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Gold Price: पिछले 10 दिन में 1000 रुपये टूटा सोना, अभी खरीदें, बेचें या होल्ड करें? एक्सपर्ट्स से समझिए सही रणनीति

Gold Price Outlook: सोने की चाल इस समय महंगाई के डर से तय हो रही है। कच्चे तेल के दाम बढ़ने से महंगाई को लेकर चिंता बढ़ रही है। महंगाई बनी रही, तो यूएस फेड ब्याज दरों को लंबे समय तक उच्च बनाए रख सकता है।

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May 28, 2026
Gold Price: सोने में गिरावट आई है। (PC: AI)

Gold Rate Forecast: सोने के लिए ऐसा माना जाता है कि दुनिया में जितना तनाव बढ़ेगा, निवेशक गोल्ड की तरफ भागेंगे और कीमतें ऊपर की तरफ जाएंगी। लेकिन इस बार कहानी थोड़ी अलग है। दुनिया में इस समय भू-राजनीतिक तनाव काफी बढ़ा हुआ है। अमेरिका और ईरान के बीच पीस डील हो नहीं पा रही है और संघर्ष लंबा खिंचता जा रहा है। ऐसे में सोने में अच्छी-खासी तेजी आनी चाहिए थी। लेकिन कीमतें कभी तेज भाग रही हैं तो कभी अचानक फिसल रही हैं।

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पिछले 10 दिन में टूटा सोना

पिछले 10 दिन की बात करें, तो सोने की कीमत में गिरावट आई है। गुडरिटर्न्स के अनुसार, देश में 19 मई को 24 कैरेट सोने का हाजिर भाव 1,57,040 रुपये प्रति 10 ग्राम पर था। यह भाव अब 28 मई को 1,56,060 रुपये प्रति 10 ग्राम पर है। यानी कीमत 980 रुपये कम हुई है। बाजार की नजर अब अमेरिका-ईरान बातचीत और आने वाले अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर टिकी हुई है।

महंगाई का डर तय कर रहा सोने की चाल

एक्सपर्ट्स के अनुसार, सिर्फ भूराजनीतिक तनाव ही नहीं, बल्कि महंगाई का डर भी सोने की चाल तय कर रहा है। कच्चे तेल के दाम ऊंचे बने रहने से दुनियाभर में महंगाई बढ़ने की आशंका है। यही वजह है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख बनाए रख सकता है। इसका असर गोल्ड पर भी पड़ रहा है। उच्च ब्याज दरें सोने पर दबाव डालती हैं, क्योंकि निवेशक बिना ब्याज वाले एसेट गोल्ड की बजाय अमेरिकी बॉन्ड्स में निवेश करने लगते हैं। यही कारण है कि सोने में गिरावट दिखी है। अब बड़ा सवाल यह है कि निवेशकों को इस समय क्या करना चाहिए? सोना बेच देना चाहिए, इंतजार करना चाहिए या फिर गिरावट में और खरीदारी करनी चाहिए?

गोल्ड बेचने का यह सही समय नहीं

कमोडिटी एक्सपर्ट पृथ्वीराज कोठारी का मानना है कि घबराकर सोना बेचने का यह सही समय नहीं है। उनके मुताबिक, दुनिया के केंद्रीय बैंक लगातार बड़े पैमाने पर सोना खरीद रहे हैं। ऐसे में लंबी अवधि में गोल्ड की चमक बनी रह सकती है। उनका कहना है कि बाजार में आने वाली गिरावट को एग्जिट नहीं, बल्कि एंट्री के मौके की तरह देखना चाहिए।

थोड़ा-थोड़ा निवेश करना बेहतर

ब्रोकरेज फर्म आनंद राठी में रिसर्च एनालिस्ट वेदिका नार्वेकर ने भी गिरावट में खरीदारी की सलाह दी है। उनका कहना है कि महंगाई का दबाव अगले कुछ महीनों तक बना रह सकता है, जिससे सोने में उतार-चढ़ाव रहेगा। ऐसे में एकमुश्त पैसा लगाने के बजाय थोड़ा-थोड़ा निवेश करना बेहतर रहेगा। हर 3 फीसदी गिरावट पर चरणबद्ध तरीके से खरीदारी की जा सकती है।

गोल्ड ETF और गोल्ड म्यूचुअल फंड ज्यादा बेहतर

निवेश के लिए एक्सपर्ट्स फिजिकल ज्वेलरी की जगह फाइनेंशियल गोल्ड को ज्यादा बेहतर मान रहे हैं। गोल्ड ETF और गोल्ड म्यूचुअल फंड को सबसे सुरक्षित और आसान विकल्प बताया जा रहा है। खासतौर पर उन निवेशकों के लिए जो SIP के जरिए निवेश करना चाहते हैं। वहीं, डिजिटल गोल्ड को सिर्फ छोटी और सुविधा आधारित खरीदारी तक सीमित रखने की सलाह दी जाती है।

पोर्टफोलियो में कितना हो गोल्ड?

पोर्टफोलियो में कितना सोना होना चाहिए, इस पर भी एक्सपर्ट्स की राय लगभग एक जैसी है। उनका कहना है कि कुल निवेश का करीब 10 से 15 फीसदी हिस्सा गोल्ड में रखना समझदारी हो सकती है। इससे महंगाई, रुपये की कमजोरी और अचानक आने वाले वैश्विक संकटों से बचाव मिलता है।

कहां जाएंगे सोने के भाव?

एक्सपर्ट्स अभी भी इस साल के लिए गोल्ड पर बुलिश नजर आ रहे हैं। कुछ एक्सपर्ट्स के अनुसार, MCX पर सोना अगले साल 1.90 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है। वहीं, ग्लोबल मार्केट में गोल्ड 5,000 डॉलर के पार भी जा सकता है। हालांकि, बीच-बीच में तेज गिरावट के दौर भी देखने को मिल सकते हैं। ज्वेलरी इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स का मानना है कि ऊंची कीमतों और आर्थिक अनिश्चितता की वजह से आभूषणों की मांग थोड़ी कमजोर रह सकती है। लेकिन निवेश के तौर पर गोल्ड की मांग बनी रहने की उम्मीद है।

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