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Oil Price Spike: कच्चा तेल जितना महंगा दिख रहा असलियत में कीमत उससे भी कहीं ज्यादा, जानिए कैसे

Oil Supply Crisis: निवेशक ऑयल के भाव फ्यूचर्स पर देखते है, जबकि स्पॉट मार्केट में कीमतें कहीं ज्यादा है। इसका मुख्य कारण ऑयल सप्लाई में आ रही बाधा है। अमरीकी लाइट स्वीट क्रूड का भाव स्पॉट मार्केट में, फ्यूचर्स भाव से 40 डॉलर प्रीमियम रेट पर है।
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Apr 14, 2026
crude oil price
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। (PC: AI)

डॉनल्ड ट्रंप की होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी की धमकी से पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया है। इससे एक तरफ जहां ग्लोबल बाजार में क्रूड ऑयल फ्यूचर्स की कीमतें फिर से 8 फीसदी बढ़कर 104 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है, वहीं दूसरी तरफ ट्रंप की ईरान को नई धमकी से बाजार में चिंता बढ़ गई थी और भारत सहित दुनियाभर के शेयर बाजारों में गिरावट आई। क्रूड ऑइल की कीमतों में तेजी से रुपए पर दबाव पड़ा है। ग्लोबल मार्केट में कच्चा तेल जितना महंगा दिख रहा, वास्तव में इससे कहीं अधिक मंहगा यानी प्रति बैरल 30 से 40 डॉलर तक अधिक महंगा बिक रहा है।

कैसे है असलियत से ज्यादा कीमत

निवेशक आमतौर पर ब्रेंट या डब्ल्यूटीआइ जैसे क्रूड ऑयल के फ्यूचर्स दाम देखते हैं, जो फिर से 104 डॉलर प्रति बैरल के आसपास हैं। लेकिन हकीकत इससे अलग है। असली खरीद-बिक्री यानी स्पॉट मार्केट (तुरंत डिलीवरी वाले बाजार) में तेल की कीमत 135 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चल रही है और हाल ही में यह 144 डॉलर प्रति बैरल से भी ज्यादा पहुंच चुकी है। यानी क्रूड स्पॉट मार्केट में 35 से 50 डॉलर प्रीमियम पर बिक रहा है।

इस अंतर की बड़ी वजह आपूर्ति संकट है। अमरीका-ईरान युद्ध के कारण सप्लाई में कमी से तेल की उपलब्धता कम है, जबकि मांग बनी हुई है, इसलिए कीमतें ऊपर हैं। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण रोजाना 1.20 करोड़ बैरल से ज्यादा तेल सप्लाई प्रभावित है, जो वैश्विक आपूर्ति का करीब 12 प्रतिशत है। ऐसे में कंपनियों को तुरंत डिलीवरी के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है। 144 डॉलर प्रति बैरल के उच्च स्तर पर अमरीकी लाइट स्वीट क्रूड का भाव स्पॉट मार्केट में, फ्यूचर्स भाव से 40 डॉलर प्रीमियम रेट पर है।

क्यों स्पॉट मार्केट में महंगा है क्रूड

फ्यूचर्स मार्केट में आने वाले महीनों के लिए तेल के सौदे होते हैं। यहां दाम स्पॉट मार्केट से कम दिख रहे हैं, क्योंकि बाजार को उम्मीद है कि आगे चलकर सप्लाई सुधरेगी और कीमतें नीचे आ सकती हैं। कूड ऑयल की फ्यूचर्स कीमतें भविष्य की उम्मीदों को दिखाती हैं, लेकिन स्पॉट कीमतें मौजूदा संकट को दर्शाती हैं, जहां तेल की कमी नजर आ रही है। इसका असर आम लोगों पर पड़ रहा है। विशेषज्ञों ने कहा, जब तक सप्लाई सामान्य नहीं होती, तब तक तेल की असली कीमत ऊंची बनी रह सकती है, जिससे महंगाई और अर्थव्यवस्था दोनों पर दबाव बना रहेगा।

बाय ऑन डिप से सेंसेक्स में अच्छी रिकवरी

इससे पहले सोमवार को ट्रंप की ओर से होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी की चेतावनी से कच्चा तेल 8 फीसदी चढ़ा। इससे सेंसेक्स कुछ मिनटों में ही करीब 1700 अंक लुढ़क गया, यानी 2 फीसदी से ज्यादा गिरकर खुला। हालांकि इस गिरावट के बाद सस्ती कीमतों पर खरीदारी (बाय ऑन डिप्स) से सेंसेक्स इंट्राडे लो से 1,000 अंक रिकवर हो 703 अंक टूटकर 76,847 पर बंद हुआ। निफ्टी 208 अंक गिरकर 23,842 पर रहा।

Updated on:
14 Apr 2026 10:32 am
Published on:
14 Apr 2026 10:31 am