GIFT City investment India: गुजरात के GIFT City के जरिए भारतीय निवेशक अब घर बैठे अमेरिका, चीन और कोरिया जैसे ग्लोबल बाजारों में निवेश कर सकते हैं। LRS के तहत सालाना 2.5 लाख डॉलर तक निवेश संभव है।
Global Investment: भारत में बड़ी संख्या में ऐसे निवेशक हैं, जो विदेशी शेयरों में पैसा लगाना चाहते हैं, लेकिन सही जानकारी नहीं होने के चलते इन्वेस्ट नहीं कर पाते। भारतीय निवेशकों को अमेरिका, चीन या कोरिया के शेयर बाजारों में पैसा लगाने के लिए किसी विदेशी प्लेटफॉर्म का सहारा लेने की जरूरत नहीं है। गुजरात स्थित GIFT City के जरिए भारत में रहकर ही अमेरिका, चीन और दूसरे ग्लोबल बाजारों में पैसा लगाया जा सकता है। गिफ्ट सिटी को सिंगापुर और मॉरीशस जैसे ग्लोबल फाइनेंशियल हब की तरह बनाने के लिए डिजाइन किया गया है।
यह सुविधा खास इसलिए भी है, क्योंकि इसके जरिए निवेश का प्रोसेस म्यूचुअल फंड में निवेश जितना सरल है। डिजिटल ऑनबोर्डिंग, फंड ट्रांसफर और ग्लोबल प्रोडक्ट में यूनिट मिलना- बस यही सारा प्रोसेस है।
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GIFT City यानी Gujarat International Finance Tec-City, गांधीनगर में स्थित भारत का इंटरनेशनल फाइनेंशियल सेंटर है। यहां काम करने वाले फंड और फाइनेंशियल प्रोडक्ट, इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विस सेंटर्स ऑथोरिटी यानी IFSCA की देखरेख में काम करते हैं। इस रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के जरिए भारतीय निवेशकों की ग्लोबल बाजारों तक पहुंच आसान बनी है।
शेयर मार्केट एक्सपर्ट डॉ रवि के अनुसार, भारतीय निवेशकों की विदेशी बाजारों में रुचि बढ़ने की एक बड़ी वजह यह है कि भारत दुनिया के कुल मार्केट कैप का सिर्फ 3 फीसदी हिस्सा है। बाकी 97 फीसदी हिस्से तक अधिकतर भारतीयों की पहुंच नहीं हैं। इसके अलावा पिछले दो वर्षों में कई ग्लोबल बाजारों जैसे कि अमेरिका, ताइवान, चीन और कोरिया ने भारतीय बाजार की तुलना में बेहतर परफॉर्म किया है।
कोरिया के मार्केट इंडेक्स कोस्पी में एक साल में करीब 200 फीसदी का उछाल दर्ज हुआ है। वहीं, भारतीय बाजार में इस दौरान 5 फीसदी की गिरावट देखी गई।
GIFT City के जरिए निवेश RBI की Liberalised Remittance Scheme यानी LRS के तहत होता है। LRS के तहत कोई भी भारतीय नागरिक हर साल 2.5 लाख डॉलर तक विदेश भेज सकता है। चार सदस्यों के एक परिवार के लिए यह सीमा मिलकर करीब 10 लाख डॉलर सालाना हो जाती है।
निवेश की न्यूनतम राशि प्रोडक्ट पर निर्भर करती है। हालांकि, Alternative Investment Funds यानी AIF के लिए कम से कम 1.5 लाख डॉलर की जरूरत होती है, लेकिन रिटेल निवेशकों के लिए बने प्रोडक्ट महज 5,000 डॉलर से शुरू हो सकते हैं। निवेशक सीधे या किसी फाइनेंशियल एडवाइजर के जरिए डिजिटल तरीके से अकाउंट खोल सकते हैं।
ग्लोबल निवेश के साथ कुछ जोखिम भी जुड़े हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। डॉलर और रुपये के बीच उतार-चढ़ाव रिटर्न को प्रभावित कर सकता है। पश्चिम एशिया या किसी और क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव बाजारों को हिला सकता है। टैक्स के मोर्चे पर भी ध्यान देना जरूरी है क्योंकि दो साल से ज्यादा की होल्डिंग पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन का लाभ मिलता है, लेकिन इसकी शर्तें घरेलू निवेश से अलग हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि निवेश से पहले प्रोडक्ट को समझें और किसी प्रोफेशनल फाइनेंशियल एडवाइजर से राय जरूर लें।