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Crude Oil अक्टूबर में 15% हुआ महंगा, क्या 120 डॉलर तक पहुंचेंगे दाम, जानिए ऑयल मार्केट का हाल

Brent Crude Price: ईरान युद्ध बढ़ने की आशंका और मिडिल ईस्ट में तेल की सप्लाई बाधित होने के खतरे से कच्चे तेल की कीमतें काफी बढ़ गई हैं। गोल्डमैन सैश के मुताबिक, हमले बढ़ने पर भाव 120 डॉलर तक जा सकता है।
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भारत

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Pawan Jayaswal

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Updated: 31 Oct 2026, 5:54 PM IST

Crude Oil Price Today

क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी आई है। (PC: AI)

मिडिल ईस्ट में युद्ध बढ़ने की आशंका ने एक बार फिर कच्चे तेल की कीमतों को हवा दे दी है। अमेरिका में मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान पर नए हमले होने की आशंका और तेल की सप्लाई बाधित होने के डर से शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 2% से ज्यादा चढ़ गया। ब्रेंट क्रूड की कीमत छह महीने के ऊंचे स्तर पर पहुंच गई। बाजार की चिंता सिर्फ युद्ध तक सीमित नहीं है। होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की सुरक्षा पर भी सवाल बने हुए हैं। इस रास्ते से दुनिया के बड़े हिस्से में कच्चे तेल की सप्लाई होती है। यहां तनाव बढ़ने का सीधा असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ सकता है।

क्रूड ऑयल में भारी तेजी

शुक्रवार को दिसंबर डिलीवरी वाला ब्रेंट क्रूड फ्यूचर 2.76 डॉलर यानी 2.4% बढ़कर 117.64 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ था। कारोबार के दौरान इसकी कीमत 118 डॉलर तक पहुंच गई थी। वहीं, जनवरी डिलीवरी वाला ब्रेंट क्रूड कॉन्ट्रैक्ट 2.63 डॉलर बढ़कर 113.43 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। अमेरिकी कच्चे तेल WTI का वायदा भाव भी 2.12 डॉलर यानी 2.08% की तेजी के साथ 104.12 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। अक्टूबर में ब्रेंट क्रूड करीब 13.6% चढ़ा है। जबकि WTI में 15.2% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

ट्रंप के सामने ईरान पर हमले का विकल्प, बाजार में बढ़ी चिंता

तेल की कीमतों में तेजी के पीछे अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को बड़ी वजह माना जा रहा है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेना के एक वरिष्ठ कमांडर ने गुरुवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को संभावित सैन्य कार्रवाई के विकल्पों की जानकारी दी थी। ट्रंप पहले भी संकेत दे चुके हैं कि अमेरिका में अगले सप्ताह होने वाले मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान की राजधानी तेहरान पर हवाई हमले फिर शुरू किए जा सकते हैं। इससे बाजार में यह आशंका बढ़ गई है कि युद्ध का दायरा और फैल सकता है। अगर संघर्ष तेज होता है, तो मिडिल ईस्ट से तेल की सप्लाई प्रभावित होने का खतरा बढ़ जाएगा। ऐसे में कीमतों पर दबाव और बढ़ सकता है।

होर्मुज स्ट्रेट में टैंकर पर हमला, जहाजों की सुरक्षा पर सवाल

होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता फिर बढ़ गई है। ब्रिटेन की समुद्री निगरानी संस्था UKMTO के अनुसार, गुरुवार को इस जलमार्ग से बाहर निकल रहे एक टैंकर पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ था। यह घटना ऐसे समय हुई है, जब तेल उत्पादक कंपनियों ने इस रास्ते से माल की आवाजाही फिर शुरू कर दी है। इसके बावजूद जहाजों पर हमले का खतरा बना हुआ है।

होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक ऊर्जा कारोबार के लिए बेहद अहम है। यहां जहाजों की आवाजाही बाधित होने पर कच्चे तेल और दूसरे एनर्जी प्रोडक्ट्स की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। इसी वजह से इस क्षेत्र में किसी भी नई घटना का असर तेल की कीमतों पर दिखाई देता है।

सऊदी अरब में भी बढ़ा सुरक्षा खतरा

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने सऊदी अरब में तैनात अपने गैर-आपातकालीन सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों को 23 अक्टूबर से देश छोड़ने का निर्देश दिया है। रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास ने शुक्रवार को सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए यह जानकारी दी। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस फैसले के पीछे हूती विद्रोहियों की ओर से नागरिक हवाई अड्डों और दूसरी महत्वपूर्ण इमारतों पर हमलों का खतरा भी शामिल है।

आने वाले दिनों में कहां जा सकता है कच्चे तेल का भाव?

तेल बाजार में अगले कुछ सप्ताह तक उतार-चढ़ाव बने रहने की आशंका है। रॉयटर्स के मुताबिक, सैक्सो बैंक ने गुरुवार को अपनी रिपोर्ट में कहा कि इजरायल में हालिया चुनाव और 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के कारण बाजार में अनिश्चितता बढ़ सकती है। बैंक का अनुमान है कि युद्ध खत्म होने के बाद भी कच्चे तेल की कीमतें 70 से 90 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में रह सकती हैं। युद्ध से पहले कीमतें आम तौर पर 60 से 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थीं। इसका मतलब है कि संघर्ष समाप्त होने के बाद भी तेल बाजार तुरंत सामान्य स्थिति में लौटे, यह जरूरी नहीं है।

गोल्डमैन सैक्स का अनुमान, 120 डॉलर तक जा सकता है तेल

तेल की सप्लाई में और रुकावट आने की आशंका ने कीमतों में तेजी की संभावना बढ़ा दी है। गोल्डमैन सैश में ग्लोबल कमोडिटी रिसर्च के सह-प्रमुख डैन स्ट्रूयवेन के मुताबिक, हाल के हमलों से पता चला है कि जहाजों की आवाजाही में बाधा किस तरह बढ़कर बड़ा संकट बन सकती है। गोल्डमैन सैश का अनुमान है कि अगर मडिल ईस्ट में जहाजों पर हमले तेज होते हैं, तो कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। इसके उलट, अगर तेल का निर्यात सामान्य होने लगता है, तो कीमतें गिरकर 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ सकती हैं।