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Gold जूलरी, गोल्ड ETF, FOF और SGB बेचने पर कितना लगता है टैक्स? जानिए नियम

Gold Investment Tax: सोने में निवेश से होने वाले मुनाफे पर टैक्स निवेश विकल्प और होल्डिंग अवधि पर निर्भर करता है। फिजिकल गोल्ड, गोल्ड ETF, म्यूचुअल फंड और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में टैक्स के नियम अलग हैं।
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Updated: 31 Oct 2026, 3:20 PM IST
Gold Tax Rules 2026
सोना बेचने पर लगने वाला टैक्स होल्डिंग पीरियड पर निर्भर करता है। (PC: AI)

धनतेरस और दिवाली पर सोना खरीदना भारतीय परिवारों की पुरानी परंपरा है। कोई गहने खरीदता है, तो कोई सिक्के या गोल्ड बार में पैसा लगाता है। अब निवेश के लिए गोल्ड ETF, गोल्ड म्यूचुअल फंड और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड जैसे विकल्प भी मौजूद हैं। लेकिन सोने में निवेश से कमाई होने पर टैक्स के नियम भी समझना जरूरी है। सोना बेचने पर कितना टैक्स लगेगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपने किस तरह का गोल्ड निवेश खरीदा है और उसे कितने समय तक अपने पास रखा है।

फिजिकल गोल्ड, गोल्ड ETF, गोल्ड फंड और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के लिए होल्डिंग पीरियड और टैक्स की व्यवस्था अलग-अलग है। इसलिए अगर आप धनतेरस या दिवाली पर सोना खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो निवेश से पहले इन नियमों को जान लेना फायदेमंद होगा।

सोने के जेवर बेचने पर कितना टैक्स लगता है?

फिजिकल गोल्ड यानी सोने के गहने, सिक्के और बार बेचने से होने वाले मुनाफे पर कैपिटल गेन टैक्स लग सकता है। टैक्स की दर इस बात से तय होती है कि आपने सोना कितने समय तक अपने पास रखा है। टैक्स एवं निवेश सलाहकार बलवंत जैन के अनुसार, फिजिकल गोल्ड पर मुनाफे की गणना करते समय होल्डिंग पीरियड का ध्यान रखना जरूरी है। अगर आपने 24 महीने या उससे कम समय तक सोना अपने पास रखा है, तो वह शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) के तहत आएगा। इस पर निवेशक के लिए लागू इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लगता है।

24 महीने से ज्यादा समय तक सोना अपने पास रखने से होने वाले मुनाफे को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) माना जाता है। इस पर 12.5% टैक्स लगता है। इसके अलावा लागू सरचार्ज और सेस भी देना पड़ सकता है। इस कैलकुलेशन में इंडेक्सेशन का लाभ नहीं मिलता है।

सोने के गहने खरीदने पर कितना GST लगता है?

सोने के गहने खरीदते समय भी टैक्स देना पड़ता है। गोल्ड जूलरी, कॉइन या बिस्कुट खरीदते समय मूल कीमत पर 3% GST लगता है। वहीं, मेकिंग चार्ज पर अलग से 5 फीसदी जीएसटी लगाया जाता है। अगर कोई व्यक्ति अपने पुराने निजी गहने किसी ज्वेलर को बेचता है, तो आम तौर पर उस बिक्री पर जीएसटी नहीं लगता है। इसकी वजह यह है कि व्यक्ति अपने निजी इस्तेमाल का सोना बेच रहा होता है, न कि कारोबार के तहत सामान की बिक्री कर रहा होता है।

गोल्ड ETF बेचने पर कितना टैक्स देना होगा?

गोल्ड ईटीएफ के जरिए निवेशक शेयर बाजार में सोने की कीमतों से जुड़े निवेश का विकल्प चुन सकते हैं। इनकी यूनिट्स स्टॉक एक्सचेंज पर खरीदी और बेची जाती हैं। टैक्स के मामले में गोल्ड ETF की होल्डिंग अवधि फिजिकल गोल्ड से अलग है। यहां 12 महीने या उससे कम समय तक निवेश में हुए मुनाफे को शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन माना जाता है और निवेशक की टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है। 12 महीने से ज्यादा समय तक के निवेश में मुनाफा लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन माना जाता है। इस पर 12.5% टैक्स के साथ लागू सरचार्ज और सेस देना पड़ सकता है। यहां इंडेक्सेशन का लाभ नहीं मिलता।

गोल्ड म्यूचुअल फंड में निवेश पर टैक्स के नियम

गोल्ड म्यूचुअल फंड या फंड ऑफ फंड्स (FoF) भी सोने में निवेश का एक तरीका है। हालांकि, यह गोल्ड ईटीएफ से अलग होता है। गोल्ड म्यूचुअल फंड आम तौर पर गोल्ड ईटीएफ की यूनिट्स में निवेश करते हैं और उनकी यूनिट्स गोल्ड ईटीएफ की तरह सीधे स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टेड नहीं होतीं। गोल्ड म्यूचुअल फंड से होने वाले मुनाफे पर टैक्स उसकी होल्डिंग अवधि के आधार पर तय होता है। 24 महीने या उससे कम समय तक के निवेश में हुए मुनाफे पर निवेशक की लागू टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लगता है। 24 महीने से ज्यादा समय तक के निवेश में हुआ मुनाफा लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन माना जाता है। इस पर 12.5% टैक्स के साथ लागू सरचार्ज और सेस देना पड़ सकता है। यहां इंडेक्सेशन का लाभ नहीं मिलता।

इस तरह गोल्ड ETF और गोल्ड म्यूचुअल फंड के बीच एक बड़ा अंतर है। गोल्ड ETF में 12 महीने से ज्यादा समय तक निवेश रखने पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन के नियम लागू हो सकते हैं, जबकि गोल्ड म्यूचुअल फंड में इसके लिए 24 महीने से ज्यादा की अवधि जरूरी है।

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड पर कितना टैक्स लगता है?

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड सरकार की ओर से जारी किए जाने वाले सोने से जुड़े निवेश विकल्प हैं। इन पर मिलने वाला ब्याज और बॉन्ड बेचने या भुनाने से होने वाला मुनाफा, दोनों अलग-अलग तरह से टैक्स के दायरे में आते हैं। 1 अप्रैल 2026 से सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड पर मैच्योरिटी के समय मिलने वाले कैपिटल गेन टैक्स छूट के नियम सीमित कर दिए गए हैं।

अगर किसी व्यक्ति ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड को सरकार की ओर से पहली बार जारी किए जाने के समय खरीदा था और उसे मैच्योरिटी तक अपने पास रखा, तो वह मैच्योरिटी पर बॉन्ड भुनाने से होने वाले मुनाफे पर कैपिटल गेन टैक्स छूट का लाभ ले सकता है। हालांकि, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड पर मिलने वाला ब्याज निवेशक की लागू इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स के दायरे में आता है।

सेकेंडरी मार्केट से खरीदे गए गोल्ड बॉन्ड पर टैक्स

अगर आपने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड को सरकार से सीधे खरीदने के बजाय किसी दूसरे निवेशक से स्टॉक एक्सचेंज या सेकेंडरी मार्केट में खरीदा है, तो केवल मैच्योरिटी तक रखने से आपको कैपिटल गेन टैक्स छूट नहीं मिलती। ऐसे बॉन्ड पर मुनाफे की टैक्स देनदारी होल्डिंग अवधि के आधार पर तय होती है। 12 महीने या उससे कम समय तक रखने पर मुनाफे पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन के नियम लागू होते हैं और टैक्स निवेशक की लागू स्लैब के अनुसार लगता है। 12 महीने से ज्यादा समय तक रखने पर मुनाफे पर 12.5% लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स के साथ लागू सरचार्ज और सेस देना पड़ सकता है। यहां इंडेक्सेशन का लाभ नहीं मिलता। इन बॉन्ड पर मिलने वाला ब्याज भी अलग से टैक्स के दायरे में रहता है।

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31 Oct 2026, 3:20 PM IST
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