
दिवाली पर सोना-चांदी खरीदना शुभ माना जाता है। लोग लक्ष्मी पूजा के लिए सोने-चांदी की लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां भी घर लाते हैं। बाजार में चांदी की मूर्तियों से लेकर 22 कैरेट सोने की मूर्तियों तक कई विकल्प मौजूद हैं। लेकिन क्या गहनों की तरह इन मूर्तियों पर भी हॉलमार्क होना जरूरी है? अगर आप इस दिवाली सोने या चांदी की मूर्ति खरीदने की तैयारी कर रहे हैं, तो इससे जुड़े नियम और कुछ जरूरी बातें जान लेना आपके लिए फायदेमंद होगा।
भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) की 1 अक्टूबर को जारी ताजा जानकारी के मुताबिक, देश के 256 जिलों में 23 जून 2021 से सोने के गहनों और कलाकृतियों की हॉलमार्किंग अनिवार्य की गई थी। बाद में इसका दायरा बढ़ाकर 392 जिलों तक कर दिया गया। सोने की हॉलमार्किंग व्यवस्था में सात शुद्धता स्तर शामिल हैं। इनमें 9 कैरेट (375), 14 कैरेट (585), 18 कैरेट (750), 20 कैरेट (833), 22 कैरेट (916), 23 कैरेट (958) और 24KS (995) सोना शामिल है। हालांकि, कुछ कैटेगरीज को तय शर्तों के साथ हॉलमार्किंग से छूट दी गई है। इनमें 2 ग्राम से कम वजन वाले सोने के सामान और कुंदन, पोल्की व जड़ाऊ के कुछ खास आभूषण शामिल हैं।
चांदी के मामले में हॉलमार्किंग अभी स्वैच्छिक है। यानी चांदी की मूर्ति खरीदते समय हॉलमार्क होना अनिवार्य नहीं है। हालांकि, BIS की संशोधित IS 2112:2025 व्यवस्था के तहत 1 सितंबर 2025 से हॉलमार्क वाली चांदी की वस्तुओं पर 6 अंकों का HUID कोड होना जरूरी है। इस व्यवस्था में चांदी की शुद्धता के आठ स्तर तय किए गए हैं। इनमें 800, 835, 900, 925, 958, 970, 990 और 999 शामिल हैं।
अगर आप हॉलमार्क वाली लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति खरीद रहे हैं, तो उस पर तीन चीजें जरूर जांचें।
BIS का निशान: सोने की मूर्ति पर BIS का आधिकारिक लोगो होना चाहिए। चांदी की वस्तु पर BIS के निशान के साथ 'SILVER' भी लिखा होता है।
शुद्धता का निशान: इससे पता चलता है कि मूर्ति में कितनी शुद्धता वाला सोना या चांदी इस्तेमाल किया गया है। उदाहरण के लिए, 22K916 का मतलब 22 कैरेट सोना है, जबकि 925 का मतलब 92.5 फीसदी शुद्धता वाली चांदी है।
HUID कोड: हॉलमार्क वाली हर वस्तु को एक अलग छह अंकों का अल्फान्यूमेरिक कोड दिया जाता है। इस कोड के जरिए उसकी हॉलमार्किंग से जुड़ी जानकारी जांची जा सकती है।
हॉलमार्क वाली मूर्ति की शुद्धता और उससे जुड़ी जानकारी की पुष्टि करने के लिए BIS Care ऐप इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए सबसे पहले मोबाइल में ऐप डाउनलोड करें। ऐप खोलने के बाद होम स्क्रीन पर 'Verify HUID' विकल्प चुनें। अब मूर्ति पर दर्ज छह अंकों का कोड डालकर सबमिट कर दें। इसके बाद ऐप पर उस वस्तु की दर्ज शुद्धता, सामान का विवरण, ज्वेलर की जानकारी और जांच एवं हॉलमार्किंग केंद्र का ब्योरा दिखाई देगा। इससे आप खरीदारी पूरी करने से पहले हॉलमार्क से जुड़ी जानकारी की पुष्टि कर सकते हैं।
सोना-चांदी असली है या सिर्फ परत चढ़ी है?
सबसे पहले दुकानदार से साफ पूछें कि मूर्ति पूरी तरह सोने या चांदी की बनी है या फिर चांदी पर सोने की परत चढ़ाई गई है। दोनों की कीमत में बड़ा अंतर होता है। सोने की परत चढ़ी चांदी की मूर्ति को ठोस सोने की मूर्ति की कीमत पर नहीं खरीदना चाहिए।
मूर्ति का वजन जरूर जांचें
मूर्ति का कुल वजन ही नहीं, बल्कि उसमें इस्तेमाल की गई असली सोने या चांदी की मात्रा यानी नेट मेटल वेट भी पूछें। यह भी पता करें कि मूर्ति ठोस है या अंदर से खोखली है। इससे आपको उसकी सही कीमत समझने में मदद मिलेगी।
मूर्ति की बनावट और बारीकियां देखें
लक्ष्मी और गणेश की मूर्तियों के चेहरे, आंखों, सूंड, मुकुट और दूसरी बारीकियों को ध्यान से देखें। मूर्ति की बनावट साफ और अच्छी होनी चाहिए।
फिनिशिंग और टूट-फूट की जांच करें
मूर्ति की सतह चिकनी होनी चाहिए। कहीं से टूटी, चटकी या क्षतिग्रस्त नहीं होनी चाहिए। खासतौर पर अगर आप इसे दिवाली की पूजा के लिए खरीद रहे हैं, तो मूर्ति की पूरी तरह जांच कर लें।
मेकिंग चार्ज और टैक्स का हिसाब समझें
दुकानदार से सोने या चांदी की कीमत, मेकिंग चार्ज और लागू टैक्स का अलग-अलग ब्योरा मांगें। इससे यह समझना आसान होगा कि आप किस मद में कितना भुगतान कर रहे हैं।
वापसी और एक्सचेंज की शर्तें पूछें
मूर्ति खरीदने से पहले ज्वेलर की बायबैक और एक्सचेंज पॉलिसी जरूर समझ लें। यह भी पूछें कि वापस बेचने या बदलने पर कितनी कटौती की जाएगी। खरीदारी के समय इन शर्तों की जानकारी होने से बाद में परेशानी नहीं होगी।