
अमेरिकी शेयर बाजार में आई बड़ी गिरावट (IANS Photo)
US Iran Deal Stock Market Crash: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान को लेकर दिए गए बड़े बयान का असर वैश्विक बाजारों पर भी दिखने लगा है। ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ हुआ समझौता अब खत्म हो चुका है और अमेरिका ईरान के साथ आगे बातचीत नहीं करना चाहते। उनके इस बयान के बाद अमेरिकी शेयर बाजार के फ्यूचर्स में तेज गिरावट दर्ज की गई, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 5 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी आई।
तुर्किये में नाटो सम्मेलन से पहले ट्रंप ने कहा कि उनकी ईरान के साथ आगे बातचीत में कोई दिलचस्पी नहीं है। उनके इस बयान ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। बाजार को डर है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ता है तो इसका असर तेल की सप्लाई और वैश्विक कारोबार पर पड़ सकता है। इसी चिंता के चलते अमेरिकी शेयर बाजार के फ्यूचर्स में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। नैस्डैक फ्यूचर्स चार सप्ताह के सबसे निचले स्तर तक पहुंच गया।
डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद अमेरिका के शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आई, डॉव ई-मिनी 620 अंक यानी 1.17 प्रतिशत नीचे कारोबार कर रहा था। एसएंडपी 500 ई-मिनी 63.75 अंक, 0.84 प्रतिशत टूट गया। वहीं नैस्डैक 100 ई-मिनी में 330 अंकों, 1.12 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इन आंकड़ों ने साफ कर दिया कि निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनानी शुरू कर दी है।
ट्रंप के बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) दोनों की कीमतों में पांच प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई। तेल की कीमतें बढ़ने का सबसे बड़ा कारण मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव माना जा रहा है। यह क्षेत्र दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक इलाकों में शामिल है और यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव वैश्विक सप्लाई को प्रभावित कर सकता है।
तेल की कीमतें बढ़ने का फायदा अमेरिकी ऊर्जा कंपनियों के शेयरों को मिला। प्री-मार्केट कारोबार में शेवरॉन का शेयर 2.4 प्रतिशत, एक्सॉन मोबिल 3 प्रतिशत और कोनोकोफिलिप्स 2.2 प्रतिशत तक चढ़ गया। इसके अलावा डेवन एनर्जी में 2.5 प्रतिशत की बढ़त रही। ऑक्सिडेंटल पेट्रोलियम 2.6 प्रतिशत, एपीए कॉर्प 4.2 प्रतिशत और डायमंडबैक एनर्जी 2.4 प्रतिशत ऊपर कारोबार करते दिखे।
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया है कि उसने बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। ईरान का कहना है कि यह कार्रवाई अमेरिका द्वारा उसके खिलाफ किए गए हमलों के जवाब में की गई। वहीं अमेरिका का आरोप है कि ईरान ने होर्मुज में तेल टैंकरों पर हमले किए थे। इसी के जवाब में अमेरिकी सेना ने ईरान पर सैन्य कार्रवाई की थी। इन घटनाओं के बाद दोनों देशों के बीच बना युद्धविराम फिर खतरे में पड़ गया है।
Updated on:
08 Jul 2026 03:58 pm
Published on:
08 Jul 2026 03:57 pm
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