
EPFO New Rules: केंद्र सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। इन बदलावों से करीब 8 करोड़ लोग प्रभावित होंगे। नए नियमों के तहत अब पीएफ में 1800 रुपये महीने से अधिक का योगदान स्वैच्छिक होगा। यानी कंपनियां अपनी मर्जी से कर्मचारी की सैलरी से अधिक पैसा पीएफ के लिए नहीं काट सकेंगी। साथ ही वैधानिक वेतन सीमा यानी 15,000 रुपये तक की बेसिक सैलरी पर 12 फीसदी पीएफ योगदान देना सभी कर्मचारियों के लिए अनिवार्य होगा। इससे ज्यादा वेतन पर पीएफ में अतिरिक्त पैसा जमा करना पूरी तरह कर्मचारी की इच्छा पर निर्भर करेगा।
सरकार का कहना है कि इन बदलावों का मकसद कर्मचारियों को रिटायरमेंट सेविंग्स में ज्यादा आजादी देना और पीएफ सिस्टम को पहले से ज्यादा आसान बनाना है। इस नए नियम से अब कर्मचारियों के हाथों में अधिक पैसा आ सकता है।
नई EPF स्कीम 2026 के मुताबिक, कर्मचारी और कंपनी दोनों को 15,000 रुपये की वैधानिक वेतन सीमा तक 12-12 फीसदी योगदान देना होगा। इसका मतलब यह है कि अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 1 लाख रुपये भी है, तब भी अनिवार्य पीएफ योगदान 15,000 रुपये के आधार पर ही होगा। 15 हजार रुपये का 12 फीसदी 1800 रुपये होता है। यानी कर्मचारी के खाते से 1,800 रुपये कटेंगे और कंपनी भी उतनी ही राशि जमा करेगी। हालांकि, अगर कर्मचारी चाहे तो वह अपनी बाकी सैलरी से अतिरिक्त रकम भी पीएफ में जमा करा सकता है। इसे स्वैच्छिक योगदान माना जाएगा।
नए नियमों के अनुसार, अगर कोई कर्मचारी चाहे, तो वह पीएफ में 1800 रुपये से अधिक रकम का भी योगदान कर सकता है। कंपनी चाहे तो इस अतिरिक्त रकम में अपनी ओर से भी योगदान दे सकती है, लेकिन उसके लिए ऐसा करना जरूरी नहीं होगा। अच्छी बात यह है कि कर्मचारी और कंपनी दोनों किसी भी समय इस अतिरिक्त योगदान को कम या बंद भी कर सकते हैं।
EPFO ने निकासी के नियमों को भी काफी आसान बना दिया है। पहले एडवांस निकासी के लिए 13 अलग-अलग कैटेगरीज थीं। अब इन्हें घटाकर सिर्फ तीन कैटेगरीज में समेट दिया गया है। इनमें पहली कैटेगरी जरूरी जरूरतों की है, जिसमें बीमारी, पढ़ाई और शादी जैसे खर्च शामिल हैं। दूसरी कैटेगरी मकान से जुड़ी जरूरतों के लिए है। तीसरी कैटेगरी विशेष परिस्थितियों के लिए रखी गई है। इसके अलावा अब सदस्य अपने पात्र पीएफ बैलेंस का 100 फीसदी तक एडवांस निकाल सकेंगे। हालांकि, खाते में कुल योगदान का कम से कम 25 फीसदी हिस्सा हमेशा बनाए रखना होगा।
सरकार ने साफ किया है कि सदस्यता के नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। जो कर्मचारी पहले से EPFO के सदस्य हैं, वे नए नियम लागू होने के बाद भी बिना किसी रुकावट के सदस्य बने रहेंगे।
नई योजना में कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के लिए भी नियम स्पष्ट किए गए हैं। अगर किसी ठेकेदार का EPFO में अलग से रजिस्ट्रेशन नहीं है, तो ऐसे कर्मचारियों के पीएफ का पूरा जिम्मा मुख्य नियोक्ता का होगा। अगर ठेकेदार पीएफ जमा भी कर रहा हो, तब भी अंतिम जिम्मेदारी मुख्य नियोक्ता की ही मानी जाएगी।
नए नियमों के तहत सभी कंपनियों को EPFO के सामने तय समय में जरूरी जानकारी जमा करनी होगी। योजना लागू होने के 15 दिनों के भीतर हर नियोक्ता को Form V के जरिए सभी कर्मचारियों का विवरण देना होगा। इस फॉर्म में कर्मचारी का आधार नंबर, पैन, यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN), कुल वेतन और EPF वेतन जैसी जानकारी देना अनिवार्य होगा। इसके अलावा मासिक और विशेष परिस्थितियों में भी अलग-अलग अनुपालन पूरे करने होंगे।