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NSE IPO करीब 41% हो चुका है सब्सक्राइब, ग्रे मार्केट में नहीं दिखा कुछ खास मुनाफा, जानिए एक्सपर्ट्स की राय

NSE IPO GMP Today: एनएसई का 22,569 करोड़ रुपये का आईपीओ 17 सितंबर 2026 को खुल गया है। 1,700 से 1,785 रुपये के प्राइस बैंड वाले इस इश्यू का जीएमपी 148 रुपये बताया जा रहा है। अपर बैंड पर अनुमानित लिस्टिंग कीमत 1,933 रुपये बनती है। IPO 21 सितंबर तक खुला रहेगा।
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भारत

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Pawan Jayaswal

Sep 17, 2026

NSE IPO

एनएसई का आईपीओ 41 फीसदी तक सब्सक्राइब हो चुका है। (PC: AI)

NSE IPO Day-1: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के 22,569 करोड़ रुपये के IPO में आज, 17 सितंबर 2026 को सब्सक्रिप्शन का पहला दिन था। पहले दिन यह आईपीओ करीब 41 फीसदी सब्सक्राइब हो चुका है। निवेशक इसमें 21 सितंबर तक बोली लगा सकेंगे। लंबे इंतजार के बाद एनएसई के शेयर बाजार में लिस्ट होने की तैयारी से इस इश्यू पर निवेशकों की नजर बनी हुई है। एनएसई आईपीओ का प्राइस बैंड 1,700 से 1,785 रुपये प्रति शेयर है। एक लॉट में 8 शेयर हैं। यानी अपर प्राइस बैंड पर एक लॉट के लिए निवेशक को कम से कम 14,280 रुपये लगाने होंगे।

ग्रे मार्केट में नहीं दिखा बड़ा मुनाफा

ग्रे मार्केट की बात करें, तो इन्वेस्टर गेन के अनुसार, गुरुवार शाम कंपनी का शेयर ग्रे मार्केट में 148 रुपये के जीएमपी पर ट्रेड करता दिखा। 1785 रुपये के अपर प्राइस बैंड पर शेयर की लिस्टिंग 8.29 फीसदी के प्रीमियम के साथ 1933 रुपये पर हो सकती है। हालांकि, जीएमपी अनौपचारिक बाजार का संकेत होता है। इसे एनएसई शेयर की वास्तविक लिस्टिंग कीमत नहीं माना जा सकता। लिस्टिंग के समय बाजार की स्थिति के हिसाब से भाव अलग हो सकता है।

किन निवेशकों के लिए कितना हिस्सा है रिजर्व?

NSE IPO में QIB यानी योग्य संस्थागत खरीदारों के लिए अधिकतम 50 फीसदी हिस्सा रिजर्व है। NII यानी गैर संस्थागत निवेशकों के लिए कम से कम 15 फीसदी हिस्सा रिजर्व है। रिटेल निवेशकों के लिए कम से कम 35 फीसदी हिस्सा रिजर्व है। आईपीओ में कंपनी की ओर से नए शेयर जारी नहीं किए जा रहे हैं। पूरा इश्यू ऑफर फॉर सेल यानी OFS है। इस आईपीओ में अधिकतम 12.64 करोड़ इक्विटी शेयर ऑफर फॉर सेल के जरिए बेचे जा रहे हैं। हर शेयर की फेस वैल्यू 1 रुपये है। यानी आईपीओ से मिलने वाला पैसा एनएसई के कारोबार में सीधे नया पूंजी निवेश करने के लिए नहीं आएगा, क्योंकि इसमें फ्रेश इश्यू शामिल नहीं है।

NSE IPO पर क्या है एक्सपर्ट की राय

129 वेल्थ के फंड मैनेजर और Paul Asset के हेड ऑफ रिसर्च प्रसनजीत पॉल के मुताबिक, एनएसई मजबूत फंडामेंटल्स और अच्छी नकदी पैदा करने वाला कारोबार है। उनका कहना है कि कंपनी के पास अपने क्षेत्र में मजबूत प्रतिस्पर्धी बढ़त भी है। हालांकि, उन्होंने निवेशकों को एनएसई के शेयर के लिए चुकाई जाने वाली कीमत पर नजर रखने की बात कही है। 1,785 रुपये के अपर प्राइस बैंड पर एनएसई का वैल्यूएशन FY26 की कमाई का करीब 43 गुना बैठता है। पॉल के मुताबिक यह वैल्यूएशन उचित हो सकता है, लेकिन इसे सस्ता नहीं कहा जा सकता।

उनके मुताबिक आगे कंपनी की ग्रोथ सिर्फ बाजार हिस्सेदारी बढ़ने पर निर्भर नहीं होगी। कैपिटल मार्केट में ज्यादा भागीदारी, कैश मार्केट में बढ़ता कारोबार, नए प्रोडक्ट, डेटा और इंडेक्स तथा गिफ्ट सिटी से मिलने वाले अवसर भी ग्रोथ के रास्ते खोल सकते हैं।

NSE के लिए सबसे बड़ा जोखिम क्या है?

पॉल के मुताबिक एनएसई के लिए डेरिवेटिव कारोबार पर निर्भरता एक अहम जोखिम है। खासकर ऑप्शंस से मिलने वाली ट्रांजैक्शन फीस कंपनी के रेवेन्यू में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। लिस्टिंग के बाद निवेशकों को सिर्फ कुल कारोबार यानी टर्नओवर देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। कमाई में बढ़ोतरी, कैश मार्केट का वॉल्यूम, ऑप्शंस गतिविधि और लगातार होने वाला मुनाफा जैसे आंकड़े भी अहम रहेंगे।

च्वाइस इक्विटी ब्रोकिंग ने एनएसई के तेजी से बढ़ रहे एक कारोबारी सेगमेंट में आई कमजोरी को चिंता का विषय बताया है। हालांकि, ब्रोकरेज के मुताबिक यह समस्या एनएसई के पूरे कारोबार के बजाय एक हिस्से तक सीमित है। ब्रोकरेज ने यह भी कहा कि Q1FY27 में एनएसई के रेवेन्यू और मुनाफे में बढ़ोतरी जारी रही। FY26 के मुनाफे पर एक सेटलमेंट चार्ज का असर पड़ा था, जिसका भुगतान अब किया जा चुका है। ब्रोकरेज के मुताबिक एनएसई के पैमाने की भारतीय मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी में निवेश का दूसरा सीधा विकल्प नहीं है। साथ ही ब्रोकरेज ने यह भी माना कि पहली बार लिस्ट होने वाली कंपनी का वैल्यूएशन आमतौर पर सस्ता नहीं होता।

(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी मात्र है। यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर मार्केट/म्यूचुअल फंड में निवेश जोखिम भरा होता है। कहीं भी पैसा लगाने से पहले अपने निवेश सलाहकार से परामर्श लें।)