
Bank of Baroda ने जून तिमाही (Q1 FY27) के नतीजे जारी कर दिए हैं। बैंक को सबसे बड़ा झटका मुनाफे में लगा है। बैंक का शुद्ध लाभ पिछले साल की समान तिमाही की तुलना में करीब 72 फीसदी गिर गया। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि बैंक का मुख्य कारोबार कमजोर हुआ है। दरअसल, एक बड़े कानूनी विवाद के निपटारे के लिए किए गए एकमुश्त भुगतान का असर सीधे मुनाफे पर पड़ा है। बैंक का ब्याज से होने वाला कारोबार लगातार बढ़ा है, लेकिन असाधारण खर्च ने पूरे तिमाही नतीजों की तस्वीर बदल दी।
जून 2026 तिमाही में बैंक ऑफ बड़ौदा का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट घटकर 1,278 करोड़ रुपये रह गया। पिछले साल इसी तिमाही में बैंक ने 4,541 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था। यानी सालाना आधार पर मुनाफे में 71.9 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई।
मुनाफे में आई बड़ी गिरावट की वजह बैंक का 5,680.23 करोड़ रुपये का एकमुश्त खर्च रहा। यह राशि यूएई की हेल्थकेयर कंपनी NMC Health से जुड़े लंबे कानूनी विवाद को खत्म करने के लिए चुकाई गई। जुलाई 2026 में बैंक ऑफ बड़ौदा ने अदालत के बाहर समझौता करते हुए 600 मिलियन डॉलर के भुगतान पर सहमति दी थी। इसी का असर इस तिमाही के नतीजों में दिखाई दिया।
भले ही मुनाफा घटा हो, लेकिन बैंक का मुख्य कारोबार मजबूत बना रहा। कुल ब्याज आय बढ़कर 33,211 करोड़ रुपये हो गई, जो पिछले साल की समान तिमाही में 31,091 करोड़ रुपये थी। यानी इसमें 6.8 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई। वहीं, नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) 9.5 फीसदी बढ़कर 12,526 करोड़ रुपये पर पहुंच गई। पिछले साल यह 11,435 करोड़ रुपये थी। हालांकि, ऑपरेटिंग प्रॉफिट में मामूली गिरावट रही। यह 8,236 करोड़ रुपये से घटकर 8,127 करोड़ रुपये रह गया।
एसेट क्वालिटी के मोर्चे पर बैंक को थोड़ा दबाव झेलना पड़ा। मार्च तिमाही में बैंक का ग्रॉस एनपीए (GNPA) 1.89 फीसदी था, जो जून तिमाही में बढ़कर 1.99 फीसदी हो गया। इसी तरह नेट एनपीए (NNPA) भी 0.45 फीसदी से बढ़कर 0.50 फीसदी पर पहुंच गया। इससे साफ है कि खराब कर्ज का अनुपात पहले के मुकाबले थोड़ा बढ़ा है।
बैंक ऑफ बड़ौदा ने इस तिमाही के नतीजों के साथ किसी डिविडेंड का ऐलान नहीं किया। ऐसे में निवेशकों की नजर अब बैंक प्रबंधन की भविष्य की रणनीति, मार्जिन, लोन ग्रोथ और एसेट क्वालिटी पर रहेगी।
बैंक ने अपने अंतरराष्ट्रीय कारोबार को मजबूत करने के लिए विदेशों से फंड जुटाने की सीमा भी बढ़ा दी है। बोर्ड ने विभिन्न लोन सुविधाओं के जरिए विदेशी उधारी की अधिकतम सीमा 5 अरब डॉलर से बढ़ाकर 10 अरब डॉलर करने को मंजूरी दी है। यह फैसला 24 जुलाई 2026 को हुई बोर्ड बैठक में लिया गया।