India EU Trade Deal: भारतीय निर्यातकों को अब ईयू में होने वाले एक्सपोर्ट पर 3 फीसदी अधिक ड्यूटी भरनी होगी। इससे ज्वैलरी, हैंडीक्राफ्ट्स, टेक्सटाइल्स, मार्बल, गारमेंट्स, इंजीनियरिंग गुड्स इंडस्ट्री प्रभावित होगी।
India EU Trade Deal: यूरोपियन यूनियन (EU) के साथ आगामी मंगलवार को संभावित ट्रेड डील से पहले ही भारत को एक और बड़ा झटका लगा है। ईयू ने भारत से आयात होने वाले सभी उत्पादों पर दी जा रही जीएसपी (जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रिफरेंसेज) सुविधा को आगामी तीन वर्षों के लिए समाप्त कर दिया है। इस फैसले से अमरीकी टैरिफ के बाद राजस्थान के निर्यातकों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
जीएसपी वह व्यवस्था है, जिसके तहत विकसित देश विकासशील देशों से आयातित वस्तुओं पर आयात शुल्क में रियायत देते हैं। ईयू ने अब 1 जनवरी 2026 से 31 दिसंबर 2028 तक भारत के लिए सभी उत्पादों पर यह सुविधा पूरी तरह खत्म करने का निर्णय लिया है। इसके चलते भारतीय निर्यातकों को ईयू के 27 देशों में अपने माल पर एक से 3 फीसदी तक अतिरिक्त टैरिफ अथवा इंपोर्ट ड्यूटी चुकानी पड़ेगी।
राजस्थान से ईयू को निर्यात होने वाले माल में ज्वैलरी, हैंडीक्राफ्ट्स, टेक्सटाइल्स, मार्बल, गारमेंट्स, इंजीनियरिंग गुड्स प्रमुख हैं। अब इन सभी पर ईयू के 27 देशों में तीन प्रतिशत तक ड्यूटी चुकानी पड़ेगी।
अमेरिकी टैरिफ के बाद राजस्थान के निर्यातकों को ईयू के बाजार से ही बड़ी आस थी और वे इन बाजारों में अपनी सहभागिता बढ़ाने पर काम कर रहे थे, लेकिन अब जीएसपी सुविधा खत्म होने से राह कठिन हो गई है।
राजस्थान हैंडीक्राफ्ट्स एक्सपोर्टर्स जॉइंट फोरम के कोऑर्डिनेटर नवनीत झालानी ने बताया कि ईयू में टैरिफ बढ़ने की खबर राजस्थान के निर्यातकों के लिए एक और बुरे सपने की तरह आई है। जोधपुर और जयपुर के हैंडीक्राफ्ट्स उद्योग तथा जयपुर का रेडीमेड गारमेंट्स उद्योग श्रम प्रधान उद्योगों में गिने जाते हैं। इनमें दस लाख से अधिक श्रमिक और कर्मचारियों को प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रोजगार मिलता है। ईयू के साथ ट्रेड डील इस वर्ष के अंत तक ही प्रभावी हो पाएगी। इंडस्ट्री की मांग है कि तब तक सरकार द्वारा एक्सपोर्ट किए जाने वाले माल पर तीन प्रतिशत अतिरिक्त इनसेंटिव दिया जाना चाहिए।