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HPCL Share Price: क्रूड ऑयल 6% उछला तो BPCL और IOC समेत इन तेल कंपनियों के गिर गए शेयर

BPCL Share Price Fall: अमेरिका और ईरान के बीच फिर से सैन्य तनाव बढ़ने की वजह से कच्चे तेल के दामों में एक बार फिर उछाल देखने को मिल रहा है। ऐसे में HPCL, BPCL और IOC के Share Price में भारी गिरावट आई है।
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Jul 08, 2026
Crude OIl Price Hike Impact On OMCs Share Price
IOC के Share Price में गिरावट आई है। (फोटो: AI)

IOCL Share Price Fall: भारतीय शेयर बाजार के लिए बुधवार का दिन बहुत बुरी गिरावट लेकर आया। बीएसई सेंसेक्स 1677 अंकों की गिरावट के साथ बंद हुआ। गिरावट इतनी बड़ी थी कि इसके 30 शेयरों में से एक भी हरे निशान के साथ बंद नहीं हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी में 516 अंकों की गिरावट देखने को मिली। इस जबरदस्त गिरावट के बीच ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के शेयरों में 4.71 फीसदी तक की गिरावट आई। दरअसल मिडिल ईस्ट में फिर से सैन्य तनाव बढ़ने के बाद कच्चे तेल की कीमत में उछाल आया है। इसका असर तेल मार्केटिंग कंपनियों के शेयरों पर भी देखने को मिला।

Petrol Diesel की कंपनियों के शेयरों में कितनी गिरावट आई?

आज सरकारी तेल कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई। सबसे ज्यादा गिरावट HPCL के शेयर में देखने को मिली। इसका शेयर 4.71 फीसदी या 19.10 रुपये की गिरावट के साथ 386 रुपये पर बंद हुआ। इसके बाद BPCL के शेयर में 3.31 फीसदी या 10.41 रुपये की गिरावट आई। IOC का शेयर 3.2 फीसदी गिरावट के साथ बंद हुआ।

मिडिल ईस्ट में फिर भड़की जंग की आग

खबरों के मुताबिक, अमेरिका की ओर से ईरान पर किए गए हमलों के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव फिर बढ़ गया है। इससे पहले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर हमले हुए थे, जिनके लिए अमेरिका ने ईरान को जिम्मेदार ठहराया। जवाब में ईरान ने बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल हमले किए।

ब्रेंट और WTI क्रूड में तेज उछाल

तनाव बढ़ने के बाद ग्लोबल मार्केट में क्रूड के दामों में जोरदार तेजी आई। शाम 4 बजे ब्रेंट क्रूड 4.11 डॉलर बढ़कर 78.27 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं, WTI क्रूड भी 5.47 फीसदी यानी 3.85 डॉलर चढ़कर 74.29 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया।

कच्चा तेल महंगा होने से क्यों बढ़ती है चिंता?

HPCL, BPCL और IOC जैसी तेल कंपनियों के लिए कच्चा तेल सबसे बड़ा कच्चा माल है। इसकी कीमत बढ़ने पर फ्यूल बनाने और रिफाइनिंग की लागत भी बढ़ जाती है। यदि पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में उसी अनुपात में बढ़ोतरी नहीं होती, तो इन कंपनियों के मुनाफे पर दबाव आ सकता है। इसके अलावा महंगा कच्चा तेल भारत का आयात बिल बढ़ाता है। यदि ऊंची कीमत पर खरीदा गया तेल बाद में उसी हिसाब से नहीं बिक पाता, तो कंपनियों को इन्वेंट्री नुकसान का भी सामना करना पड़ सकता है।

Updated on:
08 Jul 2026 04:37 pm
Published on:
08 Jul 2026 04:37 pm