्या यह ग्रुप इंडिगो और एयर इंडिया की मजबूत पकड़ को चुनौती दे पाएगा?

नियम बदलने की हो रही मांग

ईटी की रिपोर्ट्स के मुताबिक, अडानी ग्रुप ने सरकार से उस नियम में बदलाव की मांग की है, जिसके तहत दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े एयरपोर्ट चलाने वाली कंपनी किसी शेड्यूल्ड एयरलाइन में 10 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी नहीं रख सकती। हालांकि, सरकार या अडानी ग्रुप की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन नियमों में ढील को लेकर चर्चा जारी है।

भारतीय एविएशन को है तीसरे बड़े प्लेयर की जरूरत

इस समय घरेलू एविएशन बाजार में इंडिगो और टाटा ग्रुप की एयरलाइंस का दबदबा है। दोनों मिलकर करीब 90 फीसदी बाजार पर कब्जा रखते हैं। इंडिगो अकेले 60 फीसदी से ज्यादा बाजार हिस्सेदारी रखती है। ऐसे में प्रतिस्पर्धा सीमित हो गई है। पिछले साल इंडिगो के परिचालन में आई दिक्कतों ने यह भी दिखाया कि अगर एक बड़ी एयरलाइन प्रभावित होती है, तो उसका असर पूरे एविएशन सेक्टर पर पड़ता है।

आने वाले वर्षों में भारत में एयरपोर्ट की संख्या और हवाई यात्रियों दोनों के तेजी से बढ़ने का अनुमान है। ऐसे में बाजार में एक और मजबूत प्लेयर आने से प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है और यात्रियों को भी फायदा मिल सकता है।

अडानी की ताकत दूसरे प्लेयर्स से अलग क्यों?

ज्यादातर एयरलाइंस पूंजी की कमी, सीमित नेटवर्क या कमजोर इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण टिक नहीं पाईं। अडानी ग्रुप की स्थिति अलग मानी जा रही है। ग्रुप पहले से देश के आठ एयरपोर्ट संचालित करता है, जिनमें मुंबई एयरपोर्ट भी शामिल है। इसके अलावा ग्राउंड हैंडलिंग, पायलट ट्रेनिंग और विमान मरम्मत जैसी सेवाओं में भी उसकी मौजूदगी है। ब्राजील की कंपनी एम्ब्रेयर के साथ विमान निर्माण की योजना पर भी काम चल रहा है। यानी अगर एयरलाइन शुरू होती है तो उसके साथ पूरा एविएशन इकोसिस्टम भी जुड़ा होगा।

सिर्फ एयरलाइन नहीं, यह है पूरा बिजनेस मॉडल

अगर अडानी एयरलाइन शुरू करते हैं, तो इसका फायदा केवल टिकट बिक्री तक सीमित नहीं रहेगा। एयरपोर्ट पर यात्रियों की संख्या बढ़ेगी, रिटेल और पार्किंग से कमाई होगी, मेंटेनेंस बिजनेस को काम मिलेगा, पायलट ट्रेनिंग सेंटर को नए ग्राहक मिलेंगे और भविष्य में विमान निर्माण परियोजना को भी ऑर्डर मिल सकते हैं। यही वजह है कि एयरलाइन कारोबार सिर्फ अकेला नहीं आएगा, बल्कि पूरे ग्रुप के लिए रणनीतिक निवेश साबित हो सकता है।

पैसा है, लेकिन मुश्किलें भी कम नहीं

एयरलाइन कारोबार में सिर्फ पैसा होना काफी नहीं होता। विमान खरीदना महंगा है, ईंधन की कीमतें लगातार बदलती रहती हैं और मुनाफे का मार्जिन बहुत कम होता है। फिलहाल दुनिया भर में एयरबस और बोइंग के विमानों की डिलीवरी में देरी हो रही है। ऐसे में नई एयरलाइन के लिए समय पर विमान जुटाना सबसे बड़ी चुनौती बन सकता है। अगर पर्याप्त विमान नहीं होंगे, तो मजबूत रूट नेटवर्क तैयार करना मुश्किल होगा। इसका असर यात्रियों और कमाई दोनों पर पड़ेगा।

इंडिगो और एयर इंडिया को टक्कर देना आसान नहीं

कई लोगों को लगता है कि नई एयरलाइन आते ही बाजार में बड़ा बदलाव आ जाएगा, लेकिन पिछले दो दशकों का इतिहास कुछ और कहता है। कई एयरलाइंस आईं, लेकिन बाजार की तस्वीर नहीं बदल सकीं। इंडिगो और एयर इंडिया के पास बड़ा विमान बेड़ा, मजबूत वितरण नेटवर्क, लॉयल्टी प्रोग्राम और स्थापित ग्राहक आधार है। ऐसे में अडानी के लिए शुरुआती लक्ष्य शायद बाजार में तीसरे मजबूत प्लेयर के रूप में अपनी जगह बनाना होगा। पहले कुछ वर्षों में 10 से 15 फीसदी बाजार हिस्सेदारी हासिल करना भी बड़ी उपलब्धि मानी जाएगी।

नियमों पर उठ सकते हैं सवाल

अगर एयरपोर्ट चलाने वाली कंपनी एयरलाइन भी चलाती है, तो हितों के टकराव का सवाल उठ सकता है। दूसरी एयरलाइंस को चिंता है कि एयरपोर्ट स्लॉट के आवंटन में निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक सरकार का मानना है कि सख्त निगरानी, अलग प्रबंधन व्यवस्था और मौजूदा नियमों के जरिए इन चिंताओं को दूर किया जा सकता है। फिर भी यह मुद्दा आगे भी चर्चा का विषय बना रह सकता है।

Updated on:
23 Jul 2026 04:11 pm
Published on:
23 Jul 2026 04:11 pm