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क्या आप भी दे रहे हैं मिनिमम बैलेंस चार्ज? बैंकों ने झटके 11,000 करोड़ रुपये

लोकसभा याचिका समिति ने खुलासा किया कि पांच साल में बैंकों ने मिनिमम बैलेंस जुर्माने से 11,000 करोड़ रुपये वसूले। समिति ने इस नियम को खत्म करने, पारदर्शिता बढ़ाने और शिकायत निपटान सिस्टम मजबूत करने की सिफारिश की है।
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Feb 13, 2026
bank minimum balance charges
प्रतीकात्मक तस्वीर (PC: AI)

देश में बैंकिंग सेवाओं को लेकर पारदर्शिता और उपभोक्ता अधिकारों पर बहस तेज हो गई है। बचत खातों में मिनिमम बैलेंस न रखने पर लगाए जाने वाले जुर्माने को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। अब लोकसभा की याचिका समिति ने बड़ा खुलासा करते हुए बताया है कि पिछले पांच साल में बैंकों ने ग्राहकों से 11,000 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली की है। समिति ने इस नियम को खत्म करने की सिफारिश की है।

कितनी वसूली कर रहे बैंक?

रिपोर्ट के अनुसार सरकारी और निजी बैंकों ने बचत खातों में न्यूनतम राशि नहीं रखने पर भारी जुर्माना वसूला। सरकारी बैंकों ने पिछले पांच सालों में ग्राहकों से करीब 8,600 करोड़ रुपये वसूले, जबकि निजी बैंकों ने केवल एक साल 2024-25 में 2,772 करोड़ रुपये वसूल लिए। आंकड़े बताते हैं कि साल दर साल यह राशि बढ़ती रही। 2020-21 में 1,148.71 करोड़, 2021-22 में 1,415.65 करोड़, 2022-23 में 1,785.90 करोड़, 2023-24 में 2,225.10 करोड़ और 2024-25 में 2,045.74 करोड़ रुपये की वसूली दर्ज की गई।

याचिका समिति ने की ये सिफारिशें

लोकसभा की याचिका समिति ने इस वसूली को आम खाताधारकों पर अतिरिक्त बोझ बताया है। समिति ने वित्त मंत्रालय और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) को सिफारिश की है कि निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के लिए समान नीति लागू की जाए और नियमित बचत खातों में मिनिमम बैलेंस नहीं रखने पर जुर्माना खत्म किया जाए। साथ ही जो ग्राहक मिनिमम बैलेंस बनाए रखते हैं उन्हें रिवॉर्ड पॉइंट, शुल्क माफी और बेहतर ब्याज दर जैसे प्रोत्साहन देने की सलाह दी गई है। इससे लोग स्वेच्छा से बैलेंस बनाए रखेंगे। बैंक शाखाओं, मोबाइल एप और सूचना पटों पर सभी शुल्कों की स्पष्ट जानकारी देने पर भी जोर दिया गया है।

शिकायत सिस्टम और पारदर्शिता पर जोर

समिति ने बैंकिंग सिस्टम में शिकायत निपटारे को मजबूत करने की जरूरत बताई है। सुझाव दिया गया है कि ग्राहकों की शिकायतों का निपटारा आदर्श रूप से 3 कार्यदिवस में और अधिकतम 7 दिन में किया जाए। एसएमएस और फोन जैसे माध्यमों से शिकायत दर्ज कराने की सुविधा उपलब्ध हो। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि राजस्थान में पांच साल में 440 करोड़ और मध्यप्रदेश में 427 करोड़ रुपये की वसूली हुई। निजी बैंकों के पुराने आंकड़े उपलब्ध नहीं होने की बात भी सामने आई, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं।

Updated on:
13 Feb 2026 03:28 pm
Published on:
13 Feb 2026 03:28 pm